Types of Gardening
Types of Gardening

गार्डनिंग की ख़ास बात

हर किसी को गार्ड्निंग करनी चाहिए क्योंकि पौधे सिर्फ घर की शोभा नहीं बढ़ाते बल्कि ताजी हवा और सकारात्मक ऊर्जा भी देते हैं।

Types of Gardening: लोग आजकल अपने घर को हरा-भरा और खूबसूरत बनाने के लिए गार्डनिंग को अपनाने लगे हैं। जिसकी वजह से इसमें तरह तरह के एक्सपेरिमेंट भी हो रहे हैं। अच्छी बात यह कि चाहे छोटे फ्लैट में रहें या बड़े बंगले में हर जगह बागवानी के कुछ न कुछ तरीके मौजूद हैं। हर किसी को गार्ड्निंग करनी चाहिए क्योंकि पौधे सिर्फ घर की शोभा नहीं बढ़ाते बल्कि ताजी हवा और सकारात्मक ऊर्जा भी देते हैं। अगर आप भी अपने घर में गार्डनिंग शुरू करना चाहते हैं तो यहाँ 5 प्रकार की बागवानी के बारे में बताया गया है जिन्हें आप अपने घर के हिसाब से अपना सकते हैं।

आपके पास ज़मीन नहीं है और जगह सीमित है तो कंटेनर गार्डनिंग सबसे बेहतरीन विकल्प है। इस गार्डनिंग में पौधे गमलों, प्लास्टिक की बाल्टियों, या किसी भी कंटेनर में उगाए जा सकते हैं। आप इसे बालकनी, छत या खिड़की के पास रख सकते हैं। यह विधि खासकर छोटे घरों और अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए आदर्श मानी जाती है। टमाटर, मिर्च, तुलसी और मनी प्लांट जैसे पौधे आसानी से कंटेनरों में उगाए जा सकते हैं। इससे आपके घर की ख़ूबसूरती बढ़ेगी और साथ ही साथ हरी सब्ज़ियाँ भी खाने को मिलेंगी। 

आपके पास जमीन की कमी है तो वर्टिकल गार्डनिंग आपके लिए सही विकल्प हो सकता है। इसमें पौधों को दीवारों या वर्टिकल स्टैंड पर लगाया जाता है जिससे कम जगह में अधिक हरियाली मिलती है। इस तकनीक से घर की दीवारें सुंदर और हरी-भरी लगती हैं। स्ट्रॉबेरी, पालक, मनी प्लांट और स्नेक प्लांट जैसे पौधे वर्टिकल गार्डनिंग के लिए उपयुक्त हैं। इस तरह की गार्डनिंग का मुख्य उद्देश्य ही डेकोरेशन होता है। 

इनडोर गार्डनिंग उन लोगों के लिए है जिनके घर में बहुत ज्यादा धूप नहीं आती। यह न केवल आपके घर की खूबसूरती बढ़ाती है बल्कि हवा को शुद्ध करने में भी मदद करती है। इनडोर प्लांट्स जैसे स्नेक प्लांट, एलोवेरा, पीस लिली और मनी प्लांट कम रोशनी में भी आसानी से उगते हैं। यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो घर के अंदर प्राकृतिक ताजगी बनाए रखना चाहते हैं। यह ऑफ़िस को ख़ूबसूरत बनाने के लिए भी की जाती है। 

आप अपने घर में ही ताजी सब्जियाँ और जड़ी-बूटियाँ उगाना चाहते हैं तो किचन गार्डनिंग सबसे अच्छा विकल्प है। इसमें आप टमाटर, मिर्च, धनिया, पुदीना और पालक जैसी सब्जियाँ उगा सकते हैं। इससे आपको ताजी और बिना केमिकल वाली सब्जियाँ मिलती हैं जिससे सेहत भी अच्छी बनी रहती है। इस तरह की गार्डनिंग के लिए छोटे गमलों या पुराने प्लास्टिक के डिब्बों का उपयोग किया जा सकता है। खाली ज़मीन हो तब तो और भी अच्छी बात है। 

आप मिट्टी के बिना पौधे उगाने की आधुनिक तकनीक अपनाना चाहते हैं तो हाइड्रोपोनिक गार्डनिंग एक बेहतरीन तरीका है। इसमें पौधों को पानी में पोषक तत्व देकर उगाया जाता है। यह विधि पानी की बचत करती है और अधिक उपज देती है। इस तकनीक से पालक, लेट्यूस, स्ट्रॉबेरी और धनिया जैसी फसलें आसानी से उगाई जा सकती हैं। यह तकनीकि बहुत तेज़ी से पॉप्युलर हो रही है। 

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...