वजन घटाने के लिए बच्चे के साथ जबरदस्ती न करें

बढ़ते बच्चों के मन पर हर बात की छाप बहुत जल्दी पड़ जाती है इसलिए वे ग्लैमर की दुनिया की चकाचौंध से सबसे जल्दी प्रभावित हो जाते हैं।

ऐसे में माता-पिता को यह समझना जरूरी है कि अपने बच्चों के वजन को कैसे सम्भाला जाए। आमतौर पर कुछ किशोर डाइटिंग और शरीर को फिट रखने में जुटे रहते हैं। फिर भी माता-पिता अकसर शिकायत करते हैं कि बच्चे इस तरफ जरूरत से अधिक ध्यान दे रहे हैं और संतुलन नहीं रखते। कारण यह है कि आजकल अधिकतर बच्चे और किशोर रहन-सहन के स्वस्थ तरीकों को नहीं अपना रहे। बेवक्त सोना-जागना, भूख और कसरत में अनियमितता और खुराक को और कम करना आम होता जा रहा है। इससे उनके पोषण स्तर और शरीर के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। अगर बच्चे का वजन सामान्य से अधिक हो तो इस बारे में समझ और जानकारी होना और भी जरूरी हो जाता है। इन बच्चों और किशोरों में स्वास्थ्य के प्रति सजगता न होने से माता-पिता दिन रात टोका-टाकी करते रहते हैं कि वे अपने स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दें।

चिंता बताएं, हताशा नहीं
माता-पिता होने के नाते आपका अपने बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति चिंतित होना स्वाभाविक है। पर याद रखें कि आपकी चिंता बच्चे को हताश या परेशान न कर दे। मन की चिंता और देखभाल का अहसास कराएं।
हर वक्त न टोकें
बच्चे को वजन घटाने पर राजी करने और शरीर को फिट रखने का महत्व समझाने की कोशिश में बहुत अधिक टोकाटाकी करने से बच्चे को फायदा कम, नुकसान अधिक हो सकता है।

शारीरिक छवि का महत्व
कम उम्र में बच्चे और किशोर इस बात को बहुत महत्व देते हैं कि वे कैसे दिखते हैं। उनकी दुनिया हमउम्र साथियों और उनकी राय से संचालित होती है इसलिए किशोर अपने शरीर की छवि के प्रति बहुत सचेत रहते हैं। अत: माता-पिता को उनकी चिंता का मजाक उड़ाने और नकारने के बजाय उसे समझना और स्वीकार करना चाहिए।

खुल कर बात करें
हर रिश्ते की तरह बच्चों को आपके साथ खुला रिश्ता रखने की छूट होनी चाहिए ताकि वे अपने किसी भी शक या संदेह के बारे में आपके साथ बात करने में हिचकें नहीं। वे जब चाहें, जरूरत पडऩे पर बेहिचक आपसे मदद ले सकें।
परस्पर सम्मान करें
आप और बच्चे एक दूसरे का सम्मान करें, यह बहुत जरूरी है। किशोरों के साथ बराबरी का व्यवहार करने की कोशिश करें। उन्हे अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराएं। फैसले लेने में उन्हें शामिल करें।

जोर-जबरदस्ती से फायदा नहीं
बच्चों को जैसे एक-दूसरे के साथ जोर-जबर्दस्ती नहीं करनी चाहिए उसी तरह बड़ों को भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के साथ जोर-जबर्दस्ती से कभी फायदा नहीं होता।

बच्चे के साथ रिश्ता बनाएं
बच्चे जब किशोरावस्था में कदम रखते हैं, तो माता-पिता के लिए यह और भी जरूरी हो जाता है कि वे जिम्मेदार बड़ों की भूमिका निभाएं। बच्चे के साथ सद्भाव का रिश्ता कायम करें। इससे न सिर्फ आप बच्चे का विश्वास जीत पाएंगे बल्कि यह भी अच्छी तरह समझ पाएंगे कि बच्चा किन अनुभवों और अहसासों से गुजर रहा है।

मीडिया की समझ बढ़ाएं
शारीरिक रंग रूप और वजन के बारे में उनकी धारणा बहुत हद तक मीडिया से संचालित होती है। मीडिया बताता है कि आजकल कैसा चलन है और क्या फैशन है। उनके साथ स्वस्थ चर्चा करें। उन्हें समझाएं कि मीडिया कैसे चलता है, उसका उद्देश्य क्या है और उसके संदेशों पर अंधाधुंध अमल से क्या नुकसान हो सकता है। उन्हें वास्तविक और मीडिया की काल्पनिक दुनिया में अंतर समझने लायक बनाएं।

परिणामों के बारे में जानकारी
अपने शरीर की छवि के प्रति असंतोष का असर कितना दूरगामी हो सकता है, यह समझना भी महत्वपूर्ण है। असंतोष होने पर बच्चा समाज से अपने को अलग कर सकता है, निराश हो सकता है और उसकी व्यक्तिगत, सामाजिक और कामकाजी गतिविधियों पर विपरीत असर पड़ सकता है। अपने शरीर की छवि के बारे में बहुत अधिक ध्यान देने से आत्मसम्मान कम हो सकता है, चिंता और अवसाद जन्म ले सकते हैं।

वजन घटाने में बच्चे का साथ दें
बच्चा जब वजन घटाने की कोशिश करे, उसमें माता-पिता को पूरी तरह शामिल होना चाहिए। इससे न सिर्फ बच्चे को प्रेरणा मिलेगी, बल्कि आप बच्चे के संघर्ष का हिस्सा बन जाएंगे। आप बच्चे के लिए पर्याप्त सहारा बन जाएंगे। इतना ही नहीं आप जितना अधिक समय बच्चे के साथ गुजारेंगे आपके बीच का रिश्ता उतना ही अधिक मजबूत होगा।