रिएलिटी शो देखते हुए अक्सर हम लोग अपने बच्चों की वहां कल्पना करने लगते हैं। और सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर बच्चों का छुपा हुआ हुनर पता कैसे चलता है?इन बच्चों के पेरेंट्स को कैसे पता चला होगा कि उनके बच्चे में एक खास हुनर है। हुनर की पहचान कुछ खास तरीकों से की जा सकती है। लेकिन इसे पहचानने की जिम्मेदारी थोड़ी कठिन है। इसको समझने के लिए बच्चे को थोड़ा समय देना होगा वो भी नियम से। मगर ये कमाल के टिप्स बच्चे के असल हुनर से आपको रूबरू जरूर करा देंगे-

  

 

 

सफल होने के लिए जरूरी- हुनर पहचानना जरूरी है लेकिन ये इतना जरूरी है क्यों?इस सवाल का जवाब ये है कि आज के समय में प्रतियोगिता बहुत है इसलिए सफल होना बहुत जरूरी है। और सफल होने के लिए जरूरी है कि अपने टैलेंट पर काम किया जाए। फिर टैलेंट पर काम करने के लिए जरूरी है कि इसकी पहचान कर ली जाए। अगर बचपन में ही ये काम कर लिया जाए तो हुनर को निखारने का ज्यादा से ज्यादा समय मिल जाता है। इसलिए बच्चे में छिपे हुनर को तुरंत पहचानने की कोशिश शुरू कीजिए। ये काम जितनी जल्दी शुरू होगा उतनी जल्दी आप बच्चे हुनर पर काम कर पाएंगे।

हुनर नहीं है तो- इस दौरान आपको एक बात याद रखनी है कि हो सकता है कि बच्चे में कोई हुनर हो ही न। अब ऐसे में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। और न ही इस दौरान बच्चे पर इसके लिए दबाव बनाने की ही जरूरत है। हर बच्चा अलग होता है ये जरूरी नहीं कि सबमें कुछ न कुछ हुनर हो ही।

प्रेरित करना है जरूरी- हुनर पहचानने का सबसे जरूरी कदम ये है कि आप बच्चे के किए हुए हर काम को लेकर इंकरेज (encourage) जरूर करें। उसे प्रेरित करें कि वो जो भी करना चाहता है उसे आगे भी करता रहे। कभी दुनिया क्या कहेगी,या इस काम के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं। जैसी बातें करके बच्चे को रोकें ना। अब तो ऐसे कई उदाहरण है जहां गरीबी से निकल कर लोग ऊंचाइयों पर पहुंचें हैं। ऐसे कई बड़े नाम हैं जैसे सिंगर नेहा कक्कड़।

नई एक्टिविटी से कराएं रूबरू- बच्चा अपने हुनर को बाहर लाए इसके लिए जरूरी है कि वो अलग-अलग तरह की एक्टिविटी का हिस्सा भी बने। बच्चा जब नई-नई चीजें एक्सप्लोर करेगा तब ही तो ये पता चलेगा कि उसे क्या करना ज्यादा पसंद है। बच्चे को नई से नई एक्टिविटी करने दीजिए,उसे रोकिए नहीं। सिर्फ क्रिकेट,डांस और म्यूजिक में ही नहीं बच्चा कई दूसरी चीजों जैसे गोल्फ,स्केट्स आदि में भी कमाल कर सकते हैं।

पूछें क्या है उसे पसंद- बच्चा खुद भी रुचि ले इसके लिए जरूरी है कि वो अपने दिल की बात आपसे से कहे। वो बताए कि उसने जो एक्टिविटी की,उसमें से उसे कौन सी पसंद आई। क्योंकि सिर्फ आपके सोचने से कुछ नहीं होगा बल्कि बच्चे को भी उसी तरह से सोचना होगा तब ही बात बनेगी। उससे पूछें ऐसी कौन सी एक्टिविटी है,जिसे करके उसे कोई टेंशन नहीं होती बल्कि सिर्फ खुशी होती है।

 जब बच्चा पूछे सवाल- अक्सर बच्चे सवाल बहुत पूछते हैं। वो इतने सवाल पूछते हैं कि अक्सर हम लोग चिढ़ जाते हैं और कहते हैं कि इतने सवाल क्यों। बस अब से ये नहीं करना है। बचके को सवाल पूछने के लिए प्रेरित करें। उन्हें ऐसा न करने के लिए न कहें ना ही उसे इस बात के लिए डांटे हीं। बल्कि आपको बच्चे को खूब सारे सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना है। वो जिस विषय के बारे में ज्यादा सवाल पूछेगा,समझ लीजिएगा कि वो उस फील्ड में कमाल करना चाहता है। ये बात याद रखिए कि 7 से 12 साल की उम्र के बीच बच्चे लॉजिक के साथ सोचने लगते हैं। उनके सवालों को क्रिएटिविटी के नजरिए से देखने लगिए।

सामने से पूछ लें- बच्चों से सामने से सवाल भी किया जा सकता है। उनसे पूछ लीजिए कि उनको क्या करना अच्छा लगता है। लेकिन इसको मजाक में नहीं बल्कि गंभीर सोच के साथ पूछिए। और ऐसा सिर्फ 1 दिन नहीं करना है बल्कि हर कुछ दिन में उनसे इस बारे में पूछते रहिए। उनका जवाब लंबे समय तक एक जैसा रहेगा तो समझ लीजिए कि उनकी रुचि का विषय यही है। वो अपनी रुचि बार-बार पूछने पर आपको बता ही देंगे। बस आपको उनको सुनकर सही निर्णय लेना है।

सपने देखना जरूरी है- बच्चों को बताएं कि सपने देखना बहुत जरूरी है। सपने देखे बिना जिंदगी बिलकुल भी आसान नहीं होगी। सपने देखेंगे तब ही तो उन्हें पूरा करेंगे। इसलिए बच्चों को बातों-बातों में ही बताएं कि सपने देखना बहुत जरूरी है। वो अगर फ्यूचर के बारे में कुछ नहीं सोचते हैं तो आप उन्हें एक नजरिया दीजिए। उन्हें समझाइए कि वो अपनी पसंद के हिसाब से सपने देख सकते हैं।

 

पेरेंटिंगसंबंधीयहलेखआपकोकैसालगा?अपनीप्रतिक्रियाएंजरूरभेजें।प्रतिक्रियाओंकेसाथहीपेरेंटिंगसेजुड़ेसुझाववलेखभीहमेंईमेल करें editor@grehlakshmi.com

ये भी पढ़ें- बॉलीवुड हसीनाओं के घर ऐसे कि नजर ना हटे