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Panchayat 2
Panchayat Season 2

Panchayat 2: जिन भी लोगों ने पंचायत वेबसीरीज को पसंद किया था। उनके लिए अच्छी खबर है। दो साल बाद पंचायत का दूसरा सीजन बीस मई को रिलीज होने जा रहा है।

नीना गुप्ता, रघुवीर यादव जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ पंचायत सेकेटरी बने जीतेंद्र कुमार की एक्टिंग पिछले सीजन में ऑडियंस ने खूब पसंद की थी। इस सीजन में जहां लोगों ने गांव की जिंदगी को एंजॉय किया वहीं लोगों को यह पता चला कि इस सीधी सी दिखने वाली जिंदगी में भी कुछ मजेदार लेकिन रोमांचक बाते होती हैं। इसका ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ है। जिसकी शुरुआत इस बार गांव फुलेरा में सीसीटीवी कैमरा लगाने के साथ होती है। गांव वाले परेशान है कि वह जानना चाह रहे हैं कि भाई अब क्या-क्या रेकॉर्ड होने वाला है। इस सीसीटीवी कैमरे को देखने के लिए गांव में भीड़ जमा है।

तेवर है अक्रामक

अमेजन प्राइम की इस सीरीज ‘पंचायत सीजन 2’ में लगता है कि इस बार प्रधान पति रघुवीर यादव के साथ पंचायत सेकेटरी अभिषेक कुछ समस्याओं को निपटाते दिखेंगे। तेवर इस बार अक्रामक हैं। सीसीटीवी के साथ गांव में शौचालय बनाने की समस्या, सडक़ और चप्पल जैसे मुद्दे भी सामने आ रहे हैं। यहां तक कि लिए सडक़ के लिए प्रधान पति रेल की पटरी पर लेटते भी नजर आ रहे हैं। अब देखना यह है कि पिछले सीजन की तरह बातें ज्यादा होती हैं या सही मायनों में कुछ काम भी हो पाता है।

कुछ दायरा बढ़ा है

हम लोगों अक्सर यह बात सुनते आए हैं कि गांव में जो महिला प्रधान होती है वह महज खाना-पूर्ति के लिए होती है। उसके पति ही पद की कमान संभाले होते हैं। इसी भाव से ओत-प्रोत हमने पंचायत वेबसीरीज में एक नया पद देखा जो गांव के लोगों ने सृजित किया था प्रधान पति। नीना गुप्ता ने इसमें महिला प्रधान का किरदार निभाया था। हां वह गांव की कोई दबी-कुचली या बेचारी टाइप की महिला नहीं थी। लेकिन पंचायत के कामों के प्रति उनकी पति की ही ज्यादा दखलअंदाजी नजर आती थी।

गांव को बचाते दिखेंगे बीडीओ सुधीर

पंचायत सीजन 2 में ग्राम पंचायत के बीडीओ सुधीर जायसवाल इस कहानी में प्रधान जी को डीएम के आने की सूचना पहले ही देकर गांव को बचाने की कोशिश करते दिखेंगे, इस किरदार को दिवाकर ध्यानी निभा रहे हैं। कहानी में बीडीओ सुधीर अपने गांव को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि दिवाकर ध्यानी ने थिएटर से एक्टिंग की शुरुआत की और बाद में सरकार, सरकार राज, गो, गेम, लम्हा, कुछ लव जैसा, नानक शाह फकीर, जॉन डे, वन्स अपॉन टाइम इन मुंबई पार्ट 2, वजह तुम हो, तोरबाज, गुंडे, खोरशीद (ईरानी) ), उयारे (मलयालम), वेख बारातन चलियां (पंजाबी) आदि कई लोकप्रिय फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाए। इसके अलावा कई वेब सीरीज में छोटी-छोटी भूमिकाएं में नजर आए हैं वहीं वेब सीरीज ‘अनदेखी’ में भी ध्यान देने योग्य भूमिका मिली। जिसमें इंस्पेक्टर सुनील डोगरा की भूमिका में लोगों ने उनके अभिनय कौशल को पहचाना और सराहा। कई वर्षों की मेहनत के बाद दिवाकर को बहुमुखी अभिनेता की पहचान मिल रही है। इसके साथ ही दिवाकर नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज घोल, ‘हैलो जी’, और ऑल्ट बालाजी के ‘रुद्र काल’ के लिए हॉटस्टार, अनदेखी के लिए ‘क्रैश’ और सोनी लिव पर ‘अनदेखी’ में अपनी एक्टिंग से सबको प्रभावित किया। वहीं दिवाकर आगे हॉटस्टार के लिए “कभी आर कभी पार” और एक्टर विद्युत जामवाल के साथ फिल्म “आईबी 71” में नजर आएंगे।

अब रोमांस की बात कर लें

फुलेरा गांव की शान वो बड़ी टंकी भी थी। जिन लोगों ने सीजन देखा है उन्हें याद ही होगा कि कैसे पंचायत सेकेटरी अभिषेक जब टंकी पर जाकर गांव को देखते हैं तो गांव के मनोहारी दृश्यों के साथ प्रधान जी की बेटी रिंकी के भी दर्शन हो जाते हैं। रिंकी अब सयानी हो चुकी है। प्रधान पति और प्रधान दोनों को ही अब उसके ब्याह की चिंता है। अब पहली नजर में देखने में तो यही लग रहा था कि यह पहली नजर का प्यार हो सकता है लेकिन दर्शक कुछ अनुमान लगा पाते उससे पहले ही सीजन का वहीं एंड हो जाता है। अब देखना यह है कि दूसरे मुद्दों की तरह ही इस रोमांस की कहानी में भी कुछ नया क्या चलता है। वैसे लगता तो है कि रोमांस परवान चढ़ेगा क्योंकि अभिषेक और रिंकी एक साथ बैठकर चाय पीते भी नजर आ रहे हैं। हो सकता है कि इस रोमांस की वजह से ही अभिषेक का मन गांव में लग जाए जो मजबूरी में ही सही लेकिन वहां रह रहा है।

Panchayat 2
Story of Panchayat

साफ-सुथरी कहानी

पंचायत का दूसरा सीजन पूरे दो साल बाद रिलीज हो रहा है। इसके बारे में बात करें तो यह वेबसीरीज सुथरी है। आप इसे अपने पूरे परिवार के साथ देख सकते हैं। हां भाषा के स्तर पर कुछ प्रयोग हैं। लेकिन गौर करने की बात है कि इनमें हास्य का पुट था फूहढ़ता का नहीं।

कुछ छूटा हुआ भी

सीरीज की खास बात यह थी कि बहुत से लोग इसे खुद से कनेक्ट कर पाए। सच बात तो यह है कि आज भी हिंदुस्तान का दिल तो उसके गांवों में ही बसता है। बहुत लोग जो गांव से पलायन कर शहर बस चुके हैं वह देख पाए कि गांव में रहने के भी अपने कुछ चैलेंज हैं। देखा जाए तो इस सीरीज के जरिए इंडियन यूथ ने सही मायनों में भारत और उसकी चुनौतियों को देखा था। वहीं कुछ लोग जो कभी गांव में नहीं रहे। उन्होंने भी गांव की सैर की। यहां भी एक गु्रपीज्म, एक राजनीति काम करती है। किसी काम को करने या किसी योजना के सही क्रियान्वन के लिए गांव वालों को अपने पक्ष में करना आसान नहीं है। पंचायत सेकेटरी को ही देख लें। वह मजबूरी में यहां आकर रहता है और राजनीति में भी फंस जाता है।

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