जरूरत के समय पड़ोसी ही काम आते हैं। अक्सर कहा जाता है। लेकिन यही पड़ोसी कई बार दुश्मन भी लगने लगते हैं। लगता है मानो एक दूसरे को जीने ही नहीं देंगे। दिक्कतें इतनी ज्यादा बढ़ जाती हैं कि कई दफा एक दूसरे को देखने भर से भी गुस्सा आ जाता है। मगर व्यवहार में थोड़े बदलावों के साथ पड़ोसी के साथ रिश्ते सुधारे जा सकते हैं। फिर पड़ोसी परिवार का हिस्सा लगेगा और उसी में दोस्त भी दिखेगा। फिर बात-बात पर लड़ाइयां नहीं होंगी, एक दूसरे का साथ देने की कोशिश हमेशा रहेगी और जिंदगी आसान भी होगी। क्योंकि याद रखिए रिश्तेदारों से रिश्ते कैसे भी हों लेकिन हमेशा साथ रहने वाले पड़ोसी से रिश्ते अच्छे जरूर होने चाहिए। आपकी जरूरत के समय ये पड़ोसी ही काम आते हैं, कैसे होगा ये जान लीजिए-
दोस्ताना व्यवहार-
दोस्ताना व्यवहार वैसे तो किसी भी रिश्ते को अच्छा कर सकता है पर पड़ोसी के साथ ऐसे व्यवहार का अलग ही असर पड़ता है। रिश्ते बिलकुल परिवार जैसे होने लगते हैं। भले ही इसमें थोड़ा समय लगे लेकिन ये होगा जरूर। यहां आपको दोस्ती करने की इतनी भी कोशिश नहीं करनी है कि पड़ोसी को अपनी स्पेस में ही दिक्कत होने लगे लेकिन व्यवहार आप दोस्तों वाला ही रखें। कभी आते-जाते हंस दिए और खैर खबर ले लेने से भी रिश्ते सुधरते हैं। आगे जाकर ये रिश्ते काफी मजबूत भी हो सकते हैं। 
इज्जत दें-
ये तो आप जानती ही होंगी कि किसी को भी इज्जत प्यारी होती है। सम्मान देकर आप सभी का दिल जीत सकती हैं। पड़ोसी पर भी ठीक यही फॉर्मूला काम करता है। उसे बात-बात पर नीचा दिखाने से अच्छा है कि उनकी परेशानियां समझें और उनको जरूरतभर का सम्मान जरूर दें। ऐसे करने का एक तरीका ये है कि आप उनसे अपनी तुलना न करें। तुलना नहीं करेंगी तो आपको उनकी अच्छाइयां भी दिखेंगी और आप उनके बेहतर कामों के लिए सम्मान भी दे पाएंगी। 
खुद में बदलाव-
आप जब पड़ोसी को सम्मान देंगी तो वो भी आपको सम्मान देने के तरीके जरूर तलाशेंगे। लेकिन इस दौरान आपको खुद में कई बदलाव करने होंगे जैसे, बहुत तेज म्यूजिक न चलाएं, या कोई ऐसा काम न करें, जो उनको परेशानी दें। हां, जरूरी है तो फिर उनसे इसके बारे में आमने-सामने बैठकर बात कर लीजिए, देखिएगा वो खुशी-खुशी आपका साथ देंगे। बदले में आपको सम्मान भी खूब मिलेगा। 
मदद के लिए तैयार-
मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना भी पड़ोसियों के साथ रिश्ते अच्छा कर देता है। इसके लिए आपको बहुत छोटे-छोटे कामों को ध्यान रखना होगा जैसे कभी उनका कुरियर आपके घर आ जाए तो खुद जाकर उसे दे आएं। कभी बाजार जाते हुए उनकी जरूरत का सामान भी ले आएं। उनके बच्चे खेलने आएं तो खुशी-खुशी उन्हें ऐसा करने दें, ना कि उन्हें डांटने लगें कि अरे मेरी जगह पर ऐसा न करो। कुल मिलाकर उन्हें लगना चाहिए कि आप उनकी मदद के लिए हमेशा मौजूद हैं। 
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