एक मुलाकात-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Ek Mulakat


Short Story in Hindi: विश्वास को नई-नई सरकारी स्कूल में नौकरी मिली थी।
सुबह – सुबह ठीक 8 बजे उसे अपने नए स्कूल में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यभार संभालना था, रात में उत्सुकता, जोश एवं रोमांच के कारण सो नहीं पाया।
उसे बस से लगभग 10 किमी जाना था,वो बस स्टॉप पर समय से पहले पहुँच गया।अपने समय पर बस आई वो उसमें जाकर बैठ गया।उसे बार-बार लग रहा था कि आज बस इतना धीरे क्यों चल रही है?तभी अगले स्टॉप पर एक बहुत ही खूबसूरत उसके ही उम्र की लड़की बस में चढ़ी और आकर उसके बगल में बैठ गई। विश्वास उसकी सुंदरता एवम आकर्षण में खो गया।उसे लगा कि वो सपना देख रहा है,किंतु यह सच्चाई थी,उसने खुद को चिकोटी काटकर देखा कि वह सो तो नहीं रह है।फिर थोड़ी देर बाद अपनी अपनी आदतानुसार अपना नियुक्ति पत्र निकालकर देखने लगा।
यह देखकर वो परम सुन्दरी नवयौवना ने उससे पूछा, क्या नई नौकरी लगी है?विश्वास को विश्वास नहीं हुआ कि वो उसी से पूछ रही है,वो जितनी सुन्दर थी,इसकी आवाज उससे ज्यादा मीठी थी।विश्वास ने कहा जी! और अपना नियुक्ति पत्र उसके हाथों में दे दिया।उसने जब नियुक्ति पत्र में देखा कि विश्वास उसी स्कूल में नियुक्त होने जा रहा है जहाँ पर स्वयं अध्यापिका है,वो खुशी से उछल पड़ीं,बधाई दिया।तभी स्कूल का स्टॉप आ गया।दोनों उतरे,स्कूल गए।वहाँ पर विश्वास को पदस्थापन करवाया।दोनों में गहरी दोस्ती हो गई।किन्तु कुछ दिनों के पश्चात उस परम सुन्दरी, विदुषी ने अपना स्थानांतरण अपने घर के पास करवा लिया। वो शादीशुदा थी,लेकिन विश्वास के लिए ये कोई विशेष बात नहीं थी,विश्वास के लिए यही गौरव की बात थी कि वो उसे अपना अभिन्न मित्र मानती थी,दोनों की पवित्र मित्रता ने इस मिथक को तोड़ दिया कि स्त्री पुरुष में स्वस्थ मित्रता नहीं हो सकती।
विश्वास के जीवन की वो “एक मुलाकात” चिर अविस्मरणीय बन गई,जिसे याद कर वो आज भी मुस्कुरा उठता है…

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