बिहार में मौजूद है ब्रह्मा का एकलौता पौराणिक मंदिर: Brahma Temple in Bihar
Brahma Temple in Bihar

Brahma Temple in Bihar: माना जाता है कि सृष्टि के रचियता ब्रह्मा का राजस्थान के पुष्कर में एकलौता मंदिर मौजूद है। जबकि पूरे भारत में ब्रह्मा के कुल 12 मंदिर हैं, जिसमें से ब्रह्मा का पौराणिक मंदिर बिहार में मौजूद है। यह स्थल ‘पूर्व-वैदिक काल’ का माना गया है। ये मंदिर गया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर पर मौजूद है। 793 फीट ऊंचे इस पर्वत पर 424 सीढ़िया चढ़कर पहुंचा जा सकता है। ब्रह्मयोनि पर्वत शृंखला में तीन चोटियां हैं, दायें शिखर पर ब्रह्माजी का मंदिर स्थापित है और मध्य शिखर बौद्ध सर्किट से जुड़ा पर्यटक स्थल है।

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1834 ई. में हुआ था मंदिर का निर्माण

Brahma Temple in Bihar
The temple was built in 1834 AD

ब्रह्मयोनि पर्वत स्थित ब्रह्मा मंदिर का पुर्ननिर्माण मराठा सरदार राव भाऊ साहेब ने 1834 ई. में करवाया था। यह अपेक्षाकृत छोटा मंदिर है, जिसमें ब्रह्माजी की प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा ब्रह्मा के ‘सक्रिय नारी शक्ति का प्रतीक’ माना गया है। इस मंदिर में स्थापित मूर्ति का आधा हिस्सा भूमि के ऊपर और आधा भाग भूमि के अंदर है। देवी सरस्वती को आमतौर पर ब्रह्मा की पत्नी के रूप में वर्णित किया जाता है और वह उनकी रचनात्मक ऊर्जा (शक्ति) के साथ-साथ उनके पास मौजूद ज्ञान का प्रतिनिधित्व करती हैं।

मंदिर परिसर में है प्राचीन वटवृक्ष

इसके अलावा थोड़ी दूरी पर, ब्रह्मयोनि पहाड़ के उपर दो संकीर्ण गुफाएं है-जो ‘ब्रह्मयोनि गुफा’ व ‘मातृयोनि गुफा’ के नाम से प्रसिद्ध है। धार्मिक विश्वास है कि इन गुफाओं के अंदर से पार निकल जाने पर ‘जीवन के आवागमन से मुक्ति मिल जाती है। इस स्थल पर अष्टभूजा देवी का मंदिर भी स्थापित है। मंदिर परिसर में एक विशाल, प्राचीन वटवृक्ष है-जिसके बारे में विश्वास है कि यहां ‘ब्रह्माजी ने तप’ किया था। ब्रह्मयोनि का नामकरण मूलतः संस्कृत के दो शब्द ब्रह्म और योनि। ब्रह्म अर्थात हिन्दू देवता, जो शिव के नये अवतार के रूप में जाने जाते हैं और योनि अर्थात अवतार। ब्रह्मा सृष्टि, ज्ञान व वेद के रचयिता हैं।

गौतम बुद्ध ने किया था ब्रह्मयोनि पर्वत पर निवास

प्राचीन ब्रह्मयोनि पर्वत को पुरातत्त्व निदेशालय, बिहार द्वारा ‘सुरक्षित घोषित स्मारक’ की सूची में शामिल किया गया है। यहां से संपूर्ण शहर को देखा जा सकता है। बौद्ध स्थलः ब्रह्मयोनि पहाड़ की मध्य चोटी-बौद्ध धर्मावलंबियों के लिये अत्यंत पवित्र स्थल है। यहां गौतम बुद्ध ने निर्वाण प्राप्ति के पहले, ज्ञान की तलाश में, ब्रह्मयोनि पर्वत पर कुछ समय निवास किया था। शिखर पर अशोककालीन ‘बौद्ध स्तूप’ स्थापित है। ब्रह्मयोनि पर्वत का उल्लेख बौद्ध साहित्य में भी मिलता है। माना जाता है कि सम्राट अशोक ने भगवान बुद्ध की स्मृति में यहां एक स्तूप का निर्माण कराया था। शिखर पर नवनिर्मित भव्य ‘बौद्ध मूर्ति’ व ‘भगवान बुद्ध का चरण चिन्ह’ भी दर्शनीय है।

बिहार में कहा हैं मंदिर

गया मुख्यालय से दक्षिण , एन.एच. 22 पर , विष्णुपद मंदिर से 1 किलोमीटर की दूरी पर, मारनपुर में ये मंदिर स्थित है। गया स्थित ब्रह्मा मंदिर के अलावा पूरे देश में 11 प्रमुख स्थानों पर ब्रह्माजी के मंदिर स्थापित है। जिनके नाम और स्थान नीचे दिए गए हैं-

  • 1. ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर (राजस्थान)
  • 2. से खेतेश्वर ब्रह्मधाम तीर्थ, बाड़मेर (राजस्थान)
  • 3. कुंभकोणम, कोडुमुडी (तमिलनाडु)
  • 4. ब्रह्मपुरेश्वर मंदिर, तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु)
  • 5. श्रीकालहस्ती मंदिर, तिरुपति (आंध्र प्रदेश)
  • 6. चतुर्मुख ब्रह्मा मंदिर, चेब्रोलू (आंध्र प्रदेश)
  • 7. कर्नाटक के बेंगलुरु में ब्रह्मा मंदिर में सात फीट ऊंची, एक चतुर्मुख प्रतिमा स्थापित है।
  • 8. गोवा के तटीय राज्य में,राज्य के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में, सत्तारी तालुका के कैरम्बोलिम के छोटे और दूरदराज के गांव में 5वीं सदी की एक ब्रह्मा मंदिर है।
  • 9. महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से 52 किमी दूर , मंगलवेधा और मुंबई के पास सोपारा में, ब्रह्मा का एक प्रसिद्ध प्रतीक मौजूद है।
  • 10. गुजरात के खेड़ब्रह्मा में उन्हें समर्पित 12वीं सदी का एक मंदिर है।
  • 11. कानपुर में एक ब्रह्म कुटी मंदिर भी है। खोखान, अन्नमपुथुर और होसुर में मंदिर मौजूद हैं।