disobedient child examples
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एक शोध ने बच्चों के व्यवहार, भावनाओं और मा​नसिक सेहत पर पिता के प्रभाव पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। यह स्टडी आपके कई सवालों का जवाब दे सकती है।

Disobedient Child: बच्चों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनकी आदतों और व्यवहार में भी बदलाव आने लगते हैं। वैसे तो यह बदलाव स्वाभाविक हैं, लेकिन कभी-कभी माता-पिता की समझ से परे भी होते हैं। वे समझ नहीं पाते कि आखिर उनसे गलतियां कहां हो रही हैं। अब एक शोध ने बच्चों के व्यवहार, भावनाओं और मा​नसिक सेहत पर पिता के प्रभाव पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। यह स्टडी आपके कई सवालों का जवाब दे सकती है।

नई सोच ने बदला नजरिया

Disobedient Child-आमतौर पर बच्चों के बचपन पर मां के मा​नसिक स्वास्थ्य का प्रभाव ज्यादा माना जाता है।
Generally, mother’s mental health is considered to have a greater impact on the childhood of children.

विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर बच्चों के बचपन पर मां के मा​नसिक स्वास्थ्य का प्रभाव ज्यादा माना जाता है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन, मूड स्विंग, हार्मोनल बदलाव आदि का असर महिलाओं की मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। और ऐसे में बच्चे का प्रभावित होना भी स्वाभाविक है। लेकिन अब साइंस का कहना है कि सिर्फ मां ही नहीं, पिता की मेंटल हेल्थ का भी बच्चों के विकास पर गहरा और लंबा असर पड़ता है। पिता, जिन्हें हर बच्चा अपना रोल मॉडल मानता है, कई मायनों में बच्चों के बचपन को प्रभावित करते हैं।

1400 परिवारों का अध्ययन

अमेरिकन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार पिता की मानसिक सेहत और बच्चों के व्यवहार में गहरा कनेक्शन है। खासतौर पर जो पिता बच्चों के स्कूल जाने पर अवसाद का अनुभव करते हैं। पिता का यह व्यवहार बच्चों के व्यवहार को प्रभावित करता है। हालांकि इसका असर कुछ साल बाद नजर आता है। 1400 से ज्यादा परिवारों पर किए गए इस अध्ययन में कई अहम बातें सामने आई हैं।

चार साल तक देखा व्यवहार

स्टडी के अनुसार जब बच्चे के स्कूल जाने पर पिता अवसाद में आते हैं तो बच्चे भी बदलाव को महसूस करते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि लगभग चार साल बाद इन बच्चों के व्यवहार का फिर से अध्ययन किया गया। जिसमें सामने आया कि अवसादग्रस्त पिताओं के बच्चों में उनके साथियों की तुलना में व्यवहार संबंधी समस्याएं ज्यादा हो सकती हैं। वहीं जिन बच्चों के पिता उनके स्कूल जाने से प्रभावित नहीं थे, उन बच्चों का व्यवहार ज्यादा नॉर्मल था।

बच्चों में दिखता है यह बदलाव

स्टडी में पिता के अवसाद का बच्चों का गहरा असर नजर आया है। ऐसे बच्चे हर बात पर बहस करते हैं, बड़ों की बातें नहीं मानते हैं, निर्देशों का पालन करना उन्हें अच्छा नहीं लगता। चिंता की बात ये है कि 36 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों में ये लक्षण नजर आए हैं। वहीं ऐसे 37 प्रतिशत बच्चे जरूरत से ज्यादा एक्टिव थे। वे एक जगह बैठना पसंद नहीं करते और हमेशा उछल कूद में लगे रहते हैं। इतना ही नहीं करीब 25 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर यानी एडीएचडी के शिकार थे। उन्हें हमेशा अपने पेरेंट्स, खासतौर पर पिता के अटेंशन की जरूरत महसूस होती थी।

इसलिए होता है असर

शोधकर्ताओं का कहना है कि हम भले ही बच्चों को छोटा समझते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि वे बड़ों के व्यवहार को कहीं ज्यादा समझते व महसूस करते हैं। वे ये अच्छे से जानते हैं कि उनके पिता कब भावनात्मक रूप से उनके करीब हैं और कब कम प्यार दिखा रहे हैं। खासतौर पर स्कूल जाने के पहले सालों में वे इन बातों पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं। इसी समय वे नए लोगों से मिलते हैं और दोस्त भी बनाते हैं। अगर घर-परिवार में टेंशन का महौल है तो बच्चे खुद को असुरक्षित व कमजोर महसूस करने लगते हैं। इसका असर भी उनके व्यवहार पर दिखता है।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...