Bollywood Romantic Movie : मनुष्य भावनाओं से बना है ऐसा संभव नहीं कि कोई व्यक्ति भावना से हीन हो। उन तमाम अहसासों से जिनसे एक इंसान बनता है उसमें सबसे खूबसूरत अहसास है प्रेम। प्रेम एक ऐसा अहसास है जिसे महसूस करके इंसान इस दुनिया में आने का उद्देश्य समझ जाता है। प्रेम एक व्यक्ति को महज इस दुनिया में ही नहीं बल्कि यहां से जाने के बाद भी अमर रखता है। मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखा भी है कि ‘बन बन डोली जनक दुलारी पहन के प्रेम की माला, दर्शन जल की प्यासी मीरा पी गयी विष का प्याला, ‘खाक बुत को और बुत को देवता करता है इश्क और इंतेहा तो ये है कि बन्दे को खुदा करता है इश्क’ इससे खूबसूरत बयां प्रेम का क्या ही हो सकता है। इसी तरह न जाने कितना कुछ लिखा गया है और जाहिर है बयां वही होता है जो महसूस किया गया होता है। प्रेम करने वालों ने अपनी जान को भी इसके हवाले किया है और फिर उन सभी लोगों जिनके होने के कारण इतिहास खुद पर गर्व करता है उन सभी का पैगाम यही है कि प्रेम करो इससे ज्यादा बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं।
इस सब के बीच एक बात जो मन में हलचल पैदा करती है वो ये है कि क्या होगा अगर प्रेम पूरा न हो या प्रेमी अपनी इच्छा से साथ न रह सके तो क्या है अपूर्ण प्रेम होगा? हम अक्सर ही फिल्मों, किताबों और कई बार असल जिन्दगी में भी लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि उनका प्रेम अधूरा रह गया। वो प्रेम को पूरा नहीं कर सके या किन्ही कारणों से उनका साथ नहीं रहा। लेकिन क्या प्रेम तभी है जब पूर्ण हो ऐसा तो नहीं है कई बार प्रेम कहानियां पूरी नहीं होती असल जिन्दगी में प्रेमी साथ नहीं रह पाते उन्हें अपना रिश्ता खत्म करना पड़ता है लेकिन क्या प्रेम इतना कमजोर अहसास है जो प्रेमी के बिछड़ने से खत्म हो जाए। यूं तो प्रेम कभी असफल होता नहीं। लेकिन कई बार लोगों की ये शिकायत रहती है कि वो अपने प्रेम को सफल नहीं बना पाए हैं। ऐसे में आपके जज्बातों को समझते हुए कुछ फिल्में हैं जो आपको सिखाती हैं कि अपने असफल प्रेम को कैसे संजोया जाए। किस तरह हालातों के आगे घबरा कर अपने प्रेम न छोड़ा जाए।
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मेरी प्यारी बिंदु

‘मेरी प्यारी बिंदु फिल्म एक बेहद प्यारी फिल्म मानी जाती है। फिल्म में परिणीति चोपड़ा और अंशुमान खुराना ने बेहतरीन अभिनय किया है। ये कहानी एक ऐसे प्रेमियों की कहानी है जिनकी जिन्दगी में कुछ हालातों के कारण वो एक नहीं हो पाते। ये कहानी है अभिमन्यु और बिंदु की, बिंदु अभिमन्यु के बचपन की दोस्त है लेकिन जीवन में कुछ परिस्थितियों के चलते वो एक-दूसरे से दूर चले जाते हैं लेकिन आपस में पत्रों के द्वारा एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। इस बीच बिंदु की तीन बार सगाई टूट जाती है। अभिमन्यु जो कि बिंदु से प्रेम करता है लेकिन इजहार नहीं करता, अब बिंदु के सामने शादी का प्रस्ताव रखता है लेकिन बिंदु इसके लिए इंकार कर देती है और वो खुद की खोज में निकल जाती है। अपने-अपने जिन्दगी में परिस्थितियों से जूझते हुए दोनों अपनी जिंदगी जीते हैं। इस प्रस्ताव को मना करने के बाद बिंदु अभिमन्यु से माफी मांगती है। अभिमन्यु बिंदु से बात करना छोड़ देता है। लेकिन फिर एक दिन बिंदु अपनी शादी की खबर अभिमन्यु को देती है। अभिमन्यु, बिंदु के लिए खुश होता है। एक बर्थडे पार्टी में अभिमन्यु बिंदु की बेटी को देखता है और वो सोचता है कि अब बिंदु एक पत्नी है, एक मां है लेकिन अभी भी बिंदु मेरे लिए मेरी दोस्त ‘मेरी प्यारी बिंदु है। ये कहानी अपने प्रेम को संजोय रखने की बेहतरीन मिसाल है। जिस तरह अभिमन्यु अपने प्रेम को संभाले रखता है उसकी सबसे बड़ी जरूरत इस वक्त बिंदु नहीं है बल्कि बिंदु की खुशी है।
कल हो न हो

फिल्म ‘कल हो न हो की कहानी भी एक ऐसी ही कहानी है जो असफल होकर भी सफल है। ये कहानी है अमन (शाहरुख खान), नैना (प्रीति जिंटा) और रोहित (सैफ अली खान) की। अमन जो कि कैंसर का मरीज है लेकिन इस बात से कोई भी परिचित नहीं है, न ही रोहित और न ही नैना। रोहित जो कि नैना को पसंद करता है वहीं नैना और अमन एक दूसरे से प्रेम करते हैं। अमन कभी नैना को ये नहीं बताता कि वो नैना से प्यार करता है, लेकिन नैना उसे समझने लगती है क्योंकि वो जानता है कि कैंसर के कारण उसकी मौत हो जाएगी, ऐसे में नैना अकेली हो जाएगी और उसे बहुत दु:ख होगा। इसलिए अमन, नैना और रोहित के बीच नजदीकियां बढ़ाता है क्योंकि रोहित नैना से बेहद प्यार करता है और वो एक अच्छा इंसान है इसलिए अमन रोहित की मदद करता है ताकि नैना उससे प्यार करने लगे। यहां नैना और अमन एक साथ एक प्रेम में नहीं रह सके क्योंकि अमन को कैंसर है और कुदरत को कुछ और ही मंजूर है लेकिन इन हालातों में भी अमन सिर्फ ये चाहता है कि नैना खुश रहे और एक बेहतरीन इंसान के साथ रहे जो उसे समझे। अमन का जीवन कहानी में पूरा नहीं है लेकिन उसका प्यार पूर्ण है।
दिल एक मंदिर है

फिल्म ‘दिल एक मंदिर है में मीना कुमारी (सीता), राज कुमार (राम) और राजेंद्र कुमार (डॉ. धर्मेश) जैसे मशहूर कलाकर नजर आए थे। इस कहानी में सीता और डॉ. धर्मेश पुराने प्रेमी हैं लेकिन किसी कारणवश उनकी शादी नहीं हो पाती। सीता की शादी राम से हो जाती है। शादी के बाद पता चलता है कि राम को कैंसर है। राम के कैंसर के इलाज के दौरान सीता और डॉ. धर्मेश का सामना एक-दूसरे से होता है। सीता को पता चलता है कि राम का इलाज डॉ. धर्मेश करेंगे तो वो डरने लगती है कि कहीं किसी शिकवे गिले के चलते उनका इलाज ठीक तरह से नहीं करेंगे। सर्जरी के लिए डॉ. धर्मेश रात दिन मेहनत करते हैं। राम की सफल सर्जरी करने के बाद डॉ. धर्मेश कमरे से बाहर आते हैं और सीता को लगता है कि राम मर गए हैं, ये सोचते हुए वो डॉ. धर्मेश पर गुस्सा करने लगती है। वहीं डॉ. धर्मेश जमीन पर गिर पड़ते हैं और उनकी मौत हो जाती है। इस दृश्य में पूरी कहानी का अर्थ छुपा हुआ है। इस कहानी में डॉ. धर्मेश तो मर जाते हैं लेकिन सीता से जो उनका प्रेम होता है वो प्रेम के खातिर जी जान लगाकर सीता के पति को बचा लेते हैं। प्रेम का अर्थ भी तो यही है कि एक-दूसरे के लिए कुछ कर जान। इस कहानी में धर्मेश, सीता के साथ न होकर भी अपने प्रेम को सफल कर दिया।
बर्फी

फिल्म ‘बर्फी की कहानी भी बेहद सरल तरीके से ये सिखाती है कि प्रेम कभी भी असफल नहीं होता। फिल्म में बर्फी (रणबीर कपूर), श्रुति (इलियना) से प्रेम करता है, चूंकि बर्फी बोल और सुन नहीं सकता, इनके रिश्ते को श्रुति की मां नकार देती हैं। बर्फी को अपने बचपन की दोस्त झिलमिल (प्रियंका चोपड़ा) का पता चलता है। वो उससे जाकर मिलता है, झिलमिल का प्रेम अपने प्रति देखकर उसे महसूस होता है कि वो भी झिलमिल से प्यार करता है। आखिर में श्रुति बर्फी के साथ अपने रिश्ते को नहीं चला पाई। लेकिन इस कहानी में श्रुति का प्रेम सफल हुआ है क्योंकि बेशक वो बर्फी के साथ नहीं है लेकिन बर्फी को झिलमिल के साथ देखकर खुश है।
गुमराह

फिल्म ‘गुमराह की कहानी ये बताती है कि हालात के सामने अपने प्रेमी का साथ छोड़ना भी पड़े तो भी उसकी खुशी के लिए ये करना चाहिए। फिल्म में दो बहनें हैं कमला और मीणा, जिसमें बड़ी बहन कमला की शादी हो चुकी है और उसकी मौत हो जाती है। अपनी बड़ी बहन के बच्चों को संभालने के लिए मीना अपने जीजा (अशोक) से शादी कर लेती है। मीना राजेंद्र (सुनील दत्त) से प्यार करती है लेकिन हालात के चलते उसे ऐसा करना पड़ता है। मीना एक दफा फिर अपने प्रेमी राजेंद्र से मिलती है लेकिन उसे अहसास होता है कि बच्चों के लिए ये ठीक नहीं है और वो अपने प्रेमी से दूर हो जाती है। फिल्म में मीना और राजेंद्र एक नहीं हो सके लेकिन उनका ये त्याग उनके प्रेम को पूर्ण कर देता है।
मशहूर शायर हफीज होशियारपुरी का एक मकबूल शेर है कि ‘मोहब्बत करने वाले कम न होंगे, तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे। बेशक मोहब्बत करने वालों का मिलन न हो सकता हो लेकिन उनमें प्रेम कभी नहीं मरता वो अपने प्रेम को संजोय रखते हैं जैसे कोई व्यक्ति किसी एल्बम में कुछ धुंधली तस्वीरें संजोय रखता है।
