काफी चुनौतीपूर्ण है दूसरी शादी के लिए बच्चे को तैयार करना: Remarriage Tips
Remarriage Tips

Remarriage Tips: आज के आधुनिक दौर में हमारी सामाजिक मान्यताओं में काफी बदलाव आया है, जिसमें से एक है तलाक। पहले जहां तलाक और तलाकशुदा व्यक्ति खासकर महिलाओं को हेय दृष्टि से देखा जाता था। वहीं आज उन्हें सामाजिक मान्यता मिल रही है। आज कई तलाकशुदा महिलाएं सेल्फ-इंडीपेंडेंट हैं और सिंगल पैरेंट बनकर अपने बच्चों की परवरिश कर रही हैं। कई महिलाएं रिश्ता टूटने के दर्द को भूलकर अकेले कामयाबी का मुकाम हासिल कर चुकी हैं। तो दूसरी ओर कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो जिंदगी का सफर अकेले तय करने में खुद को असमर्थ पाती हैं और अपनी कस्टडी में पल रहे बच्चों के उज्जवल भविष्य की खातिर दोबारा शादी करने का निर्णय लेती हैं।

भले ही समाज में पुनर्विवाह को सहमति मिल रही है और महिलाएं सुखमय जीवनयापन भी कर रही हैं। फिर भी टूटे रिश्ते के दर्द से उबरना और पुनर्विवाह करना महिलाओं के लिए आसान नहीं होता। नए रिश्ते में बंधने के लिए खुद को और बच्चों को तैयार करना महिलाओं के लिए खासा जद्दोजहद भरा होता है। नई जिंदगी की शुरूआत करने के लिए महिलाओं को मानसिक रूप से तैयार होना बहुत जरूरी है, क्योंकि तलाक होने से सिर्फ आप ही नहीं आप से जुड़े सपने भी टूट जाते हैं, जो आपने अपने लाइफ पार्टनर के साथ जुड़कर सोचे थे।

मां की दूसरी शादी के बाद बच्चों को काफी मुश्किलें आती हैं। महिला को अपने नए जीवन साथी से भी कानूनी तौर पर बात करनी चाहिए ताकि आपके बच्चे का भविष्य खराब न हो। कई बार बच्चे नए रिश्तेे के लिए तैयार नहीं होते। उन्हें स्टेप-पेरेंट या स्टेप-सिब्लिंग (सौतेले भाई-बहन) के साथ एडजस्ट करने में भी दिक्कत हो सकती है। साथ ही उनके मन के किसी कोने मे अपनी मां को भी खोने का डर बना रहता है। इसलिए महिला को अपने बच्चे के बारे में विचार करके ही कोई फैसला लेना पड़ता है।

लिहाजा सब कुछ सोच-समझकर ही पुनर्विवाह का कदम उठाना बेहतर है। सबसे जरूरी है- शादी से पहले ही नए जीवन साथी के प्रति अपने बच्चों के मन में से डर को निकालना और उनमें तालमेल बनाने की कोशिश करना। महिलाओं को बच्चों को इसके लिए तैयार करने के भरसक प्रयास करने चाहिए और कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए ताकि भविष्य में अपने निर्णय  पर किसी तरह का पछतावा न हो-

बच्चे को भरोसा दिलाएं

बच्चे को भरोसा दिलाएं
बच्चे को भरोसा दिलाएं

 महिला को बच्चों के साथ खुलकर बात करनी चाहिए। बच्चे को अपने पुराने रिश्ते के टूटने की वजह ईमानदारी से बतानी चाहिए। यह भी साफतौर पर बताना चाहिए कि वो पुराने रिश्ते को भूलकर नए सिरे से जिंदगी शुरू करना चाहती हैं जिसमें उसके पूरे सहयोग की जरूरत है। उन्हें समझाना चाहिए कि वे उन्हें बहुत प्यार करती है और उनकी खुशियों भविष्य के लिए चिंतित हैं। भले ही नए जीवन साथी के भी बच्चे हैं, लेकिन दूसरी शादी से अपने बच्चे के बीच प्यार में किसी भी तरह की कमी नहीं आएगी। वो बच्चे के साथ हैं और हमेशा रहेंगी। सबकी भलाई के लिए ही वह दूसरी शादी कर रही है।

बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं

बच्चे के साथ बाॅन्डिंग बढ़ाने और कॉन्फिडेंस को बूस्ट करने के लिए मां को उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए। वो बच्चे के साथ हाॅबीज, उनके इंटरेस्ट और फेवरेट एक्टिविटीज कर सकती हैं। इससे बच्चे को आपका सपोर्ट मिलेगा और वो आपके ज्यादा करीब होगा। बच्चे को पेरेंट्स के टूटे रिश्ते और नए रिश्ता कायम करने के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए एकसाथ समय बिताना दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

ओपन कम्युनिकेशन

बच्चे की भावनाओं के प्रति महिला को सजग रहना चाहिए। संभव है कि वह अपनी मां की दूसरी शादी के निर्णय से खुश हो, लेकिन नए परिवार में एडजस्ट होने को लेकर परेशान हो।  महिला को बच्चे की भावनाओं को समझने के लिए उसके साथ लगातार बात करते रहना चाहिए। नए रिश्ते को लेकर बच्चों को अपनी फीलिंग या विचारों को एक्सप्रेस करने और सवाल पूछने की पूरी छूट देनी चाहिए। बच्चे को यह अहसास दिलाने की भरसक कोशिश करनी चाहिए कि वो बच्चे को बहुत प्यार करती हैं और उनकी बहुत फिक्र है। ऐसा करने से महिला बच्चे को अपना पूरा सपोर्ट और अच्छी गाइडेंस दे पाती हैं।

डिसीजन-मेकिंग प्रोसेस में बच्चे को भी करें शामिल

किसी भी तरह के डिसीजन लेने से पहले महिला को बच्चे की राय जरूर लेनी चाहिए। फिर दूसरी शादी के अहम मसले पर बात करने से उसमें सेेंस ऑफ कंट्रोल आता है और वो नए परिवार में खुद को एडजस्ट कर पाता है। महिला को उनकी सहमति-असहमति या सुझाव पर जरूर ध्यान देना चाहिए।

पिता से अलग होने की जबरदस्ती न करें

महिला ने अगर नई जिंदगी की शुरूआत करने क निर्णय ले लिया है, लेकिन बच्चे को अपने पहले पिता से मिलना-जुलना पसंद है, तो उसे रोकना नहीं चाहिए। बल्कि उससे उनके बारे में जरूर पूछना चाहिए ताकि बच्चा महसूस करे कि उसकी मां अभी भी उनका ख्याल रखती है।

सपोर्ट सिस्टम की लें मदद

बच्चे को समझाने के लिए दूसरों के सपोर्ट की भी जरूरत होती है। इसके लिए महिला को ऐसे रिश्तेदार, दोस्त या करीबी लोगों की मदद लेनी चाहिए जो उसे दूसरी शादी के लिए सपोर्ट करते हैं। वे बच्चे को नए परिवार के साथ जुड़ने और जीवन को नए सिरे से शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। संभव है कि इससे बच्चे की शंकाएं दूर होंगी और वो अपनी मां के निर्णय का समर्थन करेगा।

नए रिश्ते के लिए बच्चे को दें टाइम

नए रिश्ते के लिए बच्चे को दें टाइम
नए रिश्ते के लिए बच्चे को दें टाइम

बच्चे को अपने नए जीवन साथी को अपनाने के लिए जबरदस्ती नहीं करना चाहिए। पूरा धैर्य रखकर बच्चे को नए रिश्ते के साथ कंफर्टेबल होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। शादी से पहले जरूरी है कि महिला को अपने बच्चे को भावी जीवनसाथी और उसके परिवार से मिलवाना चाहिए। दोस्ती के माहौल में बच्चे को भावी भाई-बहन के साथ ट्यूनिंग बिठाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। अगर बच्चा उनके साथ थोड़ा बहुत घुलमिल जाता है, तो वो कंफर्टेबल महसूस करेगा। उसके मन के कोने में छुुपा डर भी कम होगा। आपस में बिताया क्वालिटी टाइम इनके मध्य हेल्दी बाॅन्डिंग बनाने में मदद करता है।

वेडिंग प्लानिंग में बच्चें को करें शामिल

महिलाओं को दूसरी शादी की तैयारी में बच्चे को जरूर शामिल करना चाहिए। जैसे- शादी का वेन्यू, डेकोरेशन, गेस्ट, खाने का मैन्यू। इससे उन्हें गतिविधियों में शामिल होने और नए परिवार का हिस्सा होने का यानी अपनी वेल्यू का अहसास होगा। वो नए परिवार में एडजस्ट होंगे।

(डाॅ रचना खन्ना, मेंटल वेलनेस एंड रिलेशनशिप एक्सपर्ट, आर्टेमिस अस्पताल, दिल्ली)