Overview: आशुतोष राणा और रेणुका शहाणे के प्यार से सीखें मजबूत वैवाहिक बंधन का राज
आज के दौर में रिश्ते टूटते क्यों हैं और उन्हें कैसे संभाला जाए? जानिए आशुतोष राणा और रेणुका शहाणे के रिश्ते से प्यार, सम्मान, समझ और संवाद की खूबसूरत सीख।
Ashutosh Rana on Relationship: आज के दौर में रिश्ते बेहद नाजुक होते जा रहे हैं, थोड़ी सी भी ठेस लगने पर कांच की तरह टूटकर बिखर जाते हैं। लेकिन आशुतोष राणा और रेणुका शहाणे की जोड़ी किसी मिसाल से कम नहीं है। उनके बीच का प्यार आज भी लोगों को प्रेरित करता है। आशुतोष राणा अक्सर वैवाहित रिश्तों के बारे में अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखते रहते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर आशुतोष जी का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने शादी और आपसी समझ को लेकर कुछ ऐसी बातें कही हैं जो सीधे दिल पर दस्तक देती हैं। वे शादी को सिर्फ साथ रहने तक ही सीमित नहीं मानते, बल्कि उनके अनुसार यह व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति के दरवाजे भी खोलता है-
पार्टनर बन जाते हैं आध्यात्मिक सहयात्री
आशुतोष राणा कहते हैं कि व्यक्ति अपने जीवन में कई रिश्तों में जुड़ा हुआ होता है, लेकिन उनमें से कुछ संबंध ऐसे होते हैं जो बेहद ही करीबी होते हैं और इसलिए, सामाजिक व्यवस्था से अलग व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति का मूलस्तंभ बन जाते हैं। ऐसा ही एक रिश्ता पति-पत्नी का भी होता है। उनके अनुसार, जब दो लोग साथ आते हैं, तो वे सिर्फ एक घर साझा नहीं करते, बल्कि एक-दूसरे के अस्तित्व को पूरा करते हैं।
समर्पण, सम्मान और स्वतंत्रता का संतुलन

आशुतोष जी कहते हैं कि पति-पत्नी का संबंध सिर्फ प्रेम की अभिव्यक्ति मात्र ही नहीं है, बल्कि यह समर्पण, सम्मान और स्वतंत्रता का बेहतरीन संतुलन है। जहां पर पति-पत्नी एक-दूसरे के व्यक्तित्व को खुलकर विकसित होने देते हैं और वे एक-दूसरे की आकांक्षाओं को अपनी सीमा में कैद नहीं करते हैं, बल्कि उनके सपनों को खुलकर उड़ान भरने देते हैं, तभी प्रेम अपना सबसे सुंदर रूप लेता है। रेणुका और आशुतोष का रिश्ता इसी आजादी की बुनियाद पर खड़ा है।
अहंकार को कहें अलविदा
आशुतोष जी कहते हैं कि आज के दौर में अधिकतर जोड़ों का रिश्ता अपेक्षाओं, अहंकार या अनकही शिकायतों के बोझ तले दब जाता है। जिसकी वजह से रिश्तों की नींव कमजोर हो जाती है। लेकिन जिस दिन आप अपने साथी की खुशी में अपनी खुशी ढूंढने लगते हैं, उस दिन रिश्ता ‘बोझ‘ नहीं बल्कि ‘वरदान‘ बन जाता है।
संवाद है सबसे बड़ी दवा

आशुतोष राणा का मानना है कि पति-पत्नी के रिश्ते में संवाद हमेशा खुला होना चाहिए, क्योंकि दुनिया की ऐसी कोई परेशानी नहीं जिसे बैठकर सुलझाया न जा सके। जब पति-पत्नी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और आपसी संवाद के दरवाजों को खुला रखते हैं, तो इससे वे आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी बढ़ते हैं, क्योंकि जीवन में आध्यात्मिक सिर्फ ध्यान या भक्ति से नहीं आती, बल्कि वो सबसे पहले आपके निकटतम रिश्तों से आती है।
