Summary: फूड डिलीवरी में धोखाधड़ी बढ़ी, एआई की मदद से रिफंड पाने के नए तरीके
जोमैटो और ब्लिंकइट के सीईओ दीपेंद्र गोयल ने पॉडकास्ट में बताया कि कुछ ग्राहक और डिलीवरी पार्टनर अब सिस्टम को धोखा देने के नए तरीके अपना रहे हैं। गोयल के अनुसार, कई लोग एआई तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी फोटो तैयार करते हैं, जिसमें खाने में मक्खी, कीड़े, बाल या अन्य वस्तुएं जोड़कर रिफंड की मांग की जाती है
Zomato AI Fraud: आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। कुछ ही क्लिक में मनपसंद खाना घर तक पहुँच जाना अब आम बात है। अक्सर हम खबरों में पढ़ते हैं कि ग्राहकों को गलत ऑर्डर मिला, खाना खराब निकला या डिलीवरी में बेवजह देरी हुई। ज़्यादातर मामलों में उंगली रेस्टोरेंट या डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर ही उठती है। हाल ही में जोमैटो और ब्लिंकइट के सीईओ दीपिंदर गोयल के एक खुलासे ने इस इंडस्ट्री की दूसरी साइड को सबके सामने ला दिया है। उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी सिर्फ डिलीवरी सिस्टम या पार्टनर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि कई बार ग्राहक खुद भी इसका हिस्सा बन जाते हैं।
दीपिंदर गोयल ने किया चौकानें वाला खुलासा
दरअसल, हाल ही में दीपिंदर गोयल ने राज शमानी के पॉडकास्ट में बताया कि कुछ ग्राहक और डिलीवरी पार्टनर सिस्टम को धोखा देने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पहले जहां लोग असली शिकायतों के आधार पर रिफंड मांगते थे, अब वहीं एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल कर फर्जी सबूत तैयार किए जा रहे हैं। एआई की मदद से खाने की तस्वीरों में मक्खी, कीड़े या नाखून जैसी चीजें जोड़ दी जाती हैं, ताकि शिकायत सही लगे और रिफंड मिल जाए। गोयल के मुताबिक, कई बार लोग खुद खाने में बाल डाल देते हैं और फिर उसे खराब खाना बताकर रिफंड की शिकायत करते हैं। हैरानी की बात यह है कि ये फ्रॉड इतने हाई-टेक और प्लान्ड तरीके से किए जा रहे हैं कि पहली नज़र में उन्हें पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
फूड डिलीवरी में एआई फ्रॉड
उन्होंने यह भी साफ किया कि जोमैटो असली ग्राहकों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है, लेकिन फर्जी शिकायतें पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचाती हैं। कंपनी आने वाले समय में रिफंड पॉलिसी को और सख्त कर सकती है ताकि एआई के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सके। इस तरह की फर्जी शिकायतों का सीधा असर न सिर्फ कंपनी पर पड़ता है, बल्कि ईमानदार रेस्टोरेंट पार्टनर्स को भी नुकसान झेलना पड़ता है। गलत रिफंड की वजह से रेस्टोरेंट्स की कमाई प्रभावित होती है और भरोसे का रिश्ता कमजोर होता है। जोमाटो का कहना है कि कंपनी अब ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए एआई -आधारित जांच सिस्टम को और मजबूत कर रही है।
डिलीवरी पार्टनर भी देते हैं धोखा
वहीं सिर्फ ग्राहक ही नहीं बल्कि कुछ मामलों में डिलीवरी पार्टनर भी इस तरह की धोखाधड़ी में शामिल पाए गए हैं। गोयल ने यह भी बताया कि हर महीने करीब 5,000 डिलीवरी पार्टनर्स को धोखाधड़ी के कारण निकाला जाता है। डिलीवरी पाटर्नर द्वारा की जा रही धोखाधड़ी करने का एक आम तरीका यह है कि वे ऐप में ऑर्डर डिलीवर दिखा देते हैं, लेकिन असल में खाना ग्राहक को द देते ही नहीं। कैश ऑन डिलीवरी के मामलों में भी गड़बड़ी होती है।
‘कर्मा स्कोर’ से तय होता है कौन सही
ग्राहकों और डिलीवरी राइडर्स के बीच होने वाले विवाद सुलझाने के लिए जोमैटो एक खास ‘कर्मा स्कोर’ सिस्टम इस्तेमाल करता है। इसमें ग्राहक और राइडर दोनों के पुराने व्यवहार और रिकॉर्ड को देखा जाता है। दीपिंदर गोयल ने बताया कि कई बार यह तय करना मुश्किल होता है कि गलती किसकी है। ऐसे में जोमैटो उसी का पक्ष लेता है, जिसका कर्मा स्कोर बेहतर होता है। यानी जिसका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा होगा, उसे सही माना जाता है।

