Overview: माता पार्वती का कठोर तप और उसका प्रभाव
शिव पुराण की कथा के अनुसार, माता पार्वती के श्राप के कारण समुद्र का जल खारा हो गया। समुद्र देव ने अहंकार में भगवान शिव का अपमान किया, जिससे क्रोधित होकर माता ने यह श्राप दिया। यह कथा अहंकार त्याग और मर्यादा का संदेश देती है।
Why Sea Water Is Salty: सनातन धर्म के ग्रंथ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें प्रकृति, जीवन और ब्रह्मांड से जुड़े कई गहरे रहस्य भी समाए हुए हैं। शिव पुराण ऐसी ही अनेक कथाओं का संग्रह है, जो आज भी लोगों को चकित करती हैं। इन्हीं में से एक कथा समुद्र के जल से जुड़ी है, जिसमें बताया गया है कि कभी समुद्र का पानी भी मीठा हुआ करता था। लेकिन एक घटना और एक श्राप ने उसकी मिठास हमेशा के लिए छीन ली।
माता पार्वती का कठोर तप और उसका प्रभाव

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिमालय पुत्री माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या का संकल्प लिया था। यह तपस्या उन्होंने समुद्र के तट पर की। माता की साधना इतनी प्रचंड थी कि उसके प्रभाव से तीनों लोकों में हलचल मच गई। देवता, दानव और प्रकृति तक उनकी तपस्या की ऊर्जा से प्रभावित होने लगे।
समुद्र देव हुए मोहित
माता पार्वती के तपस्वी और तेजस्वी स्वरूप को देखकर समुद्र के अधिपति वरुण देव स्वयं को रोक नहीं सके। वे माता के सौंदर्य, तप और दिव्य आभा से अत्यंत प्रभावित हो गए। इसी मोहवश समुद्र देव ने माता पार्वती के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रख दिया। उन्हें लगा कि उनकी विशालता, सामर्थ्य और उपयोगिता के सामने कोई इंकार नहीं करेगा।
माता पार्वती का विनम्र लेकिन दृढ़ उत्तर
माता पार्वती ने समुद्र देव के प्रस्ताव को अत्यंत शांति और गरिमा के साथ अस्वीकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका मन, हृदय और जीवन केवल महादेव को समर्पित है और वे पहले ही शिव को पति रूप में स्वीकार कर चुकी हैं। माता का यह उत्तर मर्यादित था, लेकिन इसमें अडिग संकल्प झलक रहा था।
अहंकार में डूबे समुद्र देव
माता पार्वती के मुख से भगवान शिव की प्रशंसा सुनकर समुद्र देव का अहंकार आहत हो गया। क्रोध में आकर उन्होंने महादेव का अपमान करना शुरू कर दिया। उन्होंने शिव को भस्मधारी, वैरागी और आदिवासी कहकर तिरस्कार किया और स्वयं को सर्वगुण संपन्न बताते हुए अपनी विशालता और उपयोगिता का गुणगान करने लगे। समुद्र देव ने यहां तक कह दिया कि माता पार्वती को शिव जैसे वैरागी को छोड़कर समुद्र की रानी बन जाना चाहिए।
माता पार्वती का क्रोध और श्राप
अपने आराध्य और होने वाले पति का अपमान माता पार्वती सहन नहीं कर सकीं। उनका शांत स्वर क्रोध में बदल गया। उन्होंने समुद्र देव से कहा कि जिस मीठे जल और उपयोगिता का तुम्हें इतना घमंड है, वही तुम्हारे अहंकार का कारण बनेगा। माता पार्वती ने समुद्र देव को श्राप दिया कि आज से तुम्हारा जल खारा हो जाएगा और मनुष्य उसे पीने योग्य नहीं समझेगा।
श्राप का प्रभाव और समुद्र की नियति
शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती के श्राप के तुरंत बाद समुद्र का जल खारा हो गया। वह जल विशाल तो रहा, लेकिन उसकी मिठास सदा के लिए समाप्त हो गई। तब से लेकर आज तक समुद्र का पानी प्यास बुझाने के काम नहीं आता। यह कथा अहंकार, मर्यादा और सम्मान के महत्व को दर्शाती है।
कथा का संदेश
यह पौराणिक कथा हमें सिखाती है कि ज्ञान, शक्ति और उपयोगिता का अहंकार अंततः विनाश का कारण बनता है। साथ ही यह भी कि सच्चा प्रेम, संकल्प और सम्मान किसी भी प्रलोभन से ऊपर होता है।
