Government to Curb AI-Generated Fake Content with Mandatory Watermark Rules
Government to Curb AI-Generated Fake Content with Mandatory Watermark Rules

Summary: डीपफेक के खिलाफ सरकार की बड़ी तैयारी, AI कंटेंट पर होगा वॉटरमार्क

भारत सरकार एआई से बने फर्जी वीडियो और तस्वीरों पर रोक लगाने के लिए नए नियम लाने की तैयारी कर रही है। इन नियमों के तहत एआई-जनरेटेड कंटेंट पर वॉटरमार्क और लेबल अनिवार्य होगा।

AI Watermark Regulations India: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक जहां एक ओर कामकाज को आसान बना रही है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग ने सरकार और समाज दोनों के सामने गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। एआई की मदद से बनाए जा रहे फर्जी वीडियो और तस्वीरें, जिन्हें डीपफेक कहा जाता है, अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सामाजिक अशांति, साइबर अपराध और व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने का ज़रिया बनती जा रही हैं।

इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने एआई से बने कंटेंट को पहचानने और नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकार ऐसे सभी एआई-जनरेटेड कंटेंट पर वॉटरमार्क और लेबल अनिवार्य करने की योजना बना रही है, ताकि असली और नकली में फर्क साफ तौर पर किया जा सके।

एआई कंटेंट के लिए नियमों का ड्राफ्ट तैयार

एक रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने एआई से बने कंटेंट पर वॉटरमार्क लगाने से जुड़े नियमों का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। मंत्रालय का मानना है कि बिना पहचान वाले एआई कंटेंट के कारण साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं।

सरकार के अनुसार, एआई का गलत इस्तेमाल कर फर्जी वीडियो, फोटो और ऑडियो तैयार किए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग, अफवाह फैलाने और सामाजिक तनाव पैदा करने के लिए हो रहा है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि एआई से बने कंटेंट की पहचान पहले ही हो सके।

Govt will introduce new rules to take action against misuse of AI
Govt will introduce new rules to take action against misuse of AI

वॉटरमार्क से क्या बदलेगा?

नए नियम लागू होने के बाद एआई से बनाए गए वीडियो, तस्वीर या ऑडियो पर साफ तौर पर यह बताना होगा कि वह कंटेंट AI-Generated है। इससे आम लोग यह समझ सकेंगे कि जो वे देख रहे हैं, वह वास्तविक नहीं है।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि:

  • कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले वीडियो पर समय रहते कार्रवाई हो सकेगी
  • समाज में डर या भ्रम फैलाने वाले कंटेंट को रोका जा सकेगा
  • बच्चों के यौन शोषण या आपत्तिजनक सामग्री की पहचान आसान होगी
  • लोगों को पहले से सतर्क किया जा सकेगा

सरकार मानती है कि जब किसी वीडियो या तस्वीर पर स्पष्ट लेबल होगा, तो उसके वायरल होने से पहले ही उसकी सच्चाई सामने आ जाएगी।

सेलेब्रिटी डीपफेक मामलों से बढ़ी चिंता

हाल के महीनों में एआई के दुरुपयोग से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। कुछ चर्चित अभिनेत्रियों के फर्जी वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। इन मामलों ने यह साफ कर दिया कि आम व्यक्ति के लिए असली और नकली कंटेंट में फर्क करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।

एआई तकनीक इतनी एडवांस हो चुकी है कि चेहरे, आवाज़ और हाव-भाव तक असली जैसे लगते हैं। यही वजह है कि सरकार अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि ठोस नियम लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

ग्रोक एआई विवाद बना ताजा उदाहरण

एआई से बने अश्लील कंटेंट को लेकर हाल ही में एक और बड़ा विवाद सामने आया। एलन मस्क के एआई टूल ‘ग्रोक’ का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में आपत्तिजनक तस्वीरें बनाई गईं और साझा की गईं। मामला बढ़ने पर सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा और ऐसे कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए गए।

इस घटना ने साफ दिखा दिया कि अगर एआई कंटेंट पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो इसका असर समाज के हर वर्ग पर पड़ सकता है।

कब लागू होंगे नए नियम?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार संशोधित दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दे रही है। नया एआई फ्रेमवर्क जल्द ही सार्वजनिक किया जा सकता है। इसके लागू होने के बाद एआई प्लेटफॉर्म, डेवलपर्स और कंटेंट क्रिएटर्स पर यह जिम्मेदारी होगी कि वे नियमों का पालन करें।

अभिलाषा सक्सेना चक्रवर्ती पिछले 15 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में दक्षता रखने वाली अभिलाषा ने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान टाइम्स, भोपाल से की थी। डीएनए, नईदुनिया, फर्स्ट इंडिया,...