Support during Pregnancy: गर्भावस्था हर महिला के जीवन में एक खूबसूरत और महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान महिला के शरीर में कई बदलाव होने लगते हैं। शारीरिक बदलावों के साथ उनके मन में चिंता, दर, उत्साह जैसी भावनाएं विचरण करती रहती हैं। महिलाओं के मन में भविष्य को लेकर भी कई आशंकाएं चलती हैं। इन सभी भावनाओं को एक साथ संभालना उनके लिए बिलकुल भी आसान नहीं होता है। इन सब भावनाओं में उलझने के कारण हर महिला को अकेलापन और उदासीनता महसूस होने लगती है। इस नाजुक समय में अगर महिला को भावनात्मक सहयोग मिलता रहे तो वह खुद को सुरक्षित और सशक्त महसूस करती है। इस तरह का भावनात्मक सहयोग हर महिला के जीवनसाथी, परिवारजनों, ख़ास दोस्तों और समाज के दूसरे ख़ास और करीबी लोगों द्वारा दिया जा सकता है।
आइये जानते हैं एक गर्भवती महिला को भावनात्मक सहारा देकर उसके जीवन में आश्चर्यजनक और सकारात्मक परिवर्तन कैसे लाया जा सकता है।
भावनाओं का सम्मान करें

गर्भावस्था के समय हर महिला भावनात्मक परिवर्तनों का सामना करती है। कभी अचानक मन खुश हो जाना, तो कभी किसी अनजानी चिंता या डर से घिर जाना। ऐसे में जरुरी है कि परिवार के सदस्य और जीवनसाथी महिला की बातों को ध्यान और सहानुभूति के साथ सुनें। उसके भावनात्मक अनुभवों को जज किए बिना समझने की कोशिश करें। इस तरह हर स्त्री मानसिक रूप से हल्का महसूस करने लगेगी।
सकारात्मक वातावरण
घर का माहौल गर्भवती महिला के मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह से प्रभावित करता है। अगर घर में झगड़े, और तनाव का माहौल होगा तो इसका सीधा असर उस महिला के मन और होने वाले शिशु के विकास पर पड़ेगा। ऐसे में परिवार को प्रेम, समझ और सहयोग भरा माहौल बनाये रखना चाहिए। घर का खुशनुमा माहौल न केवल गर्भवती महिला को मानसिक राहत देता है, बल्कि गर्भस्थ शिशु के मानसिक विकास को भी सकारात्मक बनाता है।
आत्मविश्वास बढ़ाना
महिला के शरीर में होने वाले बदलाव और भविष्य को लेकर उसके मन में उठते सवाल आत्मविश्वास को कम कर देते हैं। ऐसे समय में उसे लगातार यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि वह इस बदलाव को सहजता से स्वीकार कर सकती है। उसकी भावनाओं की कद्र करें और उसे प्रोत्साहित करें कि वह हर चुनौती को सकारात्मक रूप से ले।
घरेलू कार्यों में पूरी तरह से सहयोग करें

भावनात्मक सहयोग केवल संवेदनाओं तक ही सीमित ना रखें बल्कि हर तरह से गर्भवती महिला का सहयोग करें। जब परिवार के सदस्य खासतौर पर जीवनसाथी हर काम में महिला का सहयोग करते हैं, तो यह महिला को ख़ास एहसास करवाता है। इससे न केवल उसका शारीरिक बोझ हल्का होता है, बल्कि उसे यह महसूस होता है कि वह इस यात्रा में अकेली नहीं है।
सहभागी बनें
आने वाली जिम्मेदारियों को लेकर हर गर्भवती महिला के मन में कई प्रकार की शंकाएं होती हैं, जैसे पैसों का प्रबंध, बच्चे की देखभाल, करियर और मातृत्व के बीच संतुलन। ऐसे में अगर परिवार और जीवनसाथी इन सभी बातों पर खुलकर अपने विचार साझा करें तो गर्भवती महिला को मानसिक स्थिरता मिलती है।
