क्यों होते हैं सूर्य भगवान के रथ में सात घोड़े?: Surya Ratha Significance
Surya Ratha Significance

क्यों होते हैं सूर्य भगवान के रथ में सात घोड़े

सूर्य भगवान के रथ का प्रत्येक घोड़ा एक विशेष गुण या शक्ति का प्रतीक होता है, और इनका संयोजन सूर्य की ऊँचाईयों और जगत की सृष्टि को संतुलित रूप से बनाए रखने के लिए होता है। 

Surya Ratha Significance: सूर्य भगवान के रथ में सात घोड़े होते हैं ऐसा हमारे हिन्दू धर्म में बताया गया है। इस बात का उल्लेख वेद, पुराण, और अन्य सांस्कृतिक ग्रंथों में भी मिलता है।  शास्त्रों के अनुसार,सूर्य भगवान के रथ का प्रत्येक घोड़ा एक विशेष गुण या शक्ति का प्रतीक होता है, और इनका संयोजन सूर्य की ऊँचाईयों और जगत की सृष्टि को संतुलित रूप से बनाए रखने के लिए होता है। 

सूर्य के सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों को भी दर्शाते हैं।

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क्या संकेत देते हैं रथ?

Surya Ratha Significance
What do the chariots indicate?

सूर्य देव के रथ सिर्फ गुणों और शक्ति का ही प्रदर्शन नहीं करते बल्कि रंगों का भी प्रदर्शन करते हैं । जैसा की हम जानते भी हैं कि सूर्य के प्रकाश में सात रंग होते हैं।

 सूर्यदेव के रथ के पहिए जिसमें 12 लाइन होती है वो साल के 12 महीनों का संकेत देते हैं।

सूर्य भगवान के रथ को ‘आरुण रथ’ भी कहा जाता है और इसमें सात घोड़े, जिन्हें “अरुणादित्य” भी कहा जाता है, जो सूर्य को पूरब से पश्चिम तक ले जाते हैं। इन सात घोड़ों का प्रत्येक एक विशेष संदेश और योग्यता है जो भगवान सूर्य के वाहन के रूप में पूजा जाता है।

हर घोड़ा एक संदेश देता है

Message
every horse gives a message

पहला घोड़ा है गायत्री, जो अनुशासन और सख्तता का प्रतीक है। इसका संदेश है कि जीवन में अनुशासन का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दूसरा घोड़ा है भ्रांति’, जो तेजगति और शक्ति को प्रतिष्ठित करता है। यह बताता है कि सूर्य भगवान का प्रकाश और ऊर्जा अत्यधिक होता है, और हमें अपनी शक्ति को उचित रूप से इस्तेमाल करना चाहिए।

तीसरा घोड़ा है उस्निक, जिसे बल और साहस का प्रतीक माना जाता है। यह बताता है कि हमें जीवन में साहस और बल का सही उपयोग करना चाहिए।

चौथा घोड़ा है ‘जगति, जो पराक्रम और वीरता का प्रतीक है। यह हमें बताता है कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें वीरता और पराक्रम की आवश्यकता है।

पाँचवा घोड़ा है ”त्रिस्तप जो ज्ञान और विद्या का प्रतीक है। यह हमें यह बताता है कि ज्ञान और विद्या की प्राप्ति हमें जीवन में सफलता की दिशा में मदद कर सकती है।

छठा घोड़ा है ‘अनुस्तप’, जो बुद्धि और समझदारी का प्रतीक है। यह बताता है कि हमें जीवन में बुद्धि से कार्य करना चाहिए और समस्याओं का समाधान निकालने के लिए समझदारी से निर्णय लेना चाहिए।

सातवां और आखिरी घोड़ा है ‘पंक्ति, जो स्वर्ग में नेतृत्व को बताता है। ये जीवन में नेतृत्व क्षमता का क्या महत्व है,इस बात को दर्शाता है।

ज्योतिषी में महत्व

importance in astrology
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ग्रहों का राजा सूर्य होते हैं। ज्योतिषी में 12 महीने और बारह राशियां होती है। और सूर्य हर महीने अलग अलग राशि में विचरण करते हैं। कुण्डली में सूर्य ग्रह का शुभ होना अच्छा माना जाता है। जिनकी कुण्डली में सूर्य शुभ होता है उसे समाज में नाम,यश, प्रसिद्धि मिलती है। उच्च का सूर्य व्यक्ति को सम्मान दिलाता है। सूर्य की पूजा से सूर्य की स्थिति कुण्डली में शुभ हो जाती है।

इस तरह, सूर्य के रथ में सात घोड़ों का प्रतीक सभी घोड़ों की एक संगठन रचना के माध्यम से व्यक्ति को नैतिकता, सृष्टि, और दिव्यता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।