Grihani
Grihani

Hindi Motivational Story: तेज धूप में मीना के कदम तेजी से घर के तरफ़ मुड़ रहे थे
आत्मा से आवाज़ आ रहा था। ‘बावड़ी- थोड़ा रुक के कोल्डड्रिंक पीते हैं’
लेकिन घर आने वाले महेमानो की मेहमान नवाज़ी घर जाने के लिए प्रेरित कर रहा था
मध्यम वर्गीय परिवार और अगर घर में एक ही कमाने वाला हो तो फिर कहने सुनने को बचा ही क्या??
खैर मीना के कदम मुहल्ले के पास आकर ठिठक गए
रिश्तेदारों का रिक्शा दरवाजे पे लग चुका था और सभी लोग एक दूजे को सलाम नमस्कार कह- सुन रहे थे
मीना  पैरों पे जोर देतीं
घर के दरवाजे तक पहुँच कर ठ़डी सांस भरी ही थी की अम्मा की आवाज कानों से टक्कराती हूई माथे पे पहुँच गई
“अरे बाहर से आये है कुछ ठ़डा दो तुम तो ठकेश्वरी (खड़ा होना) माता बनीं पडीं हो”
“जी माँ”
कहते हुए मीना शरबत -नाश्ता देने लगीं
घर में गर्मजोशी के साथ गपशप चल रहा था और मीना संस्कारी बहू बनीं रसोई तो कभी बैठक में कोल्हु का बैल बन आ जा रही थी
गज़ब की बिडम्बना था
अगर पतिदेव रसोई में पानी पीने तक आ जाये तो दीदी (जेठानी) कटाक्ष करने में नहीं चुकती
“अरे वाह बबुआ जी को तो अब सब आता है! मेरे वक़्त तो पानी भी हाथों में ही चाहिए होता था”
मीना बिना किसी  सहायक के घर में खो चुकीं थी आखिर मध्यमवर्गीय हर परिवार में काम वाली कहाँ होती है
रसोई के कोने में बर्तन इकट्ठा अपनी ओर आकर्षित कर रहा था
बच्चे भी स्कूल से घर आ रहें होगें?
शाम को नाश्ता क्या बनाऊँ
ना जाने कितने सारे साधारण -सा चिंता मीना ने मन मस्तिष्क में चल रहे थे
तभी माँ ने आवाज लगाई
तो मीना ने सुनके सहमति में जवाब दे दिया
कड़क चाय की मांग थी बैठक में
अतः जेठ -जेठानी और अन्य सभी के लिए चाय लेकर चलीं गई
सभी को चाय की प्याली देते हुए केवल हल्का सा मुस्कान भर रहीं थी
तभी जेठ जी ने कहा
“वाह मीना तुमने तो थोडे़ से जगह में ही अच्छा -खासा गमला लगा ली हो”
जेठानी जी ने प्रतिक्रिया में कहा
“रसोई भी सुसज्जित ढंग से रखा है”
माँ ने कहा
“सारा बाजार-हाट यही करतीं हैं”
सभी की बातें सुनकर पतिदेव ने कहा
“कपड़े तो यूँ चमकाती है कि मानो नये हो”
मीना सभी की बात सुनकर चुपचाप रसोई में चलीं आई
क्योंकि सभी ने कहा
वह काम अच्छा करती है एक अच्छी गृहणी है लेकिन किसी ने यह नहीं कहा
‘मीना थक गई होगी न’
अन्यास ही आज उसे
मायका और माँ की याद आंखों से उतरने लगीं