googlenews
पेरेंटिंग के तरीके कल, आज और कल: Parenting Techniques
Parenting Techniques

Parenting Techniques: परवरिश का हर तरीका अपने आप में बेहतरीन है, चाहे वह पुराना हो या नया। माता-पिता के प्यार की चाश्नी में डूबी परवरिश गलत हो भी कैसे सकती है, फिर चाहे वह नई हो या पुरानी। आइए जानते हैं नई और पुरानी परवरिश के बीच का फर्क।

जीवन तो चलने का नाम है और परिवर्तन इसका नियम। समय के पहिए में एक और चीज है जो अभिभावक अपनी संतान को देती है वह है परवरिश। परवरिश के तौर-तरीकों पर हमेशा बात होती है। हर मां-बाप चाहते हैं कि वह ऐसी परवरिश करें कि उनकी संतान आगे चलकर एक कामयाब इंसान साबित हो। हमारे यहां में दो तरह की परवरिश इस समय देखी जा रही है। एक वैसी जो हमने अपने मां-बाप से सीखी और एक वो है आज के जमाने के नये जमाने के माता-पिता की मॉडर्न पेरेंटिंग। आइए इस लेख में चर्चा करते हैं इन दोनों परवरिश के अंदाज पर-

पारिवारिक मामलों से बच्चों को दूर रखना

बच्चे का मन है बच्चा सवाल पूछता है? कई बार मां-बाप का अपने भाई-बहनों या रिश्तेदारों से झगड़ा हो जाता है। पारंपरिक परवरिश की बात करें तो बच्चे के अंदर हिम्मत ही नहीं होती कि वह अपने मां-बाप से उनके संबंधों के बारे में कोई सवाल करे। अगर बच्चा हिम्मत करके पूछ भी ले तो कह दिया जाता था कि यह बच्चों की बात नहीं है। यह तो सिर्फ एक उदाहरण है। ऐसी बहुत सी बातें हैं इस तरह की परवरिश जहां बहुत मामलों में बच्चों को स्थिति से अलग रखा जाता है। उन्हें लगता है कि बच्चे उस स्थिति को जानकर क्या करेंगे। कहीं ऐसा न हो कि वे उसे लेकर कोई नकारात्मक छवि अपने बाल मन में बना लें।

निर्णय लेने के स्वतंत्रता न देना

हम लोग आज बिग बॉस को देख रहे हैं जहां बिग बॉस का फैसला ही फाइनल होता है। पारंपरिक परवरिश की बात करें तो घर के बिग बॉस पिता ही हुआ करते थे, जो भी जैसा भी फैसला उन्होंने कर दिया वह निर्णय अंतिम होता था। हां, एक और बात थी वो जब भी कोई फैसला लेते थे वह फैसला उन्होंने क्यों लिया, किस आधार पर लिया इसके बारे में बताना किसी को जरूरी नहीं समझते थे। आज की परवरिश अगर माता-पिता बच्चों के लिए कोई निर्णय लेते भी हैं तो एक तो उसमें बच्चों की राय और पसंद शामिल होती है। फैसला किस वजह से लिया गया यह भी माता-पिता अपने बच्चों को बताते हैं।

बदल रही है पिता की छवि

पहले के पिता एक चट्‌टान की छवि लिए थे। बच्चे उनसे आंख मिलाने से भी डरते थे। हालांकि, डाइनिंग टेबल पर चर्चा का दौर चलता है लेकिन सीमा और मर्यादा की देहरी को बिना लांघे। मॉडर्न पेरेंटिंग के पापा अपने एंग्री मैन वाली छवि से निकल कर कूल और हैपनिंग डैड बन चुके हैं। बच्चे उनके साथ अपनी हर बात साझा करना पसंद करते हैं। यह कूल डैड बच्चों के लिए कभी उनकी पसंद का खाना भी बनाते हैं। यह खुद को बच्चों के साथ और बच्चे इनके साथ खुलकर रहते हैं। अपने बच्चों के साथ यह आपको मस्ती करते हुए या मम्मी से अलग अपना गैंग बनाते भी नजर आते हैं। बच्चे इनके साथ मस्ती करते खिलखिलाते और अपने बचपन को जीते नजर आते हैं।

छवि को लेकर सचेत रहते हैं माता-पिता

New Parenting Techniques
Parents are conscious about the image

आजकल के बच्चे और उनके माता-पिता अपनी छवि को लेकर काफी सचेत रहते हैं। पुराने समय में माता-पिता बच्चे को डांटने या हाथ उठाने से पहले सोचते नहीं थे। गलती करने पर किसी के भी सामने डांट या मार पड़ जाया करती थी, फिर चाहे वह दोस्त हो, पास-पड़ोसी हो या कोई रिश्तेदार। जबकि आज के माता-पिता अपने अलावा बच्चों की छवि के बारे में भी बहुत सोचते हैं। फिर आजकल के बच्चे बेहद संवेदनशील और व्यावहारिक हो गए हैं।

व्यावहारिक अनुभव

‘शेयरिंग इज केयरिंग अकसर आपने नये जमाने के माता-पिता के मुंह से ये वाक्य सुना होगा, जबकि पहले इस तरह की बातें नहीं हुआ करती थीं। उस समय घर में जो भी चीजें आती थीं चाहे वो खिलौने हों या फिर कुछ और, उसे सब आपस में बांटते थे। ऐसे में जब चीज सभी की होती थी तो उसे साझा करने की बात कोई अलग से कहने की जरूरत नहीं होती थी। न ही कोई ‘पर्सनल स्पेसÓ नाम की चीज हुआ करती थी। ऐसे में चीजों को बांटकर इस्तेमाल करना कब आ गया यह तो पता ही नहीं चला।

माता-पिता की बदल रही है सोच

Old Parenting Techniques
Changing thinking of parents

पारंपरिक पेरेंटिंग में पेरेंट्स को जो अपने बच्चों के लिए सही लगता था, वो वह करते थे। अब पेरेंट्स अपने बच्चे को ग्लोबल सिटीजन के तौर पर तैयार करना चाहते हैं। शायद यही वजह है अब वह बच्चों के बिहेवियर को लेकर बहुत सजग हैं। वे इसके लिए इंटरनेट को सर्फ करते हैं किताबें पढ़ते हैं। इंटरनेट एक्सपर्ट से बच्चों को डील करने का एक तरीका जानते हैं। वह अपने बच्चे के व्यक्तित्व को जांच कर उसी अनुसार अपनी परवरिश करना चाहते हैं।

मनी मैनेजमेंट

नये जमाने की परवरिश में बड़े होते बच्चों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उनके खर्च के अनुसार उन्हें पैसे दिए जाते हैं। हां, यह सच है कि अगर बच्चों के पास पैसे कम होने लगते हैं तो वह अपने मां-बाप के पास जाते हैं। लेकिन बहुत हद तक आज बड़े होते बच्चे किफायत में रहना सीख पा रहे हैं। पारंपरिक परवरिश में पैसे की बात भी बड़ों की होती थी। बच्चों को कहा जाता था जो जरूरत है वह मांग लो। बच्चा अपने पास पैसा रखकर खर्च नहीं करता था। उस दौर के बच्चों को तो याद ही होगा कि अगर कोई रिश्तेदार जाते समय पैसे देता था तो कितनी खुशी होती थी।

प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट तो कहीं था ही नहीं

नये जमाने की परवरिश में बच्चे के खानपान पर भी फोकस रहता है। बच्चा क्या खाएगा। प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन मिनरल के बारे में बहुत सोचा जाता है। जबकि पुरानी परवरिश में न तो मां को इतना पता था कि किसमें क्या है? नये जमाने की मां अपने बच्चे के लिए शेफ तक बन गई है। उसे तरह-तरह के टेस्टी लेकिन पौष्टिक खाना बनाकर खिला रही है। अन्न का आदर करना उन्हें सिखाया जाता था, उन्हें बताया जाता था कि खाना छोड़ने से ऊपर वाला नाराज हो जाता है।

एक चीज जो नहीं बदली

Parenting Techniques for Children
Parents Love will Never Change

चाहे नये जमाने की हो या फिर पुराने जमाने की परवरिश, एक चीज जो नहीं बदली वह है माता-पिता का प्यार। रात को पुराने बच्चे भी कहानी सुनते थे और आज के बच्चे भी सुनते हैं। बस उनका नाम बदलकर बेड टाइम स्टोरीज हो गया है।

Leave a comment