kisan ka ahankar
kisan ka ahankar

Hindi Motivational Story: एक संत किसी गाँव से गुज़र रहे थे। उन्होंने लहलहाते गेहूँ के पौधों को देखकर कहा, भगवान की कृपा से इस बार फसल बहुत अच्छी हुई है। खेत के किनारे हुक्का गुड़गुड़ाते हुए किसान को यह सुनकर बहुत बुरा लगा। उसने संत को टोकते हुए कहा, साधु बाबा, इसमें भगवान की कृपा की बात आख़िर कहाँ से आ गई।

मैंने खून-पसीना एक कर खेत जोता, बीज बोया तथा लगातार पानी देता रहा। मेरे परिश्रम के कारण ही आज यह खेत लहलहा रहा है। संत ने किसान के शब्द सुनें तथा मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गये। वह समझ गए कि किसान को अहंकार हो गया है। संयोग से कुछ दिनों के बाद संत उसी रास्ते से लौट रहे थे। उन्होंने उसी खेत के किनारे लगे पेड़ के नीचे विश्राम किया। उन्होंने देखा कि गेहूँ के पौधे सूखे और झुलसे पड़े हैं। उनमें कीड़ा भी लग गया था। संत को देखते ही किसान उनके लिए लोटा भरकर पानी ले आया। संत ने दुःखी मन से किसान से कहा, भैया बहुत बुरा हुआ। हरे भरे खेतों को क्या हो गया? किसान ने कहा, महाराज भगवान की मर्जी और क्या! यह सुनते ही संत ने कहा, भैया पिछले दिनों तो तुम लहलहाते खेत को देखकर कह रहे थे कि सब तुम्हारे परिश्रम का फल है। फिर भगवान को इस तबाही का दोष क्यों देते हो? प्रकृति के प्रकोप को दोषी क्यों नहीं मानते? किसान समझ गया संत ने उसके अहंकार पर चोट की है। उसने संत से क्षमा माँगते हुए कहा, महाराज मुझसे भूल हो गई थी।

ये कहानी ‘नए दौर की प्रेरक कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंNaye Dore ki Prerak Kahaniyan(नए दौर की प्रेरक कहानियाँ)