kutta aur javaee story in Hindi
kutta aur javaee

kutta aur javaee story in Hindi : बादशाह ने एक दिन पूछा, ‘सबसे कृतज्ञ कौन और सबसे कृतघ्न कौन है?’

बीरबल ने कहा, ‘इसका उत्तर मैं दरबार में दूंगा।’

कई दिनों के बाद बीरबल दरबार में दो प्राणियों को लाया। उनमें एक कुत्ता था और दूसरा जंवाई।

बादशाह ने पूछा, ‘ये कौन हैं? और यह कुत्ता क्यों लाए हो?’

बीरबल ने उत्तर दिया, जहाँपनाह! ‘एक कृतज्ञ है और दूसरा कृतघ्न है।’

‘मतलब समझाओ।’

‘ये कुत्ता वफादार है। स्वामिभक्त और कृतज्ञ है। इसे गलती पर मारा-पीटा जा सकता है। तब भी कुछ देर बार दुम हिलाएगा। आपके हाथ चाटेगा। यह बड़ा कृतज्ञ होता है। दूसरा यह नँवाई है। इसे बेटी दे दो, सब कुछ दे दो। परंतु इसे सब्र या संतोष नहीं होता। तब भी अकड़ा रहेगा। यह कृतघ्न होता है।’

बादशाह को क्रोध आ गया। उसने आदेश दिया, ‘जंवाई को फाँसी दे दी जाए।’

बीरबल बोले, ‘जहाँपनाह! यह गलत है। इसे फाँसी देना उचित न होगा।’

‘क्यों?’

‘क्योंकि मैंने अपने ही जंवाई के लिए नहीं कहा। यह बात हर जवाई पर लागू होती है। किस-किस को फाँसी देंगे? आप सभी किसी-न-किसी के जवाई हैं। मैं भी हूँ और आप भी।’

बादशाह चौंक पड़े।

वह सोच भी नहीं पाए थे कि जवाई तो वह भी हैं। जंवाई तो बीरबल भी है।

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