Short Holi Story: वो मेरा पहला प्यार है मैं उसे कभी नहीं भूल सकती।
उससे मेरा मिलना कदाचित संयोग मात्र नहीं
बल्की नियती की सोची समझी साजिश होगी।।
मैं उससे एक विवाह समारोह में मिली थी। मिली क्या थी की उसे देखते ही बस उसी की होकर रह गयी थी। उस दिन से लेकर आज तक उसके जैसा ना तो कोई कहीं मुझे दिखाई देता और ना ही उसकी बातों के सिवाय मुझे कुछ सुनाई देता है।
जिंदगी पंख लगा कर उड़ने लगी और फिर हम दोनों यूं ही अचानक एक दिन राहों में कहीं आते जाते टकरा गये। मुझे देख कर वो मुस्कुरा उठे और उन्हें देखने की मेरी तमन्ना पूरी हो गयी।
मगर बात अभी खत्म नहीं हुई।
अभी तो हमारी कहानी शुरु हो रही थी जागते सोते उठते बैठते मैं उनकी ही ख्यालों में खोई रहतीं
बिन बात के भी मुस्कुरा उठती और बिन बात के ही उदास भी हो जाती।
हर घड़ी मेरी निगाहें बस उन्हें ही ढूंढती।
हर आहट पर मैं मुड़ कर देखती की कही वहीं तो नहीं और फिर उन्हें ना पाकर कभी शर्मा जाती तो कभी उदास हो जाती।
इसी तरह बहुत समय बीत गया और एक दिन मुझे मेरी सहेली के यहां से बुलावा आया। होली पार्टी के लिए ।मगर मैंने तो उसे साफ—साफ मना कर दिया। क्योंकि बीते दिनों इतना कुछ बदलाव हुआ मेरी जिंदगी में की मुझे रंग खेलना अब पहले सा पसंद नहीं रहा।
मगर उस ने मुझ से होली पार्टी में आने के लिए बहुत आग्रह किया और मैं उसकी आग्रह को टाल ना सकी।
उसकी बात रखने के लिए मैं पार्टी में आने के लिए तैयार हो गयी। उस दिन जैसे ही मैंने पार्टी हाल में कदम रखा
किसी ने पीछे से आकर मेरे चेहरे पे गुलाल मल दिया।
जो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आया। स्वयं पर हुए हमले से मेरा मन झल्ला गया और मैं उस रंग लगाने वाले को पीटने के इरादे से चाटा उठाए जैसे ही पीछे मुड़ी तो
क्या देखती हूं ।
मेरे सामने वो हाथों में गुलाल लिए मुस्कुराते हुए खड़े थे। उन्हें देख कर मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा। मेरी स्थिति देख कर वो कहने लगे मुझे मारोगी क्या ..?? उनकी बातें सुनकर मुझे हंसी आ गयी और मैं शर्म से लाल हो गयी । होली की ये हुड़दंग मुझे ताउम्र याद रहेगी ।।

