Physical reasons for loneliness during pregnancy
Physical reasons for loneliness during pregnancy

Summary: शरीर के बदलाव कैसे मन को अकेला बना देते हैं

गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव, थकान, नींद की कमी और शारीरिक कमजोरी महिला को भावनात्मक रूप से अलग-थलग महसूस कराती है।

Physical reasons for loneliness during pregnancy: गर्भावस्था के दौरान एक महिला शारीरिक और मानसिक दोनों ही प्रकार के बदलावों से गुजर रही होती है। गर्भावस्था सिर्फ बदलावों का नहीं बल्कि एक महिला के जीवन में नई सोच भावनाओं और उम्मीदों का भी सफर है। इसी सफर में कई बार परिवार के सदस्य या साथी महिला के भावनाओं को नहीं समझ पाते और अपने विचारों को थोपने का काम करते हैं जिस कारण महिला सब के साथ भी अकेलापन महसूस करती हैं। आईए जानते हैं इस लेख में आखिर वह कौन से कारण है जिनकी वजह से गर्भवती महिलाएं अकेलापन महसूस करती हैं।

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं। खासतौर से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। जिसका असर महिला के शरीर और मूड दोनों पर होता है। महिला छोटी बातों पर उदास हो सकती है, डर, चिंता, तनाव, रोना यह सभी परेशानियां आम हो जाती हैं।

गर्भावस्था के दौरान हो रहे शारीरिक बदलाव जैसे बच्चे के बढ़ने के साथ पेट का आकार बढ़ना, कमर और पैरों में दर्द का होना, अपच की समस्या रहना, बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस होना, नींद आने में समस्या होना, यह सभी परेशानियां गर्भवती महिला में तनाव को बढ़ाती है। इस तनाव का परिवार द्वारा ना समझ पाना महिला के अकेलेपन का कारण बनता है।

गर्भावस्था के दौरान महिला खुद को कमजोर और थका हुआ महसूस करती है। ऐसे में परिवार के द्वारा आपसे पहले जैसे काम को संभालने की उम्मीद करना भी महिला के अकेलेपन का कारण होता है।

Second Pregnancy Fear
Second Pregnancy Fear

पति द्वारा सहयोग न मिलाना: गर्भावस्था के दौरान अगर पति गर्भवती महिला की जरूरतो, इच्छाओं और परेशानियों को अनदेखा करता है तो महिला खुद को बिल्कुल अकेला महसूस करती है। महिला महसूस करती है कि उसे भावनात्मक समर्थन नहीं मिल रहा है।

परिवार द्वारा परेशानियां न समझना: ज्यादातर गर्भवती महिला को अपने घर के बड़े बुजुर्गों से सुनने को मिल जाता है, ‘हमारे समय में हम पूरे 9 महीने काम करती थी घर और बाहर दोनों, आज की औरतों से तो घर के दो काम नहीं होते’। इस तरह के वाक्य गर्भवती महिला को काफी आहत पहुंचाते हैं। वह सोचती हैं कि परिवार द्वारा शारीरिक परेशानी देखकर नहीं समझा जा सकता तो मानसिक परेशानी कैसे बताएं और वह अकेलेपन का शिकार होती है।

सामाजिक कारण: कई बार महिला अपने तनाव, डर या चिंता को इसलिए भी नहीं कह पाती की हर कोई उसे खुश रहने की सलाह देता है और यही महिला में अकेलेपन का कारण बनता है।

परिवार गर्भवती महिला से बात करते समय सिर्फ उसकी बातों को सुने, ना कि समाधान पर ध्यान दें। गर्भावस्था के दौरान महिला अपनी भावनाएं साझा करने के लिए बताती हैं ना के समाधान के लिए।

हमारे जमाने में ऐसा था, हम ऐसा करते थे, कहकर उनकी तुलना खुद से ना करें। बल्कि उनकी भावनाओं को बिना जजमेंटल हुए सुने।

उसे हर वक्त यह कहने की बजाय तुम यह खाओ, यह करो, इससे तुम्हारा बच्चा स्वस्थ होगा की बजाय कहें यह खाने से तुम स्वस्थ रहोगी, तुम्हें कमजोरी महसूस नहीं होगा। आपके इस तरह कहने से महिला को लगता है कि आप सिर्फ बच्चे की नहीं बल्कि उसकी फिक्र भी करते हैं।

अगर महिला आपसे कहे उसे डर लग रहा है, वह अकेला महसूस कर रही है, रोने का मन है, तो ऐसी अवस्था में उसे अकेला ना छोड़े। बल्कि उसके साथ रहे। उससे जानने की कोशिश करें, वह ऐसा क्यों महसूस कर रही है। साथ ही उसके मन को डाइवर्ट करें।

गर्भावस्था के दौरान कई बार अकेलापन महसूस होने का कोई कारण नहीं होता। बस महिला महसूस करती हैं। ऐसे में महिला से सवाल-जवाब, सलाह नहीं सिर्फ प्यार और साथ दें।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...