खूनी भंडारा की खास बात
वर्तमान की ही तरह अतीत में भी मानव सभ्यता के विकास के साथ जल के संरक्षण के लिए प्रयास किए जाते रहे हैं। ऐसा ही एक प्रयास करीब 400 साल पहले मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में किया गया था।
Khooni Bhandara: विश्व विरासत की सूची में खूनी भंडारा के शामिल होने के साथ इस जगह का महत्व बढ़ गया है। कई ऐसे लोग हैं जो इस जगह के बारे में जाने से पहले जानना चाहते हैं। वर्तमान में लोग ख़ूनी भंडारा को कुंडी भंडारे के नाम से भी जानते हैं। वर्तमान की ही तरह अतीत में भी मानव सभ्यता के विकास के साथ जल के संरक्षण के लिए प्रयास किए जाते रहे हैं। ऐसा ही एक प्रयास करीब 400 साल पहले मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में किया गया था। 1615 ईस्वी में अब्दुर्रहीम खानखाना ने इस जगह पर कुंडी भंडारा बनवाया था जो आज भी पूरी दुनिया में मशहूर है। यह पानी के संरक्षण और सप्लाई का एक ऐसा सिस्टम है जो वरमान में हर दिन करीब ढाई लाख लोगों की प्यास बुझाता है।
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इस जगह केकई नाम

कुंडी भंडारे को वर्तमान में कई नामों से जाना जाता है। कुछ लोग इस जगह को नैहरे खैरे यारियां तो लोग कुड़ी का भंडार भी कहते हैं। इतिहासिक तथ्यों के मुताबिक अब्दुर्रहीम खानखाना मुगल शासक जहांगीर के शासनकाल में शहजादा परवेज के सूबेदार हुआ करते थे। उनका साम्राज्य में बहुत ही रुतबा हुआ करता था। उन्होंने ही इस जल स्रोत का निर्माण कराया था। इसका निर्मद कुछ इस तरह कराया था कि आज भी 108 कुंडों में हमेशा पानी का बहाव बना हुआ है। यहां से पूरे शहर में आज भी पानी की सप्लाई की जाती है।
क्यों पड़ा खूनी भंडारा नाम?

इस जगह का खूनी भंडारा नाम पड़ने के पीछे कई तरह की कहानियाँ प्रचलित हैं। एक इतिहासकार होशंग हवलदार के मुताबिक़ यह वह स्थान है जहां पर कुछ आक्रमणकारियों ने व्यापारियों के जत्थे को लूटने के बाद मार दिया था। कई दिनों तक उन व्यापारियों के शव उसी स्थान पर पड़े थे। जैसे ही उनके शव उस जगह से हटाए गए तो वहां से पानी का भंडार निकल पड़ा। तब से इस जगह को खूनी भंडारा और कुंडी भंडारा कहा जाने लगा।
कैसे पहुंचता है पानी

इस जगह पर कैसे पहुंचता है पानी यह अभी भी लोगों के लिए किसी बहुत बड़े सवाल की तरह है। आपको बता दें कि इस जगह का निर्माण बहुत ही सोच समझकर किया गया है जोकि बिल्कुल ही केंद्र में स्थित है। इस कुंडी भंडारा के चारों तरफ सतपुड़ा की बहुत बड़ी-बड़ी पहाड़ियां हैं, जिनसे रिसकर पानी इसके केंद्र में जमा होता है और बिना किसी पंपिंग सिस्टम के यह पानी हवा के दम पर 108 कुंडों तक पहुंचता है। यह संरचना आज भी चालू है। जिसका बड़े बड़े वैज्ञानिक भी लोहा मानते हैं।
यहां गुरुत्वाकर्षण के नियम फेल

कुंडी भंडारे की ख़ास बात यह है कि इसमें पानी की सप्लाई की प्रक्रिया गुरुत्वाकर्षण के नियमों के विपरीत है। इस जगह पर 80 फीट की गहराई से पानी बिना किसी पंप के आगे बढ़ता है। यह पानी बहता हुआ नहीं दिखता, बल्कि छतों से टपकता रहता है और बूंदों के रूप में नजर आता है। करीब 3.9 किमी तक चलने के बाद ये बूंदें अंतिम कुंडी तक पहुंचती हैं और जमीन पर आ जाती हैं। यह पानी मिनिरल वॉटर से भी शुद्ध है।
कुंडों को देखने के लिए लगी है लिफ्ट
इस कुंडी भंडारे को देखने के लिए दुनिया भर से सैलानी आते हैं। इसी वजह से नगर निगम ने लिफ्ट लगाई है। इस लिफ़्ट के जरिए लोग 80 फीट गहरे कुएं में उतरकर अन्य कुंडों तक पहुंचते हैं।
