Ramayana Relationship Lesson: हिंदू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है। हम सभी जानते हैं कि भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में ये पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। रामायण हिंदू धर्म का पवित्र ग्रंथ है। रामायण में भगवान राम के कई रूपों और धर्मनिष्ठा को खूबसूरती से दर्शाया गया है। रामायण हमें जिंदगी के पाठ सिखाती है लेकिन क्या आप जानते हैं ये हमें रिश्तों और संबंधों को मजबूत करने के गुण भी सिखाती है। रामायण में बताया गया है कि कैसे भगवान राम ने अनुशासन और मर्यादा में रहकर अपने कर्तव्यों का पालन किया था। वैसे ही गुण हमें भी अपने जीवन में अपनाने चाहिए जो न केवल हमारी जिंदगी को आसान बनाएंगे बल्कि रिश्तों में मधुरता बनाए रखने में भी मदद कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं रामायण से हम ऐसी कौन सी बातें हैं जिन्हें अपनाकर रिश्तों की गरिमा को बनाए रख सकते हैं।
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आदर और सम्मान

रामायण में भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बताया गया है। वह अपने पिता के वचन को पूरा करने के लिए 14 साल का वनवास भोगने के लिए भी तैयार हो गए थे। भगवान राम के इस कार्य से उनके आदर और सम्मान के भाव के बारे में पता चलता है। वह अपने पिता का आदर करते थे इसलिए वह उनके वचन को ठुकरा न सके। किसी भी रिश्ते को निभाने में आदर और सम्मान का होना जरूरी है। यदि आप दूसरों का आदर करेंगे तभी रिश्तों में मजबूती आएगी।
दया और प्रेम
भगवान राम को दया और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। भगवान राम ने एक साथ कई रिश्तों को प्रेमपूर्वक निभाया है। वह एक अच्छे भाई, पुत्र, पति और राजा थे, जिन्होंने सभी के साथ एक समान व्यवहार करके रिश्तों को संजोए रखा। व्यक्ति यदि भगवान राम से दया और प्रेम का गुण सीख जाए तो उसके जीवन में कभी भी रिश्तों की कमी नहीं आएगी।
बिना स्वार्थ करें समर्थन
रामायण में हर किसी का चरित्र बेहद सरल और सुलझा हुआ था। रामायण से सिर्फ भगवान राम के गुण ही नहीं बल्कि उनके परम भक्त हनुमान की भी विभिन्न विशेषताएं अपना सकते हैं। जैसे हनुमान जी ने बिना किसी स्वार्थ के माता सीता को ढूंढने में भगवान राम की मदद की थी वैसे ही हमें भी दूसरों की मदद बिना स्वार्थ के करनी चाहिए। खासकर विषम परिस्थिति में काम आना ही सच्चा रिश्ता होता है।
माफ करना

रिश्तों में दरार तब आती है जब हम दूसरों की गलतियों को पकड़कर बैठ जाते हैं और उसे कभी माफ नहीं करते। रामायण में भगवान राम ने माता कैकई से हुई भूल को माफ कर आगे बढ़ने का निर्णय लिया। रामायण हमें दूसरों को माफ करने का गुण सिखाती है, फिर भले ही वह आपका दुश्मन ही क्यों न हो।
आपसी समझ
किसी भी रिश्ते को निभाने में आपसी समझ का होना आवश्यक है। भगवान राम और माता सीता के बीच आपसी समझ, ईमानदारी और प्यार था इसलिए वह रावण के चंगुल से सुरक्षित वापस आ सकीं। इससे माता सीता की इनर स्ट्रेंथ का पता चलता है कि वह कैसे विषम परिस्थितियों में अपने रिश्ते को मजबूती से निभा सकीं। यदि हम भगवान राम और माता सीता के इस गुण को अपना लें तो रिश्तों में कभी भी गांठ नहीं पड़ेगी।
