हमसफर अच्छा हो तो मीलों की दूरियां भी कम नजर आती हैं वर्ना छोटी सी यात्रा भी हमें कई बार अंतहीन सी लगने लगती है। जीवन में कई उतार चढ़ाव और कई ऐसे मोड़ आते हैं, जहां से मुड़ते वक्त हम खुद को अकेला पाते हैं। वो जीवनसाथी, जिसके साथ हमने सात फेरे लिए और एक पवित्र बंधन में बंधे, वो हमें अचानक से बेमानी नजर आते हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि संबध बनाना और निभाना आसान होता है। एक मजबूत रिश्ते को भी कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन अगर आपका साथी ही तनाव का निरंतर स्त्रोत हो, आपकी भावनाओं को चोट पहुंचाता हो तो आपको अपने रिश्ते को लेकर जरुर सोचना चाहिए। ऐसे हालात में कभी कभी रिश्ते से बाहर हो जाना सबसे अच्छा विकल्प होता है। आइए जानते हैं, क्या करें, जब रिश्ता न हो स्वीकार।

 

अपने साथी के बिना, भविष्य की कल्पना करें

कोई भी फैसला लेने से पहले एक बार अपने भविष्य को लेकर सारे सपनों और आशाओं को एकजुठ कर लें और फिर कल्पना करके देखें कि क्या आपका पार्टपर आपकी इस काल्पनिक दुनिया में आप के साथ है। क्यों की, जीवनसाथी के बिना अपने अच्छे भविष्य की कल्पना करना या फिर इस कल्पना में उस का कहीं भी नजर ना आना इसी ओर संकेत करता है, कि आप का रिश्ता बिखरने की कगार पर है।

 

अपने रिश्ते की परिस्थिति का आंकलन करना

जहां एक ओर पारदर्शिता किसी भी रिश्ते की बुनियाद होती है, तो वहीं दूसरी ओर एक छोटी से गलती किसी भी रिश्ते को बरबाद कर सकती है। दरअसल, गलतफहमी आप के उस भरोसे और सच्चाई को झकझोर कर रख देती है, जिस भरोसे को पाने के लिए आपने न जाने कितने जतन किए थे। क्यों की हर सूरत में झूठ से निपट पाना संभव है। यदि आप अक्सर फ्लर्ट करते हैं तो इसका अर्थ है कि आप को किसी से लगाव की तलाश है या फिर किसी व्यक्ति के साथ में होने के सपने देखते हैं, तो भी आप भावनात्मक रूप से अपने साथी को धोखा दे रहे हैं, और आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। इसे समझने की जरूरत है।

           

याद करें कि आप अपने पार्टनर से कितनी बार झगड़ते हैं

अपनी बातों को स्पष्ट करने और किसी समस्या का समाधान पाने के लिए झगड़ा करना भी एक तरीका है। हालाँकिए इस तरह से बात बात पर झगड़ना और अपना सारा समय परेशानी में व्यतीत करना इस बात का संकेत हैं, कि आप का रिश्ता अब टूटने की कगार पर है। किसी बहस का गुस्से की शक्ल लेना और फिर द्वेषपूर्ण तरीके से अनिष्ट की कामना करते हुए छोड़ना और इसे सुधारने की कामना ना रखना इसी ओर इशारा करते हैं कि आपको ये रिश्ता स्वीकार नहीं है।

 

अपने साथी के प्रति अपनी उत्सुकता को जाँचें

आप का साथी जब भी आप के आसपास मौजूद हुआ करता था, तो आप खुद को सिक्योर फील करते थे। लेकिन अचानक से ऐसा होना बंद हो जाना और पार्टनर के सामने होने पर भी उसे इग्नोर करना और उसकी बातों की परवाह न करना रिश्तों में दूरी का इशारा कर रहे हैं। अगर आपको अपने पार्टनर के साथ बोरियत का एहसास होता है, तो समझ जाएँ कि रिश्ता दोनों ओर से खराब हो रहा है।

 

आपसी लगाव के स्तर को पहचानें

एक दूसरे की बातों को स्नेह और ध्यान से सुनें, यही बात आपके रिश्ते को मज़बूत बनाती हैं। जब आप दोनों के बीच में बातों की कमी आ जाती है, तो यह इसी ओर इशारा करती है कि आप को अब बात करने लायक कोई भी बात नजर नहीं आ रही है यां आप दोनों की दिलचस्पी अब एकदूसरे में खत्म हो रही है। बातचीत में आई कमी आप के रिश्ते के लिए खतरे की घंटी साबित होगी। अगर यूं कहें कि सोसायटी हमारे रिश्तों की जननी है, तो शायद गलत नहीं होगा। मगर कहीं न कहीं इन्हीं लोगों के डर के कारण हम सालों तक उस रिश्ते को निभाते चले जाते हैं, जिसे हम दिल से स्वीकार नहीं कर पाते।

 

जल्दबाजी में कोई फैसला न लें 

जी हां, जीवन में हर जगह जल्दबाजी करना ठीक नहीं होता। माना कि आप हर काम को समय से पहले या सही समय पर निपटा लेते हैंए लेकिन रिश्तों को कामों के बराबर न तोलें। अगर आप चाहते हैं कि आप दोनों का रिश्ता लंबा चले और आप जीवन में हर कदम पर हमेशा साथ रहें। तो अपने जीवन साथी को चुनने में जल्दबाजी न करें। कई बार जल्दबाजी में हम उन बातों को नजरअंदाज कर जाते हैं, जो भविष्य में हमारे लिए बहुत बड़ी साबित होती हैं।

 

सोसायटी को करें दरकिनार

अगर पतिण्पत्नी किसी हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं तो वहां रहनेवाले दूसरे लोगों का असर भी उन पर पड़ता है। साथ ही सोसाइटी में अपना स्टेटस भी बनाए रखना जरूरी हो जाता है। इस वजह से भी कई बार पति पत्नी के बीच तकरार हो जाती है और बात तलाक तक आ जाती है।

मायकेवालों का हस्तक्षेप कम करें

शादी के काफी वक्त बाद तक अक्सर युवतियों का लगाव अपने मायकेवालों से खूब रहता है। घंटों फोन पर बिताना कभी मिलने चले जाना। ये सब बातें रिश्तों की बारीक डोर को कभी बार उलझा देती है। आलम, घर में वाद विवाद और हर वक्त ससुराल और मायके की तुलना, जिसके कारण नव विवाहित जोड़े के रिश्ते में प्यार की जगह कड़वाहट बढ़ने लगती है।अगर ससुराल पक्ष से इस बात को लेकर टोका जाए तो युवती को बुरा भी लग जाता है। कई बार सिर्फ इन्हीं कारणों से मामला तलाक तक पहुंच जाता है। महिलाओं को अपने मायके में बात जरूर करनी चाहिए लेकिन ध्यान रखें कि घर के दूसरे काम प्रभावित न हों। वहीं पति की जिम्मेदारी है कि इस मामले में पत्नी को ज्यादा न रोकें और प्यार से समझाए।

 

जानें कारण कहीं वो तो नहीं

पति पत्नी में तलाक का सबसे बड़ा कारण दोनों के बीच में वो का आना होता है। वो यानी पत्नी का झुकाव पति के अलावा किसी दूसरे पुरुष की ओर हो जाना या पति का झुकाव पत्नी के अलावा किसी दूसरी महिला की ओर हो जाना। रिश्ते में वो के आ जाने से दूरी बढ़ती जाती है और इसका भी अंत तलाक पर जाकर होता है। ध्यान दें कि दोनों लोग एक दूसरे से इस कदर जुड़े हों कि वो के आने की गुंजाइश ही न रहे। साथ ही एक दूसरे पर भरोसा भी जताएं और केयर भी करें। जिंदगी के छोटे छोटे पलों में खुशियां ढूंढें और ज्यादा से ज्यादा वक्त साथ गुजारें।

 

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