Summary: नीम के पेड़ के नीचे शुरू हुआ प्यार
बचपन की कॉलोनी, नीम का पेड़ और अनकहा प्यार जतिन और दक्षिणा का रिश्ता वक्त के साथ और गहराता गया। माँ की नाराज़गी और ज़िंदगी की कसौटियों से गुज़रकर, वही प्यार शादी के बंधन में सच्चाई बनकर टिक गया।
Hindi Love Story: वही पुरानी कॉलोनी थीकरीने से सजे फ्लैट, शाम को गूंजती बच्चों की आवाज़ें और बीच में लगा नीम का पेड़, जिसके नीचे बैठकर आधी ज़िंदगी खेली गई थी। यहीं छठी क्लास में पहली बार जतिन और दक्षिणा साथ बैठे थे। टिफ़िन खुलते ही जतिन ने चुपचाप अपनी एक्स्ट्रा परांठे की रोल दक्षिणा की तरफ बढ़ा दी थी। दक्षिणा ने बिना देखे मना कर दिया, फिर हल्की मुस्कान के साथ बोलीमम्मी डाँटेंगी। उस दिन से दोनों के बीच एक अनकहा रिश्ता शुरू हो गया था।
स्कूल से लौटकर गली में क्रिकेट खेलना, साइकिल की घंटी बजाकर नीचे बुलाना, होमवर्क के बहाने घंटों बातें करनासब कुछ बहुत साधारण था, लेकिन बेहद अपना। बारिश में काग़ज़ की नाव बनाकर नाली में छोड़ना, रिज़ल्ट वाले दिन एक-दूसरे के चेहरे पढ़ लेना, और परीक्षा से पहले मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर चुपचाप दुआ करनाये बचपन की वे बारीक चीज़ें थीं, जिनमें प्यार बिना नाम लिए पलता रहा।
आठवीं में जब दक्षिणा ने पहली बार ड्राइंग प्रतियोगिता जीती, जतिन ने उसकी कॉपी के आख़िरी पन्ने पर लिखातुम रंगों से दुनिया बदल दोगी। दक्षिणा ने वो पन्ना आज तक संभाल कर रखा था। दसवीं में जब जतिन पहली बार फेल हुआ, दक्षिणा ने रात भर जागकर उसके लिए नोट्स बनाए। उसने बस इतना कहा थाहार से डरना नहीं, मैं हूँ।
कॉलेज अलग-अलग थे। दक्षिणा फाइन आर्ट्स में गई, रंग, कैनवास और सपनों के बीच। जतिन एमबीए में, प्रेज़ेंटेशन और नंबरों की दुनिया में। दूरी बढ़ी, पर रिश्ता नहीं टूटा। सुबह की गुड मॉर्निंग कॉल, देर रात की थकी हुई आवाज़ें, और छुट्टियों में वही नीम का पेड़सब वैसा ही रहा। दक्षिणा के हाथों में रंग जमते गए और जतिन की आंखों में जिम्मेदारियों की परछाइयाँ। फिर भी, दोनों को यकीन था कि अंत एक साथ ही होगा।
जब शादी की बात आई, जतिन ने घर में साफ़-साफ़ कहामैं दक्षिणा से ही शादी करूँगा। माँ का चेहरा सख़्त हो गया। उन्होंने ठंडे स्वर में कहाया तो लड़की इस घर में आएगी, या मैं इस घर से निकल जाऊँगी। वो रात बहुत लंबी थी। जतिन पहली बार अपने कमरे में बैठकर रोया। अगले दिन से माँ-बेटे की बातचीत बंद हो गई। जतिन देर से घर आता, आँखें झुकी रहतीं। माँ उसे देखतीं, पर कुछ कहती नहीं। घर में खामोशी की दीवारें खड़ी हो गईं।
दक्षिणा ने उसे टूटते देखा। उसने कहाअगर माँ नहीं मानतीं, तो मैं पीछे हट जाऊँगी। जतिन ने सिर हिला दियातुम पीछे नहीं हटोगी, मैं तुम्हें खो नहीं सकता। ये लड़ाई मेरी है। उस रात उसने माँ के कमरे के बाहर बैठकर बस इतना कहामैं आपके बिना अधूरा हूँ, और उसके बिना भी।
धीरे-धीरे माँ ने बेटे को बदलते देखा। उसकी हँसी गायब थी, खाना अधूरा, आँखों में उदासी। एक दिन अलमारी से पुराने एलबम निकले। तस्वीरों में वही कॉलोनी, वही नीम का पेड़, और एक कोने में दक्षिणाबचपन से हर तस्वीर में। माँ का दिल पिघला। उन्हें समझ आया कि ये जिद नहीं, उम्र भर का रिश्ता है।
एक शाम माँ ने खुद दक्षिणा को बुलाया। दक्षिणा घबराती हुई आई। माँ ने बस कहा मेरे बेटे को खुश रखना। दक्षिणा की आँखें भर आईं। उसने सिर झुका दियावादा करती हूँ।
शादी उसी कॉलोनी में हुई, उसी नीम के पेड़ के नीचे। माँ ने बहू का हाथ थामा, और जतिन ने पहली बार दिल से साँस ली। कुछ प्यार बचपन में शुरू होते हैं, पर परख ज़िंदगी लेती हैऔर जो परख में टिक जाए, वही सच्चा होता है।
