प्रेम और समझ एक-दूसरे के हैं पर्याय: Love and Understanding
Love and Understanding

Love and Understanding: अकसर लोग प्यार तो कर लेते हैं लेकिन उसे निभा नहीं पाते हैं, एक छोटी सी गलती पर वे एक-दूसरे से जुदा होने का फैसला ले लेते हैं। यदि आप भी कभी ऐसी ही किसी परिस्थिति में फंस जाते हैं तो केवल समझदारी से काम लें क्योंकि प्यार में आपसी समझदारी बहुत बड़ी भूमिका निभाती है।

याद रखिए कि जो व्यक्ति आपके लिए बना है और जो आपको प्यार करता है, वह आपके साथ रहने के सौ बहाने खोज लेगा। पर जिसे अलग होना होगा, उसके लिए चाहे जितनी भी कोशिश करें, साथ नहीं रहेगा।

‘मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं। यह तुम्हारी समझ में क्यों नहीं आता? तुम जैसा कहो, मैं वैसा करने को तैयार हूं और करता भी हूं। फिर भी तुम ब्रेकअप की बात कर रही हो। उग्र हो कर करण ने अपने मन की बात कह दी। इसके बाद खुद ही बोला, ‘ओह! हां, मैं तो भूल ही गया था कि अब मैं तुम्हें रिजिड विचारों वाला लगता हूं। अब तुम्हें मेरे बैकग्राउंड पर ऐतराज है। मेरी मेंटलिटी से दिक्कत है और तुम अपनी सो कोल्ड फ्रीडम का फांफां मारती हो।

तन्वी बिना कुछ बोले करण को देखती रही। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि करण क्या कह रहा है। वह उसे किस तरह समझाए? तन्वी अपने संबंध में गिवअप नहीं करना चाहती थी। पर करण दिनोंदिन टोक्सिक होता जा रहा था। वह खुद ही सभी चीजों को पकड़ने का प्रयत्न कर रहा था। अगर तन्वी शिकायत करती तो उसे स्पेस नहीं दे रहा था। अचानक करण ने उससे बोलना बंद कर दिया। पर जब भी बात होती तो स्पेस देने के लिए वह कितना सहन कर रहा है, इस बात का ताना जरूर मारता। दोनों एक साथ काम करते थे, इसलिए कम से कम 8 से 9 घंटे तो साथ रहते ही थे।

इस दौरान करण तन्वी के आसपास ही रहता था। वह अपनी बातों से हमेशा यह जताने की कोशिश करता रहता था कि तन्वी जैसा चाहती है, वह वैसा कम्प्रोमाइज करता है। बात सुनने में जितनी अटपटी लगती है, उतने ही दोनों के संबंध भी अटपटे हो गए थे। करण अब तन्वी पर शक भी करने लगा था। वह उसके हर सोशल मीडिया के एकाउंट चेक करता था। तन्वी किससे बात करती है, यह भी वह चेक करता था। और अगर भूलचूक से वह किसी लड़के से चैट कर लेती तो वह खुद ही तन्वी के एकाउंट से उसे ब्लाक कर देता था। यह सब बेचैन करने वाला था। तन्वी समझती थी कि करण यह सब उसे अपने पास रखने के लिए करता था। पर इस तरह कोई किसी चेन में बांध कर कब तक रख सकता है। प्रेम में ढ़ील देना भी जरूरी है। अगर आप एक-दूसरे को ढ़ील नहीं दे सकते तो हो सकता है कि दोनों ही एक-दूसरे से जल्दी अलग हो जाएं।

ढील जरूरी है

मनपसंद व्यक्ति के लिए पजेसिवनेस होती ही है, यह मानव स्वभाव है, पर पजेसिवनेस सामने वाले को टोक्सिक लगने लगे, इस हद तक नहीं होनी चाहिए। क्योंकि हम लोग ज्यादातर शंकालु स्वभाव को पजेसिवनेस का परदा ओढ़ा कर उसकी आड़ में शक करते हैं। सच बात तो यह है कि एक-दूसरे को एक-दूसरे के लिए प्यार होगा तभी दोनों एक-दूसरे को समझ रहे होंगें और एक-दूसरे से खुश रहेंगे। आपका पार्टनर आपको चाहे जितनी भी ढ़ील दे, वह उसका दुरुपयोग कभी नहीं करेगा। और अगर आप जरूरी स्पेस नहीं देती हैं तो समय के साथ संबंधों में घुटन होने लगेगी और इस घुटन से बाहर निकलने के लिए बहाने मारेगा। पार्टनर पर विश्वास करें। जितना विश्वास करेंगी, जितना स्पेस देंगी, संबंध उतने ही मजबूत होंगे।

समझ अपने आप आती है, समझाने से नहीं

Understanding
Understanding

संबंध जब कमजोर पड़ते हैं, तो आप समझाने की कोशिश करती हैं, आप अपने मन की बात कहने की कोशिश करती हैं, तब वह व्यक्ति समझ कर अपने अंदर बदलाव ले आए, यह अलग बात है। पर आप किसी को समझा नहीं सकती। अपने मन से स्वयं में बदलाव ले आएं, क्योंकि किसी को बुरा न लगे, इसके लिए समझोगी या इसके लिए बदलाव लाओगी तो वह चीज बोझ लगने लगेगी, क्योंकि दूसरे पर होने वाली चीज तुम पर दिखाई देने लगेगी। आप हमेशा अपने व्यवहार या वाणी से सामने वाले व्यक्ति को जताने की कोशिश करती हैं कि तुम्हारी इच्छा से मैं अपने अंदर बदलाव लाती हूं। अब यह सामने वाले की इच्छा से या दबाव से लादी गई समझ दोनों के लिए समय के साथ टोक्सिक बन जाती है। इसलिए बदलाव लाने के लिए किसी को मजबूर न करें।

संबंध को सांस लेने का मौका दें

पार्टनर को चाहे जितनी परेशानी बताएं और उसी से मन से व्यवहार करें, यह अलग बात है। पर जबरदस्ती किसी चीज पर रोक न लगाएं। संबंध में आने के बाद एक-दूसरे की अनेक चीजों पर रोकटोक करना, छोटो-छोटी बात पर झगड़ा करने, रिझाने जैसी बुरी बातों से दूर रहना चाहिए। किसी भी संबंध में सांस लेने का मौका दें। आप जितना पार्टनर को परेशान करेंगी, सांस उतनी ही संबंध की सांस फंसेगी, क्योंकि आप पार्टनर को जड़मूल से बदल नहीं सकती। अगर आप यह उम्मीद रखेंगी तो शुरुआत में आपका प्यार पाने के लिए खुद में झूठ-मूठ का बदलाव लाएगा, पर वह लंबे समय तक नहीं टिकेगा। एक समय आएगा, जब स्प्रिंग उछलेगी तो संबंध को ले डूबेगी। इसलिए पार्टनर जैसा है, उसे वैसा ही चाहो। अलबत्ता उसे आदत बदलने के लिए कह जरूर सकती हैं, पर प्यार से, जबरन नहीं।

किसी भी संबंध को बनाए रखने के लिए और मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों ओर समझ का होना जरूरी है। एक पक्ष की समझ या एक पक्ष के जाने या छोड़ देने की भावना हो तो समझ लेना चाहिए कि ऐसे संबंध की उम्र बहुत कम है। याद रखिए कि जो व्यक्ति आपके लिए बना है और जो आपको प्यार करता है, वह आपके साथ रहने के सौ बहाने खोज लेगा। पर जिसे अलग होना होगा, उसके लिए चाहे जितनी भी कोशिश करें, साथ नहीं रहेगा, इसके लिए किसी को साथ रहने के लिए फोर्स न करें। इसलिए समझ की उम्र कम करने का ही काम करता है।