Sign Language: आपने अक्सर देखा होगा कि बच्चा माता-पिता से कम्यूनिकेट करने के लिए विभिन्न प्रकार के संकेतों यानी साइन का उपयोग करता है। वह भूखा होने पर रोता है, खिलौना न मिलने पर चिल्लाता है या फिर गुस्सा करता है। कई बार पेरेंट्स उसके इशारों का सही अनुमान नहीं लगा पाते हैं इससे सिर्फ पेरेंट्स ही नहीं बल्कि बच्चा भी निराश हो जाता है। सामान्यतौर पर छोटे बच्चे साइन लैंग्वेज का उपयोग करते हैं लेकिन कई बार कुछ बड़े बच्चों को भी बोलने में कठिनाई महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में बच्चे अक्सर चिड़चिड़े या फिर शांत हो जाते हैं। यदि आपका बच्चा भी बोलने से कतराता है तो आप माकाटन साइन लैंग्वेज का इस्तेमाल कर बच्चे को बातचीत करना सिखा सकते हैं। माकाटन क्या है और ये कैसे काम करती है चलिए जानते हैं इसके बारे में।
क्या है माकाटन साइन लैंग्वेज

माटाकन एक सरल संकेत भाषा प्रणाली यानी साइन लैंग्वेज है जो विभिन्न संकेतों का उपयोग करके बच्चे को बोलना सिखाती है। इस लैंग्वेज प्रोग्राम में भाषण के साथ संकेतों और प्रतीकों का संयोजन किया जाता है ताकि बच्चा बेहतर ढंग से कम्यूनिकेट कर सके। इसे भाषा की कठिनाईयों वाले व्यक्तियों की मदद के लिए उपयोग किया जाता है। ये बच्चे के प्रारंभिक भाषा विकास में मदद कर सकती है।
बच्चे को क्यों सीखनी चाहिए साइन लैंग्वेज
बेहतर संवाद: छोटे बच्चे अक्सर इशारों में बात करते हैं। उन्हें जो चाहिए होता है वह इशारे में बता देते हैं। लेकिन कई बार पेरेंट्स बच्चों की बात पूरी तरह से समझ नहीं पाते। ये साइन लैंग्वेज बच्चे को संवाद करना सिखाती है। सरल संकेत सिखाने से बच्चे प्रभावी ढंग से बात कर जिंदगी आसान बना सकते हैं।
फिजिकल एक्टिविटी: साइनिंग को गाने, कहानियों और डेली एक्टिविटीज में शामिल किया जा सकता है। माकाटन साइन लैंग्वेज से बच्चे जल्दी सीखते हैं। इससे बच्चे फिजिकली एक्टिव रहते हैं।
मेंटली स्ट्रॉन्ग: माकाटन साइन लैंग्वेज से बच्चे सिर्फ बोलना ही नहीं सीखते बल्कि मेंटली स्ट्रॉन्ग बनते हैं। जब बच्चे शब्दों के साथ संकेतों का संबंध बनाना सीखते हैं तो वे ब्रेन के कई क्षेत्र सक्रिय कर लेते हैं।
बच्चे होते हैं प्रोत्साहित: साइन लैंग्वेज का उपयोग करना मजेदार और आकर्षक तरीका हो सकता है। साइनिंग आंखों के संपर्क, संवाद और शेयर करने के तरीके को प्रोत्साहित करता है।
किन बच्चों के काम आती है माकाटन साइन लैंग्वेज
माकाटन का उपयोग व्यापक रूप से भाषण और भाषा में देरी, ऑटिज्म या मानसिक रूप से परेशान बच्चों के समर्थन के लिए किया जाता है। सही समय पर साइनिंग लैंग्वेज शुरु करने से बच्चे को संचार करने में मदद मिल सकती है। इससे कमजोर बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है।
कैसे करें साइन लैंग्वेज की शुरुआत

बच्चे को साइन लैंग्वेज सिखाना बेहद आसान है। रोजमर्रा के शब्दों के लिए आप बेसिक संकेतों से शुरुआत कर सकते हैं। इस गतिविधि को मजेदार बनाने के लिए आप बच्चे के साथ इसे दोहराएं। दिन में कई बार संकेतों का इस्तेमाल करें। पानी और खाना मांगने के लिए हाथ से इशारा करना सिखाएं। बच्चों को यदि ये लैंग्वेज खेल-खेल में सिखाई जाए तो वह जल्दी रिस्पॉस करेंगे।
पेरेंट्स इन बातों का रखें ध्यान
– बच्चे को साइन लैंग्वेज सिखाने के लिए फोर्स न करें।
– बच्चा किसी भी नई चीज को आसानी से एक्सेप्ट नहीं करता इसलिए पेशेंटली चीजों को हैंडल करें।
– बच्चे से जब भी बात करें साइन लैंग्वेज में ही बात करें।
– बच्चे की बात समझने की कोशिश करें।
– सिखाने की जल्दबाजी न करें।
