Shiv Puja Astro Tips
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Overview: शिवलिंग के 3 खास हिस्से

शिवलिंग के तीन पवित्र स्थानों को पूजा के बाद सही विधि से स्पर्श करने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है। इससे विवाह, संतान और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है। श्रद्धा और नियम से की गई शिव पूजा जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।

Shiv Puja Astro Tips: हिंदू धर्म में भगवान शिव को संकटमोचक और दोषों के नाशक के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना न केवल जीवन की परेशानियों को दूर करती है, बल्कि जन्म कुंडली में मौजूद बड़े-से-बड़े ग्रह दोषों को भी शांत कर देती है। विशेष रूप से मंगल दोष से परेशान जातकों के लिए शिव पूजा को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग केवल भगवान शिव का प्रतीक नहीं है, बल्कि उसमें शिव परिवार का पूर्ण वास माना गया है। यही कारण है कि शिवलिंग के अलग-अलग भागों का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पूजा के समय शिवलिंग के तीन खास स्थानों को सही विधि से स्पर्श किया जाए, तो मंगल दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। आइए जानते हैं शिवलिंग के वे तीन पवित्र स्थान कौन-से हैं और उनका क्या महत्व है।

शिवलिंग का पहला स्थान: जलाधारी का अगला भाग

शिवलिंग के जलाधारी का जो हिस्सा आगे की ओर होता है, उसे पहला स्पर्श स्थल माना गया है। यह भाग पैरों के समान दिखाई देता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस स्थान पर भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय का वास होता है।

Shiv Puja Astro Tips
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पूजा समाप्त होने के बाद इस स्थान को श्रद्धा से स्पर्श करना चाहिए और फिर अपने हाथों को पेट पर लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से संतान से जुड़े कष्ट दूर होते हैं और परिवार की सुरक्षा बनी रहती है। जिन लोगों को संतान बाधा या संतान से जुड़ी चिंता रहती है, उनके लिए यह उपाय विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

शिवलिंग का दूसरा स्थान: जल प्रवाह का मध्य भाग

शिवलिंग का दूसरा महत्वपूर्ण स्थान वह होता है, जहां से जलधारा आगे की ओर प्रवाहित होती है। शिव पुराण के अनुसार, इस मध्य भाग में भगवान शिव की पुत्री अशोक सुंदरी का वास माना गया है।

इस स्थान को सीधे हाथ से नहीं, बल्कि बेलपत्र के माध्यम से स्पर्श करना शुभ माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस स्थान का पूजन और स्पर्श करने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और मंगल दोष का प्रभाव कम होने लगता है। जिन जातकों के विवाह में देरी हो रही हो या बार-बार रिश्ते टूट रहे हों, उन्हें यह उपाय नियमित रूप से करना चाहिए।

शिवलिंग का तीसरा स्थान: पिछला गोल भाग

शिवलिंग के जलाधारी का पिछला गोल हिस्सा तीसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। इसे माता पार्वती का हस्त कमल कहा जाता है। यह स्थान स्वास्थ्य और मानसिक शांति से जुड़ा हुआ माना जाता है।

पूजा के दौरान इस भाग को श्रद्धा से स्पर्श करने पर रोगों से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। मान्यता है कि गंभीर बीमारियों में राहत मिलती है और शरीर-मन दोनों मजबूत होते हैं। लंबे समय से चल रही स्वास्थ्य समस्याओं में यह उपाय विशेष लाभ देता है।

मंगल दोष शांति में शिव पूजा की भूमिका

ज्योतिष शास्त्र में मंगल दोष को विवाह और दांपत्य जीवन से जुड़ी समस्याओं का मुख्य कारण माना गया है। शिवलिंग के इन तीन स्थानों को विधिपूर्वक स्पर्श करना मंगल ग्रह की उग्रता को शांत करता है। साथ ही, सोमवार के दिन शिव अभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शिवलिंग पूजन करने से इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...