Micro-Retirement: व्यस्त जीवनशैली और काम की टेंशन ने हर किसी की फिजिकल और मेंटल हेल्थ को प्रभावित किया है। खासकर युवा मेंटल प्रॉब्लम्स का अधिक सामना कर रहे हैं। ऐसे में मिलेनियल्स और जनरेशन जेड लोगों का रुझान माइक्रो-रिटायरिंग टर्म की ओर अधिक बढ़ रहा है। देखा जाए तो आज के युवा अपनी मेंटल हेल्थ को मैनेज करने के लिए सबकुछ दांव पर लगा देते हैं फिर चाहे लाखों के पैकेज वाली जॉब ही क्यों न हो। वह लाइफ को इंज्वॉय करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। यही वजह है कि युवा माइक्रो-रिटायरमेंट का सहारा ले रहे हैं। आखिर माइक्रो-रिटायरमेंट है क्या और इसके क्या फायदे हैं, चलिए जानते हैं इसके बारे में।
क्या है माइक्रो-रिटायरमेंट

जब कोई एम्पलॉई अपनी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए अपने करियर या जॉब से कुछ महीने या साल का ब्रेक लेता है तो उसे माइक्रो-रिटायरमेंट कहते हैं। माइक्रो-रिटायरमेंट एक ऐसा टर्म है जिसके तहत आप खुद की हेल्थ की देखभाल, पैशन और शौक को पूरा कर सकते हैं। ये एक फ्लेक्सिबल कॉन्सेप्ट है जो किसी भी व्यक्ति को लाइफ को जीने और इंज्वॉय करने का मौका देता है। माइक्रो-रिटायरमेंट अधिकतम 1 से 3 साल तक लिया जा सकता है। इसके बाद आप चाहें तो अपनी पुरानी जॉब और करियर में वापस आ सकते हैं। आपने अक्सर विदेशी टूरिस्ट्स को देखा होगा कि वह अपने ट्रेवल पैशन को पूरा करने के लिए जॉब छोड़कर महीनों इंडिया में गुजार देते हैं। माइक्रो-रिटायरमेंट हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है।
युवाओं के बीच क्यों लोकप्रिय हो रहा है माइक्रो-रिटायरमेंट
आज के युवा नौकरी की कमी, असुरक्षा, आर्थिक दबाव और फास्टपेस वर्क कल्चर की वजह से तनाव का सामना कर रहे हैं। कई सर्वे में भी इस बात का खुलासा हुआ है कि कार्यस्थल पर युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा तनावग्रस्त रहती है, जबकि मिलेनियल्स इस प्रकार के तनाव को आसानी से हैंडल कर लेते हैं। माइक्रो-रिटायरमेंट युवाओं को एक ऐसा तरीका प्रदान करता है जिससे व्यक्ति अपनी प्राथमिकताओं से पीछे हट सकता है और दीर्घकालिक थकान से बच सकता है। इस दौरान युवा पैसे को प्राथमिकता दिए बगैर अपने पैशन, शौक और प्रियजनों को समय देना अधिक पसंद कर रहे हैं।
माइक्रो-रिटायरमेंट के फायदे

– रोजमर्रा के कामकाजों से ब्रेक लेने से तनाव को कम करने में मदद मिलती है।
– देखा गया है कि माइक्रो-रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति वर्कप्लेस पर अधिक फोकस होकर काम करता है।
– माइक्रो-रिटायरमेंट लेने से युवाओं में काम के प्रति लगन अधिक बढ़ जाती है और जुनून के साथ आगे बढ़ते हैं।
– ब्रेक लेने से व्यक्ति को खुद के साथ समय बिताने का मौका मिलता है जिसमें वह अपने पैशन और शौक को पूरा कर सकता है।
माइक्रो-रिटायरमेंट के नुकसान
– माइक्रो-रिटायरमेंट के फायदे हैं तो नुकसान भी हैं।
– रिटायरमेंट लेने के बाद व्यक्ति को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
– यदि आपके पास कोई बैकअप प्लान नहीं है तो करियर को दोबारा से शुरू करना मुश्किल हो सकता है।
– इस दौरान आपको अपनी बचत को तोडन की आवश्यकता पड़ सकती है।
– कई कार्यस्थलों में दोबारा प्रवेश करने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है।
– कई बड़ी कंपनियां माइक्रो-रिटायरमेंट का समर्थ नहीं करतीं ऐसे में आपको नौकरी छोड़ने में परेशानी आ सकती है।
