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डबल धमाल कर दिया

उन दिनों मैं मायके उन दिनों मैं मायके  गई हुई थी। अचानक, एक दिन मेरे पति देव अपने एक जिगरी मित्र के साथ वहां आ धमके। कुछ ही देर में मैं उन दोनों के लिए चाय बनाकर ले आई। इनके मित्र महोदय पहला घूंट लेते ही तपाक से बोल पड़े, ‘अच्छा खासा मजाक कर लिया भाभी आपने! क्या हम […]

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जिसने बांधा, वही खोले

बात तब की है, जब मैं तकरीबन तीन-चार साल की थी। मेरे पिताजी रोज सुबह ‘दुर्गा सप्तशती का पाठ करके ही ऑफिस जाया करते थे। एक दिन उनकी पूजा के समय मैं बहुत ही जिद कर रही थी। जिस पर उन्होंने गुस्से में मुझे चारपाई के पाये से बांध दिया और खुद पूजा करने लगे। […]

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इतना खाते हैं शर्म नहीं आती

हमारे घर पर पापा के कुछ दोस्त आए हुए थे तो मम्मी ने तरह-तरह के पकवान बनाए। मैं भी मम्मी का हाथ बंटा रही थी। जब मेहमान खाने पर आए तो वो लोग खाना खाने में सकुचा रहे थे, तो मैंने झट से बोला, इतना खाते हैं… शर्म नहीं आती। सभी मेहमानों का मुंह देखने […]

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पापड़ गायब हो गए

एक बार मैं अपने मायके गई हुई थी, उसी समय मेरी दीदी और उनके दोनों बच्चे भी वहां आए हुए थे। घर पर जब सब इकट्ठे होते तो बहुत खाते-पीते और मस्ती करते। एक दिन गली में पापड़ वाला आवाज देते हुए निकला, हम सभी को पापड़ खाना बहुत पसंद था। जैसे ही हमने पापड़ वाले की आवाज सुनी […]

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मुझे जहन्नुम जाना है

बचपन में मुझे घूमने का बहुत शौक था, खासकर पापा के स्कूटर पर पीछे बैठ कर। पापा भी मेरी इस पसंद से अच्छी तरह से वाकिफ थे इसलिए वो अक्सर मुझे अपने स्कूटर पर बैठा कर सैर कराते थे। एक दिन पापा किसी जरूरी काम से बाहर जा रहे थे। जब उन्होंने अपना स्कूटर घर […]

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खूब पड़ी बारिश की मार

जब मैं 7-8 साल का था, मुझे बारिश में नहाना बहुत पसंद था। एक दिन की बात है, मैं स्कूल के लिए निकला। मैंने देखा बहुत जोर की बारिश आ रही है। सोचा घर जाऊंगा तो खाना नहीं मिलेगा और खेल भी नहीं। फिर मैं बस में चढ़ गया। जब स्कूल आने में 5 मिनट […]

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जै हो गैया मैया की – गृहलक्ष्मी कहानियां

शहर की स्वच्छता को चार-चांद लगाते उस सिविल अस्पताल के पिछवाड़े में खाने लायक कुछ ढूंढने वह वह रोज वहां आती थी। वह आती और बड़ी दिलेरी से रोगियों की जूठन या फिर फलों के सड़े गले छिलके तक खाने में वह गुरेज न करती और उस ढेर पर चढ़ती चली जाती, एक ही झटके में, देश के स्वास्थ्य नियमों को ठेंगा दिखाने की नीयत से शायद। इंजेक्शन की सुईयां तो रोगी तक को नहीं चूकती तो फिर उसके नंगे नखों को छलनी करने से क्योंकर कतराती?

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गृहलक्ष्मी की कहानियां : नियति

शादी के बाद से ही परित्यक्ता का जीवन व्यतीत कर रही माधवी के पति ने जब वापसी की इच्छा व्यक्त की तो माधवी और उसके बेटे ने जो निर्णय किया, उस पर उसे गर्व था…

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मैरिड सर्टिफिकेट दिया जाएगा

एक बार स्कूल में समारोह था। कई तरह के कार्यक्रम आयोजित हुए थे। एक कार्यक्रम के अंतर्गत मैरिट में आने वाले बच्चों को सर्टिफिकेट दिए जाने थे, जिन में मेरा भी नाम शामिल था। छोटे होने के कारण मुझे मैरिट शब्द का सही अर्थ नहीं पता था। मैंने घर आकर सभी को बताना शुरू किया कि मुझे ‘मैरिड […]

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गृहलक्ष्मी की कहानियां : अंतर्द्वंद

आज सुबह से ही विभा का दिल बहुत बेचैन था। रह रह कर उसे कुछ अनजाना सा भय सता रहा था। जैसे तैसे करके उसने अपना सारा काम निपटाया और छुट्टी का समय होते ही घर के लिए निकलने की तैयारी करने लगी।

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