fifty shades darker novel in Hindi: “ग्रेटा! मि. ग्रे किससे बात कर रहे हैं?” मेरा दिल कह रहा है कि वहां से भाग निकलूं। भीतर बैठी सयानी लड़की भी चीख-चीख कर यही कह रही है पर मैंने उसे अनसुना कर वहीं रुकना तय किया।
“ओह! वे तो मिसेज लिंकन हैं। मि. ग्रे के साथ इस जगह की मालकिन हैं।” ग्रेटा को यह बता कर बड़ी ख़ुशी मिली।
“मिसेज लिंकन?” मैंने तो सोचा था कि औरत ने तलाक ले लिया था पर हो सकता है कि किसी बेचारे को फंसा कर दोबारा शादी कर ली हो।
“हां, वे अक्सर नहीं आतीं पर आज एक टेक्नीशियन की तबीयत ख़राब है तो उसकी जगह काम संभालने आई हैं।”
“क्या तुम इनका पहला नाम जानती हो?”
ग्रेटा ने भवें सिकोड़ कर मुझे देखा और अपने गुलाबी होंठ भींच लिए। ओह! लगता है कि मैंने ज्यादा ही पूछ लिया। “एलीना।” उसने बेमन से बताया। मेरी रीढ़ की हड्डी में अचानक ही सुकून की लहर दौड़ गई। मेरा अंदाजा गलत नहीं था।
वे अब भी गहरी बातचीत में मग्न हैं। क्रिस्टियन लगातार बोल रहा है और वह मुंह बना-बना कर हाथ नचाते हुए अपने भाव-भंगिमा प्रकट कर रही हैं। उसने अचानक क्रिस्टियन की बांह थामकर दिलासा सा दिया और अपना होंठ काट लिया। एक बार हामी भरी और मुझे देखकर मुस्कुराई।
मैं केवल उसके चेहरे को घूर सकती हूं। लगता है मुझे भारी धक्का लगा है। क्रिस्टियन ने मुझे यहां लाने की हिम्मत कैसे की?
वह उसे देखकर कुछ बुदबुदाई। वह मेरी ओर मुड़ा और फिर उससे कोई बात करने लगा। उसने सहमति में गर्दन हिलाई और शायद लगा कि उसे शुभकामनाएं दे रही है पर अभी इतनी दूर से किसी के हिलते होंठ देखकर उसकी बात समझने की कला में मैं इतनी माहिर नहीं हूं।
फिफ्टी शेड्स मेरे पास लौटा तो चेहरे पर उद्वेग दिखाई दिया। बिल्कुल ठीेक। मिसेज रॉबिन्सन दरवाजा बंद कर पिछले कमरे में चली गई।
क्रिस्टियन ने त्योरी चढ़ाई- “तुम ठीक हो?” उसने बड़े ही सतर्क और चौकन्ने स्वर में पूछा।
“नहीं। तुमने मुझे उससे मिलवाया नहीं?” मैंने ठंडे स्वर में पूछा।
उसका मुंह खुला का खुला रह गया मानो मैंने उसके पैरों तले से ज़मीन खिसका दी हो।
“पर मैंने सोचा…”
“…मैं जाना चाहूंगी। प्लीज़…”
“क्यों?”
“तुम जानते हो क्यों?” मैंने आंखें नचाईं।
उसने मुझे घूरा। उसकी आंखें गुस्से से जल रही हैं।
“सॉरी एना! मुझे पता नहीं था कि वह यहां आ जाएगी। वह यहां नहीं आती। उसने ब्रार्वन सेंटर में एक नई शाखा खोली है और अक्सर वहीं होती है। आज कोई बीमार था इसलिए…”
मैं सीधा दरवाजे की ओर चल दी।
“ग्रेटा! हमें फ्रेंकों की ज़रूरत नहीं है।” हम बाहर की ओर निकले तो क्रिस्टियन ने कहा। मुझे भागने की इच्छा को दबाना पड़ा। मैं तेज़ी से भाग जाना चाहती थी। रोने की बड़ी इच्छा हो रही थी। मैं इन सब बातों के जंजाल से कहीं परे चली जाना चाहती थी।
क्रिस्टियन एक भी शब्द कहे बिना मेरे पीछे आता रहा। मैं बांहों से खुद को घेरे हुए चलती रही। उसने मुझे हाथ भी नहीं लगाया। मेरे दिमाग में ऐसे कई सवाल चक्कर काट रहे हैं, जिनके जवाब मेरे पास नहीं हैं। क्या मि. ग्रे जवाब देना चाहेेंगे?
“तुम यहां अपनी सेक्स गुलामों को लाते थे?” मैंने पूछा।
“हां उनमें से कुछ को लाया था।” उसने हौले से कहा।
“लीला?”
“हां”
“ये जगह तो नई दिखती है।”
“कुछ समय पहले ही काम हुआ है।”
“अच्छा। तो मिसेज रॉबिन्सन तुम्हारी सारी गुलामों से मिलती थी?”
“हां”
“क्या वे उसके बारे में जानती थीं?”
“नहीं, बस तुम जानती हो।”
“पर मैं तो तुम्हारी बांदी नहीं हूं।”
“नहीं, बेशक तुम नहीं हो।”
मैं रुकी और उसकी तरफ मुंह करके खड़ी हो गई। उसकी आंखें डर से फैल गई हैं। उसके होंठ बुरी तरह से भिंचे हुए हैं।
“क्या तुम्हें ये सब करना अच्छा लगा?” मैंने सख्ती से पूछा।
“मुझे माफ़ कर दो।”
“मैं बाल कटवाना चाहूंगी, कोई ऐसी जगह जहां तुमने स्टाफ या मालिक के साथ शारीरिक संबंध न बनाए हो।”
वह सिकुड़ सा गया।
“अब मुझे माफ़ कर दो।”
“क्या तुम भाग रही हो? कहीं ये सच तो नहीं?”
“नहीं! मैं अपने बाल कटवाना चाहती हूं। कहीं जहां मैं आंखें बंद कर अपना सिर धुलवाऊं। बाल कटवाऊं और कुछ देर के लिए यह सारी बकवास भूल सकूं।”
उसने बालों में हाथ फिराए। “मैं फ्रेंकों को तुम्हारे या मेरे अपार्टमेंट में बुलवा सकता हूं।” वह झट से बोला।
“वह तो बड़ी आकर्षक है।”
“हां, सो तो है।” उसने पलकें झपकाईं
“क्या वह शादीशुदा है?”
“नहीं, पांच साल पहले तलाक हो गया।”
“तुम उसके साथ क्यों नहीं हो?”
“क्योंकि हमारे बीच सब ख़त्म हो गया है। मैं पहले भी बता चुका हूं।” उसकी भवें सिकुड़ गईं। उसने जेब से फ़ोन निकाला। शायद वाइब्रेशन पर होगा, तभी मैं सुन नहीं सकी।
“वेल्क….. हम दूसरे एवेन्यू पर खड़े हैं…”
लोग हमारे पास से निकल रहे हैं। वे अपने ही जीवन की उलझनों में खोए हैं। मैं सोच रही थी कि क्या किसी के जीवन में भी यह सब होता होगा, जो इस समय मेरे साथ हो रहा था।
“एक कार दुर्घटना में मारा गया, कब?” क्रिस्टियन की आवाज़ से मेरा ध्यान टूटा।
अरे नहीं, कौन? मैंने और कान लगाया।
“तभी वह कमीना आगे नहीं आया। क्या उसके मन उसके लिए कोई एहसास नहीं हैं?” क्रिस्टियन ने बड़े दुख से गर्दन हिलाई। अच्छा अब बात समझ आ रही है….।
क्रिस्टियन ने अपने आसपास नज़रें घुमाईं और मैं भी उसके साथ यहां-वहां देखने लगी। कुछ भी तो नहीं दिखा: आते-जाते लोग, पेड़ और गाड़ियां।
वह यहीं कहीं है…. वह लगातार हमें देख रही है….. हां… नहीं… चौबीस घंटे… मुझे तो समझ नहीं आ रहा… क्रिस्टियन ने मेरी ओर देखा।
“क्या…. अच्छा… कब? हाल ही में……कैसे? कोई ई-मेल, नाम-पता या फोटो….आपस में संपर्क रखो। टेलर से बात करो।” क्रिस्टियन ने फोन रख दिया।
“वेल्क था”
“वह कौन है?”
“मेरा सुरक्षा सलाहकार।”
“अच्छा! तो क्या हुआ?”
“लीला अपने पति को छोड़कर तीन महीने पहले एक लड़के के साथ भाग आई थी जो पिछले महीनेे किसी कार से कुचल कर मारा गया।”
“ओह”
“गधे अभी तक यही पता लगा सके हैं।” उसने दुख से कहा और मेरा हाथ पकड़कर बोला-चलो।”
“रुको! हम तो मिसेज रॉबिन्सन और तुम्हारे बारे में बात नहीं कर रहे थे?”
क्रिस्टियन का चेहरा कड़ा हो गया- “वह मेरी मिसेज रॉबिन्सन नहीं है। हम मेरे घर जा कर इस बारे में बात कर सकते हैं।”
“मैं वहां नहीं जाना चाहती। मुझे बाल कटवाने हैं।” मैं चिल्लाई। काश! मैं किसी एक बात पर अपना ध्यान लगा पाती….।
उसने जेब से फोन निकाल कर एक नंबर मिलाया। “ग्रेटा! क्रिस्टियन ग्रे बोल रहा हूं। मैं चाहूंगा कि फ्रेंकों एक घंटे में मेरे घर आ जाए। मिसेज लिंकन से पूछ लो… ठीक है। बढ़िया।” उसने फोन रख कर कहा-वह एक बजे तक आएगा।”
“क्रिस्टियन!”
“एनस्टेशिया! लीला किसी दिमागी बीमारी को झेल रही है। पता नहीं, हम दोनों में से कौन, किसके पीछे है और ये भी नहीं पता कि वह किस हद तक जा सकती है। हम तुम्हारे यहां चल कर सामान लेेंगे और उसका पता चलने तक तुम मेरे यहां रह सकती हो।”
“मैं ऐसा क्यों करूंगी?”
ताकि मैं तुम्हें सही-सलामत रख सकूं।”
“पर”
उसने मुझे घूरा- “तुम्हें मेरे अपार्टमेंट चलना होगा चाहे मुझे तुम्हें बालों से घसीट कर ही क्यों न ले जाना पड़े।”
मैंने उसे हैरानी से देखा… ये तो फिफ्टी शेड्स की भी हद है। वह आज टेक्नीकलर फिफ्टी शेड्स हो गया है।
“मुझे लगता है कि तुम ज्यादा ही प्रतिक्रिया दे रहे हो।”
“नहीं, मैं ऐसा नहीं कर रहा। हम मेरे यहां चल कर अपनी बातचीत जारी रख सकते हैं।”
मैं अपनी बाजुएं मोड़ कर खड़ी हो गई और उसे घूरने लगी। ये तो हद ही हो गई है।
“नहीं। मैंने अड़ियलपन से कहा। मुझे अपनी बात का मान रखना होगा।
“तुम चल सकती हो या तुम्हें उठा लूं। एनस्टेशिया! मुझे ऐसा करने में भी कोई परेशानी नहीं होगी।”
“तुम ऐसी हिम्मत मत करना।” मैंने उसे देखकर मुंह बनाया। बेशक वह इस सड़क पर तमाशा नहीं करना चाहेगा।
वह हौले से मुस्कुराया पर उसकी मुस्कान आंखों के छोरों तक नहीं पहुंची।
“ओह बेबी! तुम्हारे लिए कुछ भी…”
उसने एक ही झटके में मुझे अपने कंधे पर लाद लिया। इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती। मैं उसके कंधे पर झूल रही थी।
“मुझे नीचे उतारो।” मैं चिल्लाई। ओह, चिल्लाना कितना अच्छा लग रहा है।
वह मुझे अनसुना कर तेज़ी से आगे जाने लगा। उसने मेरी जांघों के आसपास बांहों का घेरा कस कर लगाया हुआ है। फिर उसने दूसरे हाथ से पिछले हिस्से पर ज़ोर से चपत लगाई।
“क्रिस्टियन!” मैं चिल्लाई। लोग घूर रहे हैं। क्या यह इससे ज्यादा अपमानजनक हो सकता है? मैं चलूंगी। उतारो नीचे।”
उसने मुझे नीचे उतारा और मैं पांव पटकते हुए अपने अपार्टमेंट की ओर चल दी। उसे पूरी तरह से अनदेखा कर दिया। बेशक वह एक मिनट में मान जाता पर मैंने उसे अनदेखा करने में ही भलाई समझी। मैं क्या करने जा रही हूं? मैं गुस्से में तो हूं पर ये समझ नहीं आ रहा कि आखिर गुस्सा किस बात का है?
मैंने घर जाते समय मन ही मन लिस्ट बनाई:
कंधों पर उठाना- छह साल की उम्र से बड़े व्यक्ति को कभी गंवारा नहीं होगा।
मुझे ऐसे सैलून में ले जाना, जहां उसकी पिछली प्रेमिका भागीदार थी-वह इतना बेवकूफ़ कैसे हो सकता है?
यह वही जगह थी जहां वह अपनी सेक्स गुलामों को ले जाता था। यहां भी वही बेवकूफ़ी।
उसे एहसास तक नहीं कि यह इतनी बड़ी गलती है- वैसे अपने को बड़ा सयाना बनता है।
मेरे बैंक खाते का नंबर पता लगाना।
पागल किस्म की गर्लफ्रेंड्स रखना पर इसमें उसकी क्या गलती? मैं गुस्से में हूं। हां, बहुत गुस्से में हूं।
मेरी कंपनी खरीदना- नवाबजादे के पास ज्यादा ही पैसा है।
अपने साथ रहने का इसरार करना- लगता है कि लीला की धमकी में असर है- वैसे उसने कल बताया नहीं था।
अचानक ही मुझे कुछ समझ आया। कुछ बदलाव सा महसूस हुआ। मैं रुकी तो क्रिस्टियन भी वहीं रुक गया।
“क्या हुआ?”
उसने भवें सिकोड़ी- “मतलब?”
“लीला के साथ?”
“मैंने बताया था।”
“नहीं, तुमने नहीं बताया। बात कुछ और है वरना कल तो तुम्हारे यहां जाने की जिद नहीं की थी। तो क्या हुआ?”
वह बेचैनी से हिला।
“क्रिस्टियन मुझे बताओ।” मैं झपटी।
“उसने कहीं से छिपाए गए हथियारों का परमिट ले लिया है।”
ओह! मैंने उसे देखा और चेहरे का लहू सूख गया। मैं बेहोश भी हो सकती हूं। मान लो कि वह उसे मारना चाहती हो तो? नहीं!
“मतलब वह एक गन ले सकती है।”
“एना। मुझे नहीं लगता कि वह ऐसी कोई गलती करेगी पर मैं तुम्हारे नाम पर कोइ ख़तरा मोल नहीं लेना चाहता।” उसने कंधों पर हाथ रखते हुए मुझे अपनेे पास खींच लिया।
“मैं भी नहीं ले सकती…मुझे तुम्हारी चिंता है।” मैंने हौले से कहा
मैंने उसे कस कर बांहों में बांधा और छाती में सिर छिपा लिया। शायद उसने बुरा नहीं माना।
“चलो वापस चलें।” वह आगे आया और मेरे बाल चूम लिए। मेरा गुस्सा जा चुका है पर भूला नहीं है। वह एक अजीब से डर के पीछे छिप गया है। कोई क्रिस्टियन को चोट पहुंचाए, यह बात ही मेरी सहनशक्ति के बाहर है।
मैंने बड़े ही सलीके से अपना मैक, फोन, आई-पैड और चार्ली टैंगो गुब्बारा पैक कर लिए।
“चार्ली टैंगो भी चल रहा है?” क्रिस्टियन ने पूछा
मैंने सिर हिलाया तो उसने प्यारी सी मुस्कान दी।
“मंगलवार को ईथन आ रहा है।” मैंने कहा
“ईथन?”
“केट का भाई। वह सिएटल में जगह मिलने तक यहीं रहने वाला है।”
क्रिस्टियन मुझे खाली नज़रों से ताकता रहा पर मैं उसकी आंखों में पसर आए ठंडेपन को भांप गई थी।
“ये तो अच्छा है कि तुम मेेरे साथ रहने जा रही हो। उसे ज्यादा जगह मिल जाएगी।” उसने हौले से कहा।
“पता नहीं कि उसे चाबियां कहां से मिलेंगीं। तब मुझे लौटना होगा।”
क्रिस्टियन ने कुछ नहीं कहा
“सब हो गया?”
उसने मेरा बैग पकड़ा और हम दरवाजे से बाहर आ गए। हम पार्किंग लॉट की तरफ चले तो ऐसा लगा कि मुझ पर नज़र रखी जा रही है। पता नहीं ये मेरा डर है या सचमुच ऐसा हो रहा है। क्रिस्टियन ने ऑडी का दरवाजा खोल कर मुझे सवालिया निगाहों से देखा।
“क्या तुम बैठ नहीं रहीं?”
मैंने सोचा कि मैं गाड़ी चला रही थी।” मैंने कहा।
“नहीं, मैं चलाऊंगा।”
“मेरे चलाने में क्या ख़राबी है? ये मत बताना कि तुम मेरे ड्राईविंग टेस्ट के नंबर भी जानते हो… वैसे अब मुझे तुम्हारी इन बातों से हैरानी भी नहीं होती।” हो सकता है कि उसे पता हो कि मैं लिखित परीक्षा में लुढ़क गई थी।
“एनेस्टेसिया! कार में बैठो।” वह गुस्से से बोला।
“अच्छा।” मैं झट से बैठ गई। सच! ये इंसान भी हद है।
शायद वह भी मेरी तरह अजीब सी बेचैनी महसूस कर रहा होगा। उसे भी लग रहा होगा कि उस लीला नाम की लड़की की आंखें कहीं न कहीं से हम पर नज़र रखे हैं…. ।
क्रिस्टियन ने गाड़ी चला दी।
“क्या तुम्हारी सारी सेक्स गुलाम काले या भूरे बालों वाली गोरियां रही हैं?”
उसने तेवर दिखाए- “हां।” बेशक वह सोच रहा होगा कि मैं क्या पता लगाना चाहती हूं।
“मैं यही सोच रही थी।”
“मैंने कहा न कि मैं उन्हें ही रखना पसंद करता था।”
“मिसेज रॉबिन्सन तो ऐसी नहीं हैं।”
“यही तो वजह है।”
“तुम मज़ाक कर रहे हो?”
“हां, मैं मज़ाक कर रहा हूं ।”
मैं खिड़की से बाहर झांकने लगी कि शायद कहीं लीला दिख जाए।
तो उसे केवल भूरे या काले बालों वाली युवतियां ही पसंद हैं। मैं यही सोच रही थी कि ऐसा क्यों? क्या उसकी पसंद का मिसेज रॉबिन्सन से कोई लेना-देना है? मैंने गर्दन झटकी।
“मुझे उसके बारे में बताओ।”
तुम क्या जानना चाहती हो। क्रिस्टियन की भवों में बल आ गए और उसके स्वर का चौंकन्नापन छिपा न रहा।
“मुझे अपने व्यावसायिक अनुबंध के बारे में बताओ।”
उसे यह जान कर अच्छा लगा कि मैं केवल काम की ही बात करना चाहती थी।
“मैंने केवल पैसा लगाया है। मैं ब्यूटी सैलून के काम में नहीं आना चाहता था पर उसने इसे काफी फैलाया और सफल बना दिया। मैंने तो बस निवेश किया था ताकि उसकी मदद हो सके।”
“क्यों?
“मैं उसका एहसानमंद था।
“ओह?
“जब मैं हावर्ड़ से बाहर आया तो उसने मुझे मेरा काम शुरू करने के लिए काफी पैसा दिया था।”
“ओह…. वह अमीर भी है!”
“तुमने पढ़ाई छोड़ी थी?”
“हां, मेरी पटरी नहीं बैठ रही थी। मैं वहां दो साल रहा। बदकिस्मती से मां-बाप भी कुछ समझना नहीं चाहते थे।”
मैंने त्यौरी चढ़ाई। मि. ग्रे और डॉ. ग्रेस के बारे में यह क्या सुन रही हूं। मैं तो सोच भी नहीं सकती।
“वैसे तुम ऐसे लगते तो नहीं हो। क्या ले रखा था?”
“मैं राजनीति और अर्थशास्त्र पढ़ता था।”
+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++ “हम्म… आंकड़े”
“तो वह पैसे वाली है।” मैंने हौले से कहा।
“एनेस्टेसिया! वह एक दौलतमंद पति की बीबी थी जो जिंदगी से अबी हुई थी। उसके आदमी ने टिम्बर के काम में बहुत कमाया। वह उसे काम नहीं करने देता था। पता है, उसे किस तरह बस में रखता था। कुछ मर्द होते ही ऐसे हैं।” उसने एक तिरछी मुस्कान के साथ कहा
“सच्ची? ऐसे मर्द तो बड़े ही पौराणिक किस्म के जीव होते हैं।” मुझे नहीं लगता कि इससे ज्यादा व्यंग्यबाण चलाया जा सकता था।
क्रिस्टियन की मुस्कान और भी फैल गई।
“उसने तुम्हें अपने पति का पैसा उधार दिया।”
उसने हामी भरी और होठों पर एक नटखट मुस्कान खेल गई।
“ओह! क्या बात है?”
“उसे उसका पैसा वापस मिल गया।” क्रिस्टियन ने एस्काला के भूमिगत गैराज में गाड़ी लगाते हुए कहा।
“ओह?”
“कैसे?”
क्रिस्टियन ने ऐसे गर्दन हिलाई मानो किसी कड़वी याद को दोहराने की कोशिश कर रहा हो। फिर उसने गाड़ी पार्किंग में लगा दी। “आओ फ्रेंकोज़ आने वाला होगा।”
लिफ्ट में उसने मुझसे पूछा- “अब भी नाराज़ हो।”
“हां, मैं नाराज़ हूं।”
“अच्छा।” उसने कहा और आगे चल दिया।
बरामदे में टेलर मिला। ओह, ये हमेशा यहीं रहता है क्या? इसे आने का पता कैसे चल जाता है? उसने मेरा बैग ले लिया।
“वेल्क से बात हो रही है?” क्रिस्टियन ने पूछा।
“जी सर?”
“और?”
“सब ठीक है?”
“बढ़िया! तुम्हारी बेटी कैसी है?”
“वह ठीक है। धन्यवाद सर!”
“अभी एक हेयरस्टाइलिस्ट आने वाला है। फ्रेंकों डि लूका”
“मिस स्टील!” टेलर ने गर्दन हिलाई।
“हाय टेलर! क्या तुम्हारी एक बेटी है?”
“जी मैम।”
“कितने साल की है?”
सात साल की है।”
क्रिस्टियन ने मुझे अधीरता से घूरा।
“वह अपनी मॉम के साथ रहती है।” टेलर ने बताया।
“ओह, अच्छा।”
टेलर मुस्कुराया। ये तो नई बात सुनने को मिली। टेलर एक बच्ची का बाप है। मैं क्रिस्टियन के पीछे-पीछे कमरे में पहुंची।
मैंने आसपास झांका। यहां से जाने के बाद जैसे सब भूल सा गया था।
“क्या तुम्हें भूख लगी है?”
मैंने इंकार में गर्दन हिलाई। क्रिस्टियन ने एक पल के लिए ताका और शायद बहस न करने का मन बना लिया।
“मुझे कुछ कॉल करनी हैं। तुम आराम से बैठो।”
“अच्छा।”
क्रिस्टियन अपनी स्टडी में चला गया और मैं इस बड़े से कमरे में अकेली खड़ी हूं। वह इस बड़ी-सी आर्ट गैलरी को घर कहता है। मैं समझ नहीं पा रही कि अब करूं क्या?
कपड़े! मैंने अपना बैग लिया और अपने कमरे में जा कर अलमारी खोली। ये तो कपड़ों से भरी थी। सारे कोरे कपड़े हैं और अभी तो कीमतों के लेबल भी नहीं उतरे। तीन लंबे ईवनिंग गाउन, तीन कॉकटेल ड्रिंक्स, और तीन रोज़मर्रा के पहनने के लिए। ये तो अच्छे ख़ासे महंगे रहे होंगे।
मैंने एक ड्रिंक्स की कीमत देखी तो दिमाग चकरा गया। 2,998 डॉलर। हाय! मैं तो गई काम से!
ये तो मैं नहीं हूं। मैंने अपना सिर हाथों में थामा और पिछले कुछ घंटों को मन ही मन तोलने लगी। ये सब कितना थका देने वाला रहा था। क्यों, क्यों मैं किसी ऐसे इंसान को चाहने लगी हूं जो बिल्कुल दीवाना है- सुंदर, सेक्सी, पैसे वाला…
मैंने जेब से ब्लैकबैरी निकाल कर मॉम को फोन लगाया।
“एना हनी! कितने दिन बाद बात हो रही है। कैसी हो डार्लिंग?”
“ओह, पता है…”
“क्या हुआ? क्रिस्टियन के साथ बात बनी या नहीं?”
“मॉम, बात अभी थोड़ी उलझी हुई है। मुझे लगता है कि उसका दिमाग घूमा हुआ है और शायद यहीं सबसे बड़ी दिक्कत आ रही है।”
“मुझे बताओ बेटा! कई बार मर्दों को जानना आसान नहीं होता। बॉब सोच रहा है कि क्या हमारा जार्जिया आना एक सही फ़ैसला था?”
“क्या?”
“हां, वह अब भी वेगास लौटने के बारे में सोच रहा है।”
ओह? दूसरे लोग भी परेशानियों में हैं। मैं ही एक नहीं हूं।
क्रिस्टियन दहलीज़ के पास दिखाई दिया। “तुम यहां हो। मुझे तो लगा कि भाग गईं।” उसके चेहरे पर सुकून दिखा।
मैंने इशारे से बताया कि फ़ोन पर हूं। “सॉरी मॉम! रखती हूं। बाद में बात करेंगे।” मैंने फोन रख कर फिफ्टी को देखा। वह अजीब से तरीके से माथे में बल डाले खड़ा है।
“तुम यहां आकर क्यों छिप गईं?” उसने पूछा।
“मैं तो नहीं छिप रही पर हैरान हो रही हूं।”
“हैरान किसलिए?”
“ये सब क्या है क्रिस्टियन!” मैंने अलमारी की ओर संकेत किया।
“क्या मैं अन्दर आ सकता हूं?”
“तुम्हारा ही घर है।”
“वह मेरे आगे पालथी लगा कर बैठ गया।
“ये तो बस कपड़े हैं। अगर पसंद न आए तो वापिस हो जाएंगे।”
“तुम्हें और काम नहीं है क्या?”
उसने अपनी चिबुक खुजाई और मेरी अंगुलियों में… हरकत होने लगी। ओह! मैं भी ऐसा करना चाहती हूं। उसे छूना चाहती हूं।
“क्रिस्टियन! तुम यह सब क्यों कर रहे हो?”
“तुम जानती हो कि क्यों कर रहा हूं।” उसकी आंखें फैलीं और वही अजीब-सी नज़र लौट आई।
“नहीं, मैं नहीं जानती।”
उसने बालों में हाथ फिराया- “सच! तुम बड़ी खपाअ किस्म की औरतों में से हो।”
“तुम एक भूरे बाल वाली सेक्स गुलाम रख सकते थे। जब भी तुम उससे उछलने को कहते और अगर उसे बोलने की इजाज़त होती तो वह बस यही पूछती-कितना ऊंचा सर? तो क्रिस्टियन मैं ही क्यों? मैं यही तो समझ नहीं पा रही।”
उसने मुझे एक पल के लिए घूरा और मैं अंदाज नहीं लगा पा रही कि वह क्या सोच रहा है।
“एनेस्टेसिया! तुमने मुझे दुनिया को एक अलग नज़रिए से देखना सिखाया है। तुम मुझे पैसे के लिए नहीं चाहतीं। तुमने मुझे… उम्मीद दी है।” उसने कोमल सुर में कहा
“उम्मीद…, कैसी उम्मीद?”
उसने कंधे झटके-“कुछ और पाने की उम्मीद। और तुम ठीक कहती हो। मैं औरतों से कभी भी, कहीं भी और कोई भी मनचाहा काम करवाने का आदी हो गया था। ये सब जल्द ही पुराना और बासी लगने लगता है। एना! तुममें कुछ बात है, जिसे मैं समझ नहीं पाता। मैं बस…. किसी भी कीमत पर तुम्हें खोना नहीं चाहता। उसने आगे आ मेरा हाथ थाम लिया- प्लीज़ मुझे छोड़कर मत जाना। मुझे पर भरोसा और धीरज रखना। प्लीज़!”
आज वह कितना बिखरा और टूटा हुआ लग रहा है…। मैं घुटनों के बल झुकी और होठों पर हौले से चुंबन जड़ दिया।
“अच्छा। भरोसा और धीरज। मैं इनके साथ जी सकती हूं।”
“अच्छा है क्योंकि फ्रेंकों आ गया है।
फ्रेंकों नाटे कद और गहरे रंग का एक समलैंगिक सा दिखने वाला युवक है। मुझे अच्छा लगा।
“कितने……सुंदर बाल………!” वह बनावटी इतालवी लहज़े में बोला। बेशक वह बाल्टीमोर या उसके आसपास का ही होगा पर उसके उत्साह की छूत मुझे भी लग गई। क्रिस्टियन पहले हमें बाथरूम में ले गया और बाहर चला गया। जब वह लौटा तो उसके हाथ में एक कुर्सी थी।
“अब तुम लोग यह काम संभाल लो।” वह बोला
फ्रेंकों मेरी ओर मुड़ा- “एनेस्टेसिया! देखें तुम्हारे बालों का क्या कर सकते हैं।”
क्रिस्टियन काउच पर बैठा बड़े-बड़े काग़ज़ उलट-पुलट रहा है कमरे में हल्का, मीठा और प्यारा सा गीत गूंज रहा है। वह मुझे देखकर मुस्कुराया।
“देखा! मैंने कहा था न कि उन्हें पसंद आएंगे।” फ्रेंकों बोला।
“एना! तुम बड़ी प्यारी दिख रही हो।” क्रिस्टियन ने तारीफ़ की।
“मेरा काम हो गया सर!” फ्रेंकों बोला।
क्रिस्टियन उठ कर हमारी ओर आ गया। “धन्यवाद फ्रेंकों!”
फ्रेंकों ने अचानक मुड़कर एक बड़ी-सी गलबांही दी और मेरे दोनों गाल चूम लिए। “एना डियर! कभी किसी और को अपने बाल मत काटने देना।”
मैं उसके इस अपनेपन पर हंस दी। क्रिस्टियन उसे बाहर तक छोड़कर पल भर में लौट आया।
“मुझे खुशी है कि तुमने इन्हें छोटा नहीं करवाया।” उसने कहा और एक लट अंगुलियों के बीच थाम ली।
“कितने मुलायम हैं। क्या तुम अब भी मुझसे नाराज़ हो?”
मैंने हामी दी और वह मुस्कुराने लगा।
“वैसे तुम मुझसे किस बात पर नाराज़ हो?”
“एक लंबी लिस्ट है।”
“एक लंबी लिस्ट?”
“क्या हम बिस्तर में बात कर सकते हैं?”
“नहीं।” मैंने किसी बच्चे की तरह मुंह चिढ़ाया।
“अच्छा लंच के समय? मुझे भूख लगी है और सिर्फ़ खाने की भूख नहीं है।” उसने मुझे टेढ़ी सी मुस्कान दी।
“मैं नहीं चाहती कि तुम अपनी सेक्सी अदाओं से मुझे अपने बस में करो।”
उसने एक और मुस्कान दी। “वैसे मिस स्टील! आपके दिमाग में क्या बात चल रही है? उसे कह ही डालो।”
“अच्छा”
“मुझे क्या बात खाए जा रही है? तुम मेरी गोपनीयता को बुरी तरह से भंग कर रहे हो। तुम मुझे वहीं ले गए जहां तुम्हारी पिछली रख़ैल काम करती है और तुम अपनी सारी सेक्स गुलामों को भी वैक्सिंग जैसे अल्लम-गल्लम कामों के लिए वहीं ले जाते थे और फिर तुमने सड़क पर मेरे साथ बेरुख़ी दिखाई। मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया जैसा अक्सर लोग छोटे बच्चों के साथ भी नहीं करते। तुमने मुझे ऐसे उठा लिया जैसे कोई छह साल की बच्ची हो। और सबसे बड़ी बात यह है कि तुमने मिसेज रॉबिन्सन को तुम्हें छूने की इजाज़त दे रखी है।” मेरा सुर अचानक ही तेज़ हो गया।
उसने एक भौं नचाई और उसकी सारी मस्ती हवा हो गई।
“वैसे लिस्ट तो लंबी है पर ये बता दूं कि मिसेज रॉबिन्सन ‘मेरी मिसेज रॉबिन्सन’ नहीं है।”
“वह तुम्हें छू सकती है।” मैंने बात दोहराई।
उसने होंठ भींचे वह “जानती है कि कहां छूना है।”
“मतलब?”
उसने अपने बालों में हाथ फिराते हुए पल भर के लिए आंखें मूंद लीं मानो किसी तरह की दैवीय मदद मांग रहा हो। फिर उसने थूक गटका।
“मेरे और तुम्हारे बीच कोई नियम नहीं है और मैंने आज तक नियमों के बिना किसी के साथ कोई रिश्ता नहीं रखा। मैं कभी जान नहीं पाता कि तुम मुझे किस हिस्से में छूने जा रही हो। इससे मुझे घबराहट होती है। तुम्हारी छुअन पूरी तरह से……। वह रुक कर शब्द तलाशने लगा। ………इसका मतलब होता है ज्यादा……और ज्यादा।”
ज्यादा? उसके जवाब ने पूरी तरह से मेरे पांव ज़मीन से उखाड़ दिए। यह नन्हा सा शब्द अपने भारी-भरकम अर्थ के साथ हमारे बीच झूल रहा है।
मेरे स्पर्श का मतलब है…ज्यादा। जब वह ऐसी बातें करता है तो मेरे लिए खुद पर काबू रखना मुश्किल हो जाता है। ग्रे की आंखें मुझे ही देख रही हैं।
मैंने हाथ आगे किया और वह दो कदम पीछे हट गया।
“कठोर सीमा।” वह हौले से बोला। उसके चेहरे पर मुझे दर्द की गहरी रेखाएं दिखीं।
मैं एक अजीब सी दिल को मसोस देने वाली मायूसी महसूस कर रही हूं। “अगर तुम्हें मुझे छूने की इजाज़त न दी जाती तो तुम कैसा महसूस करते?”
“बुरी तरह से बिखरा हुआ और वंचित।” वह झट से बोला
ओह मेरा फिफ्टी शेड्स! मैंने उसे दिलासे से भरी मुस्कान दी।
“प्लीज़! तुम्हें मुझे एक दिन बताना ही होगा कि दरअसल कठोर सीमा क्या है?”
“एक दिन।” वह हौले से बोला
वह इतनी जल्दी कैसे अपने भाव बदल लेता है। ये बात मेरी समझ के बाहर है।
“तो लिस्ट में क्या रहा……तुम्हारी गोपनीयता को भंग करना…क्योंकि मैं तुम्हारे बैंक का खाता नंबर जानता हूं।”
“हां। ये बड़ी बेहिसाब सी बात है।”
“मैं अपनी सारी सेक्स गुलामों के साथ ऐसा ही करता आया हूं।” मैं तुम्हें दिखाता हूं। वह अपनी स्टडी में चला गया।
मैं उसके पीछे चल दी। उसने ताले वाली अलमारी से एक बड़ा लिफाफा निकाला। उस पर लिखा था- एनेस्टेसिया रोज़ स्टील।
हाय भगवान!!!! मैंने उसे हैरानी से घूरा।
उसने कंधे झटके। “तुम इसे वापिस ले सकती हो।”
“अच्छा जी मेहरबानी!” मैंने झट से उसे थाम लिया और अन्दर झांका। उसने मेरे जन्म के प्रमाणपत्र, कठोर सीमाओं, हस्ताक्षर किए गए एनडीए, अनुबंध, मेरा सोशल सिक्योरिटी नंबर, बायोडाटा, रोज़गार रिकॉर्ड वगैरह सबकी प्रतिलिपि रखी हुई है।
“तो तुम जानते थे कि मैं क्लेटन में काम करती थी?”
“हां।”
“तो तुम वहां संयोग से नहीं आए थे?”
“नहीं।”
“समझ नहीं आ रहा कि ये जान कर ख़शी दिखाऊं या गुस्सा?”
“ये तो बड़ी हद हो रही है। जानते हो तुम?”
“मैं इसे इस नज़र से नहीं देखता। मैं जो करता हूं, उसके लिए बड़ा-सोच-समझकर चलना होता है।”
“पर ये तो सारी गोपनीय जानकारी है।”
“मैं कभी ऐसी जानकारी का दुरुपयोग नहीं करता। एनेस्टेसिया! नियंत्रण रखने के लिए मुझे इस जानकारी की आवश्यकता होती है। मैं हमेशा ऐसे ही काम करता आया हूं।” उसने मुझे देखा और उसकी नज़रों में लिखी इबारत मुझे समझ नहीं आई।
“तुम जानकारी का दुरुपयोग करते हो। तुमने मेरे बैंक में चौबीस हज़ार डॉलर डाले, जो मैं नहीं लेना चाहती थी।”
उसके चेहरे पर गंभीर रेखाएं खिंच गईं। “मैंने कहा न कि टेलर को कार के यही दाम मिले हैं। बेशक यकीन नहीं आता पर यही सच है।”
“पर ऑडी…”
“एनेस्टेसिया! तुम्हें कोई अंदाज़ा भी है कि मैं कितना पैसा कमाता हूं?”
मैं खिसिया गई। “मुझे क्यों पता होना चाहिए? क्रिस्टियन! मुझे तुम्हारे खातों में जमा पैसे के बारे में जानने का कोई शौक नहीं है।”
उसकी आंखें मुलायम हो आईं। “मैं जानता हूं और यह तुम्हारी उन खूबियों में से एक है, जिन पर मैं मरता हूं।”
मैंने उसे हैरानी से देखा। मरता हूं…..
“एनस्टेशिया! मैं तकरीबन एक घंटे में एक लाख डॉलर कमाता हूं।”
मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। इसके पास इतना पैसा है?
“चौबीस हज़ार डॉलर तो कुछ भी नहीं हैं। कार, टैस की किताबें, कपड़े…ये तो कुछ भी नहीं हैं।” उसने मुलायम स्वर में कहा।
मैंने उसे घूरा। सच्ची इसका तो अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। बड़ा असाधारण किस्म का जीव है।
“अगर मेरी जगह तुम होते और तुम्हें कोई इस तरह सामान से लाद देता……तो तुम कैसा महसूस करते?” मैंने पूछा
उसने मुझे खाली नज़रों से घूरा। उसकी यही तो दिक्कत है। एक पल में तोला और एक पल में माशा! हमारे बीच ख़ामोशी पसर गई
अंत में उसने कंधे झटके और बोला- “पता नहीं, कह नहीं सकता।”
मेरा दिल डूब सा गया। यही तो फिफ्टी शेड्स की दिक्कत है, वह अपने-आप को मेरी जगह रख कर देख ही नहीं सकता। खैर, अब तो मैं समझ ही गई हूं
“मुझे ये अच्छा नहीं लगता। मतलब तुम्हारी ये दरियादिली मेरे लिए शर्मिंदगी का कारण बनती है। मैंने तुम्हें पहले भी बताया है।”
उसने आह भरी। “एनेस्टेसिया मैं सारी दुनिया तुम्हारे कदमों में डाल देना चाहता हूं।”
“क्रिस्टियन! मैं बस तुम्हें चाहती हूं। मेरा इन चीज़ों से कोई वास्ता नहीं है।”
“ये सब उस अनुबंध का एक हिस्सा हैं। मैं जो भी हूं, यह सब उसका एक हिस्सा है।”
“ओह! ये बात तो कहीं नहीं जा रही।”
“क्या हम कुछ खा लें?”
उसने आंखें सिकोड़ी- “पक्का!”
“मैं पकाऊंगी। फ्रिज में कुछ है या नहीं?”
“मिसेज जोंस तो सप्ताहांत में यहां नहीं होतीं तो तुम क्या खाकर काम चलाते थे?”
“एनेस्टेसिया! मेरी सेक्स गुलाम खाना पकाती थीं।”
ओह बेशक! मैं इतनी पागल कैसे हो सकती हूं। इतनी सी बात नहीं समझी। “सर! आप क्या खाना चाहेंगे?”
“मैम को पकाने के लिए जो भी मिल जाए।” उसने कहा
मैंने फ्रिज के सामान पर नज़र मारने के बाद स्पेनिश ऑमलेट बनाने की सोची। यहां तो ठंडे आलू भी हैं। बन गई बात! ये झटपट बन भी जाएगा। क्रिस्टियन अपनी स्टडी में है। बेशक किसी बेचारे गरीब की गोपनीयता भंग करने के लिए दस्तावेज़ बटोर रहा होगा यह सोचते ही मुंह में कड़वाहट-सी घुल गई। मेरा दिमाग चकरा रहा है। ये तो जैसे कोई सीमाएं जानता ही नहीं।
मुझे खाना पकाने के लिए थोड़ा संगीत चाहिए। तभी मैं खाना पका सकती हूं और मुझे एहसास होगा कि मैं उसकी सेक्स गुलामों में से नहीं। मैंने आईपॉड डॉक से क्रिस्टियन का आई-पॉड उठा लिया। मैं शर्त लगा सकती हूं कि इसमें लीला की पसंद के गाने ज्यादा होंगे। मैं इस सोच से ही घबरा गई।
वह कहां है? मैंने सोचा। वह चाहती क्या है?
मैंने कंधे झटके। क्या विरासत है? मैं तो कुछ समझ नहीं पा रही।
मैंने लिस्ट पर नज़र मारी…ये तो क्रिस्टियन की पसंद नहीं लगती। हम्म……अच्छा ‘क्रेजी इन लव’ ठीक रहेगा। वाह! सही चीज़ मिल गई। मैंने रिपीट बटन दबाया और उसे ज़ोर से लगा दिया।
फिर मैं रसोई में लपकी। एक डोंगे में अंडे तोड़े और उन्हें नाचते-नाचते फेंटती रही।
एक बार फिर फ्रिज का चक्कर लगाया और वहां से आलू, हैम और मटर निकाल लिए। ये सब काम आ जाएंगे। मैंने पैन को गैस पर रख कर थोड़ा ऑलिव ऑयल डाला और गानों की जादुई दुनिया में खो सी गई।
काश केट घर में होती, वह भी यह सब जान जाती। वह कितने समय से बारबाडोज़ में है। उसे इलियट के साथ बढ़ाई गई छुट्टियां मनाने के बाद भी इस सप्ताह के अंत तक लौट आना चाहिए। मैं सोच रही थी क्या अब भी वे केवल वासना के रिश्ते में बांधे थे या यह सच्चा प्यार था?
“मुझे तुम्हारी बहुत सी खूबियों में से ये बात बहुत पसंद है।”
मैंने अंडे फेंटते हुए हाथ रोक दिया। ये बात उसने कही? तो इसका मतलब और बातें भी हैं। मैंने मिसेज रॉबिन्सन को देखने के बाद से पहली बार हल्की और सहज मुस्कान दी। क्रिस्टियन ने अचानक गले में बांह डाल दी और मैं उछल पड़ी।
“बड़ा अच्छा गाना चुना है। तुम्हारे बालों से कितनी प्यारी महक आ रही है।”उसने मेरे बालों में नाक घुसाते हुए उन्हें सूंघा और गहरी सांस ली। मैंने उसे देखा और तन में कोई चाह सुलग उठी। नहीं, मैंने खुद को उससे अलग कर लिया।
“मैं अब भी तुमसे नाराज़ हूं।”
“कब तक रहोगी?”
“जब तक कुछ खा नहीं लेती”
उसके होठों पर हंसी खेल गई।। उसने रिमोट उठाया और गाना बंद कर दिया।
“क्या इसे तुमने आई पॉड में डाला?” उसने इंकार किया तो मैं जान गई कि जवाब क्या था।
“क्या तुम्हें नहीं लगता कि वह इनके ज़रिए तुमसे कुछ कहना चाहती थी?”
“हां, हो सकता है।”
भीतर बैठी लड़की ने बाजुएं मोड़ीं और मुंह बनाकर बैठ गई।
“ये अब भी इसमें क्यों है?”
“ मुझे गाना पसंद है पर तुम्हें पसंद नहीं तो हम हटा देंगे।”
“नहीं, ठीक है। मुझे खाना बनाते हुए संगीत सुनना पसंद है।”
“तुम क्या सुनना चाहोगी?”
“मुझे सरप्राइज़ दो।”
वह आई पॉड की ओर मुड़ा और मैं अपना काम करने लगी।
कछ ही देर बाद कमरे में नीना सिमोन की मीठी और आत्मा को भी छू लेने वाली आवाज़ गूंज उठी। ये तो रे का मनपसंद गीत है। “मैंने तुम पर जादू डाला।”
मैंने घबरा कर क्रिस्टियन को देखा। वह कहना क्या चाहता है। उसने तो जाने कब से अपने जादू से मुझे बस में कर रखा है। ओह……उसके चेहरे के भाव बदल रहे हैं……आंखों में वही जाना-पहचाना भाव उतर आया है।
मैं उसे देख रही हूं मानो कोई शिकारी धीरे-धीरे अपने शिकार की ओर रेंगता आ रहा हो वह नंगे पांव है और खुले बटन की सफेद कमीज़ के साथ जींस पहनी हुई है।
जैसे ही वह मेरे पास आया। उसकी मंशा और साफ हो गई।
नीना के शब्द चारों ओर गूंज रहे हैं।
“क्रिस्टियन प्लीज़!”
“क्या प्लीज़?”
“ऐसा मत करो।”
“क्या न करूं?”
“यह मत करो।”
वह सामने खड़ा मुझे घूर रहा है।
“क्या पक्का कह रही हो।” उसने हौले से मेरे हाथ का डोंगा मेज पर रख दिया। मेरा कलेजा उछलकर मुंह को आ गया। मैं यह नहीं चाहती। मैं यह सब दिल से चाहती हूं। वह कितना हॉट और मदमस्त कर देने वाला लग रहा है। मैंने खुद को उसकी सम्मोहक नज़रों से परे करना चाहा।
ये उपन्यास ‘फिफ्टी शेड्स डार्कर’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – fifty shades darker (फिफ्टी शेड्स डार्कर)
“एनेस्टेसिया! मैं तुम्हें चाहता हूं। मैं प्यार और नफ़रत करता हूं और मुझे तुमसे बहस करना पसंद है। यह मेरे लिए नई बात है। मैं जानना चाहता हूं कि हमारे बीच सब ठीक है या नहीं? मेरे पास जानने का इसके सिवा कोई उपाय ही नहीं है।”
“मेरे मन में तुम्हारे लिए वही भावनाए हैं।” मैंने हौले से कहा।
उसका साथ मुझ पर हावी हो रहा है। वही जाना-पहचाना सा खिंचाव……मेरा पूरा शरीर उसकी ओर खिंचता जा रहा है। भीतर बैठी लड़की के बारे में तो पूछो ही मत..। मैंने उसकी शर्ट से झांकते छाती के बालों को देखकर गहरी चाह के साथ होंठ काटा- मैं इस जगह से उसका स्वाद लेना चाहती हूं।
वह मेरे बहुत पास है पर मुझे छू नहीं रहा। उसके शरीर का ताप मुझे छू रहा है।
“जब तक तुम हां नहीं कहोगी, मैं तुम्हें नहीं छूने वाला। उसने कोमलता से कहा। पर अभी इस मनहूस सुबह के बाद मैं तुम्हारे भीतर उतरकर, हम दोनों के सिवा बाकी सब कुछ भुला देना चाहता हूं।”
ओह! हम दोनों!!!
कितना जादुई शब्द है। मैंने मुंह उठाकर उस सुंदर पर गंभीर चेहरे को देखा।
“मैं तुम्हारे चेहरे को छूने जा रही हूं।” मैंने कहा और पाया कि उसके चेहरे पर हामी देने से पहले हैरानी के भाव तिर आए थे।
मैंने अपने हाथ से उसका गाल सहलाया और दाढ़ी पर अंगुलियां फिराने लगी। उसने आंखें बंद कर गहरी सांस ली और मेरे हाथ की ओर अपना चेहरा झुका दिया।
वह आगे आया और हमारे होंठ आपस में जुड़ गए। वह मुझे पर झुकता चला गया।
“एनेस्टेसिया! हां या न?”
वह धीरे-धीरे चूमते हुए मुझे अपनी ओर खींच रहा है। उसका हाथ मेरे शरीर के पिछले हिस्से, बालों व पीठ पर घूम रहा है। मुझे पूरी तेजी से अपनी ओर खींच रहा है। मैंने हौले से आह भरी।
“मि. ग्रे!” टेलर खांसा और क्रिस्टियन ने मुझे झट से अलग कर दिया।
“टेलर!” उसने ठंडे स्वर में कहा।
मैंने घूमकर देखा तो टेलर को बड़ी बेचैनी के साथ कमरे की दहलीज़ पर खड़ा पाया। क्रिस्टियन और टेलर ने एक-दूसरे को घूरा और उनकी आंखों ही आंखों में कुछ बातें हुईं।
“मेरी स्टडी में आओ।” क्रिस्टियन ने कहा और टेलर उस ओर चल दिया।
“फिर मिलते हैं।” क्रिस्टियन ने बाहर जाते हुए मुझसे कहा।
मैंने एक गहरी व स्थिर सांस ली। क्या मैं उसे एक मिनट के लिए भी उसके आकर्षण से नहीं बच सकती? टेलर का शुक्र है कि उसने आकर बाधा दे दी। हालांकि शर्मिंदगी भी हुई।
मैं सोच रही थी कि टेलर ऐसी क्या बात करने आया है। उसने ऐसा क्या देख लिया? मैं इस बारे में बात तक नहीं करना चाहती। लंच। मैं लंच तैयार करूंगी।
मैंने खुद को आलू काटने में मग्न कर लिया। टेलर क्यों आया है? लीला के बारे में बात करने?
दस मिनट बाद वे बाहर आए तो ऑमलेट तैयार था। क्रिस्टियन ने मुझे ताका तो थोड़ा परेशान दिखा।
“मैं उन्हें दस मिनट बाद समझाता हूं।” उसने कहा।
“हम तैयार रहेंगे।” टेलर बोला।
मैंने दो गर्म प्लेटें निकालीं और मेज पर रख दीं।
“लंच?”
“प्लीज़।” क्रिस्टियन ने कहा और मुझे बड़ी सतर्क निगाहों से देखने लगा।
“कोई मुश्किल?”
“नहीं।”
मैंने मुंह बनाया। वह मुझसे बात छिपा रहा है। मैंने लंच को प्लेटों में डाला और उसके पास बैठ गई। तय किया कि मुझे बात न ही पता चले तो ठीक है।
“ये अच्छा बना है।” क्रिस्टियन ने एक कौर खाते ही कहा। क्या तुम एक गिलास वाइन लेना चाहोगी?”
“नहीं धन्यवाद। ग्रे!” मुझे तुम्हारे आसपास अपने दिमाग को ज़रा ठिकाने रखना होता है।
स्वाद तो अच्छा है। मुझे भूख नहीं है पर जानती हूं कि अगर न खाया तो क्रिस्टियन टोकेगा इसलिए मैं भी खाने लगी। क्रिस्टियन धीरे-धीरे अपनी ख़ामोशी के बीच से बाहर आया और वही गाना लगा दिया जो मैं पहले सुन रही थी।
“ये क्या है?” मैंने पूछा।
“इसे बेलेरो कहते हैं।”
“यह कौन-सी भाषा में है?”
“यह पुरानी फ्रेंच-ऑकीटन में गाया गया है।”
“तुम फ्रेंच बोल लेते हो। तुम्हें समझ भी आती है?” मुझे याद आ गया कि उसने अपने घर में कैसे धाराप्रवाह फ्रेंच बोली थी..
“कुछ शब्द, हां! मेरी मॉम का एक मंत्र था- संगीत वाद्य, विदेशी भाषा और मार्शलआर्ट्स। इलियट स्पेनिश जानता है; ईया और मैं फ्रेंच बोलते हैं। इलियट गिटार बजाता है, ईया, सैलो और मैं पिआनो बजाता हूं।”
“वाऊ और मार्शल आर्ट्स?”
“इलियट जूडो का अभ्यास करता है। ईया ने बारह साल की उम्र में यह सब करने से इंकार कर दिया था।” वह इस याद पर मुस्कुरा दिया।
काश मेरी मॉम भी इतनी ही व्यवस्थित होती।
“मिसेज ग्रे बच्चों की उपलब्धियों के मामले में कभी समझौता नहीं करती थीं।
“उन्हें तुम पर गर्व रहा होगा। मुझे भी होता।”
अचानक ही क्रिस्टियन के चेहरे पर काले साए से लहरा गए और वह एक पल के लिए बेचैन-सा दिखा। उसने मुझे ऐसे घूरा मानो मैंने किसी वर्जित स्थान पर कदम रख दिया हो।
“क्या तुमने तय कर लिया कि कल शाम को क्या पहनने जा रही हो या मैं कुछ मदद कर दूं?” अचानक ही उसका सुर बदल गया है।
ओह! इसे तो गुस्सा आ गया। पर क्यों? मैंने ऐसा क्या कह दिया?
“उम्म……नहीं, अभी नहीं। क्या ये कपड़े तुमने चुने हैं?”
“नहीं एनेस्टेसिया! मैंने नहीं चुने। मैंने नीमन मार्कस के पर्सनल शॉपर को तुम्हारा माप भेज दिया था। ये कपड़े फिट होंगे। वैसे तुम्हेंं भी पता होना चाहिए कि मैंने आज शाम और अगले कुछ दिन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा का प्रबंध किया है।”
“लीला का कुछ पता नहीं, कब और कहां सिएटल की सड़कों पर मिल जाए। मैं चाहूंगा कि तुम इन दिनों अकेले कहीं मत जाओ। ठीक है?”
मैंने पलकें झपकाईं अच्छा। अब वह ग्रे कहां गया, जो फ़िदा होने को तैयार बैठा था?
“अच्छा। मैं ज़रा उनसे मिलकर आता हूं। ज्यादा देर नहीं लगेगी।”
“वे यहां हैं?”
“हां।”
कहां?
क्रिस्टियन ने अपनी प्लेट सिंक में रखी और कमरे से ओझल हो गया। ये सब क्या था। इसे देखकर तो लगता है कि एक ही शरीर में जाने कितने इंसान रहते हैं। कहीं ये सीज़ोफर्निया का शिकार तो नहीं? मुझे गूगल पर देखना चाहिए।
मैंने नाश्ता निबटाकर प्लेट साफ की और अपना बैग व मैक लेकर कमरे में चली गई। अलमारी में तीन ईवनिंग गाउन टंगे हैं। अब इनमें से कौन-सा चुनूं?
मैंने पलंग पर लेटे-लेटे अपने मैक, आई-पैड और ब्लैकबैरी को निहारा। मैं तो इन तकनीकों से घिरी हुई हूं। मैंने क्रिस्टियन की प्ले-लिस्ट को आई पैड से मैक में डाला और फिर नेट सर्फ करने के लिए गूगल ऑन कर दिया।
क्रिस्टियन अन्दर आया तो मैं मैक पर ही व्यस्त थी।
“क्या कर रही हो?” उसने प्यार से पूछा।
पहले तो मैं घबरा गई कि उसने मेरा वेबपेज देख लिया तो क्या सोचेगा-मैं देख रही थी कि मल्टीपल पर्सनेलिटी डिसऑर्डर के क्या लक्षण होते हैं?
“यहां क्यों देखा जा रहा है? कोई खास वजह?” उसने पूछा।
ओह आनंदी क्रिस्टियन लौट आया है। मैं इससे कैसे पार पाऊंगी, समझ नहीं आता।
“रिसर्च! मुश्किल व्यक्तित्व को जानने के लिए।”
उसके होठों पर हैरानी से भरी मुस्कान खेल गई।
“मेरा अपना घरेलू प्रोजेक्ट है।”
“मैं अब घरेलू प्रोजेक्ट हो गया हूं? मतलब एक साइडलाइन या फिर एक विज्ञान के प्रयोग की तरह जबकि मिस स्टील! मैं तो यही समझ रहा था कि मैं तुम्हारे लिए सब कुछ था। तुमने तो मेरे दिल को चोट पहुंचा दी।”
“तुम्हें कैसे पता कि मैं तुम्हारी बात कर रही हूं।”
“बस अदांज़ा लगाया।”
“ये सच है कि तुम ही ऐसे झक्की, सनकी और सबको काबू में रखने वाले मर्द हो जिसे मैं बहुत पास से जानती हूं।”
“मैंने तो सोचा था कि मैं वह इकलौता मर्द हूं जिसे तुम अंतरंगता से जानती हो।” उसने एक भौं नचाई।
मैं खिसिया गई-“हां यह भी सच है।”
“क्या तुम किसी नतीजे पर पहुंचीं?”
मैंने उसे मुड़कर घूरा। वह पलंग पर कोहनी टिकाए लेटा है।
“लगता है कि तुम्हें इलाज की सख्त जरूरत है।”
वह आगे आया और मेरे बाल कानों की पीछे कर दिए।
“मुझे लगता है कि मुझे तुम्हारी ज़रूरत है। यहीं और अभी।” उसने मेरे हाथ में एक लिपस्टिक थमा दी।
मैंने उसे देखकर त्यौरी चढ़ाई। मैं परेशान थी। मैं तो लाल रंग की लिपस्टिक नहीं लगाती।
“तुम चाहते हो कि मैं इसे लगाऊं?” मैं चिंहुकी।
वह हंसा। “नहीं एनेस्टेसिया, जब तक तुम न चाहो। मुझे नहीं पता कि यह रंग तुम्हें पसंद भी है या नहीं?
वह पलंग पर आलथी-पालथी मारकर बैठ गया और अपनी शर्ट सिर के ऊपर खींचते हुए उतार दी। ओह! मैं तो गई काम से….. “मुझे तुम्हारा रोड मैप वाला आइडिया पसंद आया।”
मैंने उसे खाली-खाली नज़रों से घूरा- “रोड मैप?”
“वही ‘नो-गो एरिया’ मतलब तुम किन हिस्सों का छू सकती हो और किन हिस्सों को नहीं छू सकती।”
“नहीं, मैं तो मज़ाक कर रही थी।”
“मैं नहीं कर रहा।”
“तुम चाहते हो कि मैं लिपस्टिक से तुम्हारे शरीर पर रेखाएं बनाऊं?”
“ये धीरे-धीरे उतर जाएगी।”
मतलब मैं उसे आराम से कहीं भी छू सकती थी। मेरे होठों पर विस्मय से भरी मुस्कान खेल गई।
“कोई तीखी चीज़ से अगर स्थायी निशान बना सकें तो?”
“मैं टैटू बनवा सकता हूं।” उसकी आंखों में मस्ती नाच उठी।
क्रिस्टियन ग्रे और टैटू! उसके शरीर पर निशान? जबकि उसके शरीर पर पहले से ही इतने निशान हैं। बिल्कुल नहीं!
“टैटू कभी नहीं।” मैंने हंसी के बीच अपने डर को छिपाना चाहा।
“फिर लिपस्टिक चलने दो।” वह बोला
मैंने मैक बंद कर कोने में रख दिया। बड़ा मज़ा आने वाला था।
“आओ। उसने मेरी ओर हाथ बढ़ाया। मेरे ऊपर बैठ जाओ।”
मैंने अपनी चप्पलें उतारीं और बैठी हुई मुद्रा में उसके ऊपर आ गई। वह पलंग पर लेटा पर घुटने मुड़े हुए ही रखे।
“लगता है कि तुम इस खेल के लिए रोमांचित हो।” वह बोला।
“जी मि. ग्रे! आप भी निश्चिंत रहें क्योंकि मैं जानती हूं कि मेरी सीमाएं कहां तक हैं?”
उसने गर्दन हिलाई मानो उसे खुद ही यकीन नहीं आ रहा कि उसने मुझे अपने शरीर पर निशान लगाने की इजाज़त दे दी है।
“लिपस्टिक खोलो।” उसने हुक्म दिया।
ओह, फिर से तानाशाही रवैया! पर मुझे परवाह नहीं है।
“मुझे अपना हाथ दो।”
मैंने दूसरा हाथ थमा दिया।
“लिपस्टिक वाला हाथ।” उसने आंखें नचाईं।
“क्या तुम आंखें नचा रहे हो?”
“हां।”
“मि. ग्रे! ये तो अभद्रता है। मुझे तो कुछ ऐसे लोगों के बारे में भी पता है जो इस तरह की हरकत करने पर भारी सजा देते हैं।”
“अब बस भी करो। अपना हाथ दो।”
मेरा हाथ थामते ही वह अचानक उठ बैठा और हम एकदम आमने-सामने हो गए।
“तैयार?” उसने हौले से ऐसे नशे के साथ कहा कि शरीर की सारी मांसपेशियां ऐंठ गईं। ओह वाह!
“हां।” मैंने हौले से कहा। उसका साथ कितना लुभावना है। मेरे शरीर की गंध के साथ क्रिस्टियन की सेक्सी और मदमस्त कर देने वाली गंध मिल गई है। वह मेरे हाथ को अपने कंधे के मोड़ तक ले गया।
“नीचे लाओ।” मेरा हाथ उसके कंधे से होते हुए, बाजू और फिर छाती के कोने तक लकीर खींचता चला गया। उसने पसलियों के पास ले जा कर हाथ रोक दिया और फिर पेट की ओर संकेत किया। वह बुरी तरह से तनाव में दिख रहा है। भले ही नजरें मुझ पर हैं पर उनमें छिपी झिझक और बेचैनी छिप नहीं पा रही।
मेरा हाथ कस कर थामा हुआ है और जबड़े की रेखाएं गहरी हैं। आंखों के आसपास भी तनाव जमा दिख रहा है। अपने पेट के बीच तक रेखा जाते ही हौले से बोला-दूसरी ओर ऊपर।” उसने मेरा हाथ छोड़ दिया।
मैंने बाईं ओर खिंची रेखा की तरह ही दूसरी रेखा बनाई। बेशक उसने आज मुझ पर बड़ा भरोसा किया है पर हकीकत यह भी है कि मैं इस घमंड के पीछे छिपे दर्द को पहचान सकती हूं। उसकी छाती पर सात छोटे गोल निशान दिख रहे हैं और उसके खूबसूरत शरीर पर किसी की भद्दी हरकत के इन निशानों को देखना बहुत दुखदायी है। एक बच्चे के साथ कोई ऐसा कैसे कर भी कैसे सकता था?
“ये हो गया।” मैं अपने भावों को छिपाते हुए हौले से बोली
“नहीं ……अभी नहीं हुआ।” उसने जवाब दिया और अपनी लंबी ऊंगली से गर्दन के निचले हिस्से में रेखा सी खींच दी। मैं उसकी आंखों की गहराई में खोई हुई हूं।
“अब मेरी पीठ।” वह हौले से बोला। वह उठा ताकि मैं उसके ऊपर से हट सकूं। फिर वह पलंग पर मुड़ा और मेरी ओर पीठ कर आलथी-पालथी लगाकर बैठ गया
“मेरी छाती से दूसरे कोने तक उसी रेखा के हिसाब से चलो।” उसने भारी और नशीले सुर में कहा।
मैंने वही किया और उसकी पीठ पर लाल रंग की लकीर उभरती चली गई। इस दौरान मुझे उसके शरीर पर कुछ और निशान दिखे। कुल मिला कर नौ!
हाय! मुझे इन निशानों को चूमने की इच्छा और अपनी आंखों से टपकने को तैयार आंसुओं पर काबू पाना होगा। वह कैसा वहशी दरिंदा रहा होगा? उसका सिर झुका हुआ है और जब मैं पीठ वाला घेरा पूरा कर रही थी तो उसका पूरा शरीर तनाव से अकड़ा हुआ था।
“क्या तुम्हारी गर्दन के आसपास भी?” मैंने धीरे से पूछा।
उसने हामी दी और मैंने बालों के निचले हिस्से में गर्दन के पास भी रेखा खींच दी।
“हो गया।” उसे देखकर लग रहा था कि उसने लाल रंग की लकीरों वाली अजीब सी बनियान पहन ली हो।
अचानक उसके कंधे शिथिल हो आए और उसने मेरी ओर चेहरा घुमा लिया।
“ये सीमाएं हैं।” उसने शांत भाव से कहा……जाने आंखें क्यों गहरा रही हैं?- भय या वासना? मैं उसका स्पर्श पाना चाहती हूं पर मैंने खुद को रोका और उसे हैरानी से ताकने लगी।
“मैं इनके साथ जी सकती हूं पर अभी के लिए तो मैं खुद को तुम्हें सौंप देना चाहती हूं।” मैंने कहा।
उसने मुझे एक दुष्टता से भरी मुस्कान दी और अपना हाथ आगे कर दिया।
“ओह मिस स्टील! मैं पूरी तरह से तुम्हारी सेवा में हाज़िर हूं।”
मैं बच्चों की तरह किलकारी भरते हुए उसकी बांहों में समा गई और उसे झटके से पलंग पर गिरा दिया। उसने भी एक बड़ी बचकानी सी हंसी दी। शायद उसका तनाव छंट गया है। कुछ ही देर में मैं पलंग पर उसके नीचे थी।
“अब। फिर हो जाए।” वह अपना मुंह मेरे मुंह के पास ले आया।
