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Daulat Aai Maut Lai Hindi Novel | Grehlakshmi
daulat aai maut lai by james hadley chase दौलत आई मौत लाई (The World is in My Pocket)

जौनी ने कुछ देर स्वीमिंग की – फिर स्काट की शाटगन लेकर जंगल में शिकार खेलने निकल गया – ताकि कोई पक्षी या खरगोश वगैरह शाम के भोज के लिए ला सके। इस तरह से उसका मनोरंजन भी हो गया और शाम को जब वह वापस लौटा तो उसके हाथों में चार कबूतर तथा चार जंगली बतखें थीं।

फ्रैडा किचन में स्टीक पका रही थी। तुम तो वाकई काम के आदमी हो। फ्रैडा खुशगवार लहजे में बोली – ‘आज दोपहर तुम एक काम करो। मैंने एड से चार टांड लगाने को कहे थे।

बहुत बार उसे याद करा चुकी हूं – मगर कोई असर नहीं हुआ। लकड़ी तैयार पड़ी है – बस उन्हें ठोंकना बाकी है।’

‘जरूर।’ जौनी ने सहमति जताई – ‘मैं लगा दूंगा।’

लंच करने के बाद वे दोनों एक ही बैड पर जा लेटे। तीन बजे के आसपास फ्रैडा डाक तथा अखबार लेने चली गई और जौनी टांड लगाने में व्यस्त हो गया।

महज इसी इत्तफाक के कारण चिलचिलाती धूप में बोट में बैठा हुआ टोनी उसको नहीं देख सका था। अलबत्ता मोटरबोट लेकर जाती हुई फ्रैडा को उसने जरूर देख लिया था।

फ्रैडा की मोटरबोट उससे सौ गज के फासले से गुजर गई। टोनी ने कनखियों से उसकी ओर देखा। वह भांप गया कि फ्रैडा भी उसकी ओर एक नजर भरती हुई मोटरबोट दौड़ा ले गई थी।

चिलचिलाती धूप पड़ रही थी और झील में सिवाय टोनी के उस वक्त अन्य कोई मछेरा नजर नहीं आ रहा था। गर्मी से परेशान टोनी ने एक बार फिर फोकस हाउस बोट की ओर केन्द्रित किया और वहां कुछ न देखकर लौटने का निश्चय किया। जैसे ही सूरज की किरणें कुछ मद्धिम पड़ जाएंगी और गर्मी कुछ कम हो जाएगी -वह फिर आकर हाउस बोट की निगरानी करेगा – यह सोचकर।

उसने मोटरबोट को स्टार्ट करने का प्रयास किया – मगर बेसुध इंजन स्टार्ट ही न हो सका। उसने कई बार कोशिश की किन्तु वह सफल न हो सका। मन ही मन कुढ़ता और इंजन को कोसता हुआ वह धूप में बैठा रहा। और यह उसकी बदकिस्मती थी कि उसे तैरना भी नहीं आता था कि तैरकर किनारे पर जा लगता – हसरत भरी नजर झील के ठंडे पानी पर डालकर वह आह भरकर रह गया।

पिस्तौल का लोहा भी काफी तेज धूप के कारण तपकर गर्म हो चुका था और अब वह कमीज के अंदर उसके बदन को झुलसा रहा था। अतः उसने पिस्तौल बाहर निकाल ली और उसे फिशिंग रॉड के पास रख दिया। टोनी की समझ में बिल्कुल नहीं आ रहा था कि वह इस बिन बुलाई मुसीबत से कैसे निपटे। अपनी असहाय अवस्था पर मन ही मन खीझते हुए उसने एक बार फिर इंजन को स्टार्ट करने का प्रयत्न किया परन्तु इंजन अजीब-सी आवाज करते हुए तुरंत बंद हो गया।

तभी फ्रैडा की मोटरबोट की फट-फट की आवाज ने उसका ध्यान

आकर्षित किया। उसने देखा -फ्रैडा लिटिल क्रीक से वापस लौट रही थी। उसने फ्रैडा की ओर अपना हाथ हिलाया और संकेत करके उसे अपने पास आने का इशारा किया। फ्रैडा अपनी मोटरबोट घुमाकर उसके नजदीक आ पहुंची।

‘क्या परेशानी है?’ फ्रैडा ने पूछा।

खोई-खोई सी आवाज उसके मुंह से निकली -‘इंजन स्टार्ट नहीं हो रहा है।’

‘तो इसमें परेशानी वाली क्या बात है – तेज गर्मी की वजह से तेल

ओवरफ्लो हो गया है – प्लग निकालकर साफ कर लो – इंजन स्टार्ट हो जाएगा।’

‘लेकिन मेरे पास तो औजार भी नहीं है।’ वह अपनी नजरें इधर-उधर घुमाते हुए बोला।

‘मैं ठीक किये देती हूं – तुम दोनों नावों को थामे रखो।’

फ्रैडा ने अपनी बोट से टूलकिट उठाया और टोनी की नाव में पहुंच गई – परन्तु पिस्तौल में ठोकर लग जाने के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और बोट डगमगा उठी। टोनी ने उसे संभालने का प्रयत्न करते हुए अपनी बांहों में भर लिया। पल-भर के इस स्पर्श ने उसकी रग-रग में बिजली-सी दौड़ा दी। उसने पिस्तौल को ठोकर लगाकर सीट के नीचे खिसका दिया।

टोनी की ओर पीठ किये वह झुककर टूल किट खोल रही थी।

‘तुम शायद यहां पहली बार ही आये हो?’ स्पैनर निकालते हुए उसने पूछा।

‘हां!’ मैं ब्रूूनो का दोस्त हूं – उसी के आग्रह पर यहां आया हूं।’ फ्रैडा पर ललचाई हुई दृष्टि डालते हुए उसने उत्तर दिया।

‘मुझे लगता है जैसे मैंने तुम्हें कहीं पहले भी देखा है।’ प्लग निकालकर वह बोली -‘अब जरा तेल देखना।’

प्लग निकालकर वह मुड़ी।

‘मुझे इंजन की बाबत कोई जानकारी नहीं है।’ हांफते हुए टोनी बोला -‘मैं तो यहां छुट्टियां बिताने आया था – किन्तु इंजन की इस खराबी ने सारा मजा किरकिरा कर दिया।’

‘साल्वेडर मेरा भी अच्छा दोस्त है।’ प्लग को कपड़े से रगड़ते हुए वह बोली – ‘नये-नये व्यक्तियों से मिलकर मुझे खुशी होती है।’

टोनी आश्चर्य से उसका मुंह देखने लगा। वह उसका मन्तव्य समझने की चेष्टा करने लगा।

‘इस जगह कोई मछली नहीं फंसेगी तुम्हारे कांटे में।’ प्लग को वापस लगाकर उसे कसते हुए वह बोली – ‘और इस समय तो हर्गिज भी नहीं – क्योंकि गर्मी बहुत तेज है। दो घंटे बाद मुमकिन है तुम कुछ पकड़ सको।’

टोनी ने उसकी नीली आंखों में झांकते हुए कहा – ‘ब्रूनो कह रहा था कि तुम्हारा भाई भी तुम्हारे साथ रह रहा है?’

‘वह तो आज सुबह ही चला गया। उसे मियामी में कुछ काम था। उसके जाने के बाद मैं घर में बिल्कुल अकेली रह गई हूं। मेरा पति भी शाम को देर से घर लौटता है। ओ.के.! बोट ठीक हो गई है तुम्हारी। मैं चलती हूं।’

फ्रैडा मुस्कराई और अपनी बोट में चली गई।

इससे पहले कि टोनी उसे कुछ उत्तर दे पाता – फ्रैडा बोट दौड़ा ले गई। टोनी असमंजस में पड़ा रह गया। वह समर्पण का साफ-साफ इशारा कर गई थी – किन्तु जौनी अथवा जो कोई भी अन्य उसके यहां ठहरा हुआ था – यदि न गया हो तब हो सकता है वह किसी जाल में ही फंस जाये, लेकिन वह उसे फंसाना क्यों चाहेगी? कामवासना से पीड़ित इस किस्म की औरतों को वह भली-भांति समझता था। मुमकिन है वह आदमी उसका सौतेला भाई न हो – साथ ही यह भी मुमकिन है कि वह वियान्डा भी न हो, इसलिए उसके जाते ही उसके मन में वासना की भूख भड़क उठी थी। मन ही मन उत्तेजना-सी महसूस करते हुए उसने बोट का इंजन स्टार्ट किया और लिटिल क्रीक की ओर लौट पड़ा।

जब वह साल्वेडर के पास पहुंचा तो उसने सबसे पहला प्रश्न यही पूछा –

‘वह आदमी दिखाई दिया?’

‘नहीं-लेकिन उस औरत से जरूर मुलाकात हो गई, जिसके यहां वह टिका हुआ है। बोट का इंजन खराब हो गया था – उसी औरत ने ठीक किया। वह कहती थी कि उसका सौतेला भाई आज सुबह ही मियामी चला गया और आज साढ़े पांच बजे उसने मुझे बुलाया है।’ अपने हाथ के पीछे के हिस्से से पसीना पोंछते हुए टोनी ने पूछा -‘तुम्हारा क्या ख्याल है?’

साल्वेडर ने सिर हिलाया – ‘अगर वह वहीं हुआ तो तुम संकट में पड़ सकते हो।’

‘परन्तु अगर वह वहां होता – तो उसकी उपस्थिति में उसे मुझे वहां बुलाने की क्या जरूरत थी। टोनी कुटिलता से हंसा – ‘मेरा दावा है कि वह कुत्ते की औलाद जो भी था – अब जा चुका है और वह औरत अपनी वासना की पूर्ति के लिए ही मुझे वहां आमंत्रित कर रही है – इसलिए मैं वहां जाऊंगा। सावधानी से हाउस बोट की तलाशी लेकर उसकी वासना की आग बुझाकर वापस लौट आऊंगा तथा बॉस को सूचित कर दूंगा कि वहां कोई नहीं है। यह ठीक रहेगा।’

साल्वेडर देर तक उसे घूरता रहा। फिर बोला – ‘यह तुम्हारा व्यक्तिगत मामला है। अगर जाना ही चाहते हो तो शौक से जाओ – मगर सावधान रहना। ऐसा न हो कि कहीं लेने के देने पड़ जाएं।

दौलत आई मौत लाई भाग-28 दिनांक 15 Mar.2022 समय 08:00 बजे रात प्रकाशित होगा

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