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त्योहारों पर रखें बच्चों का विशेष ध्यान: Diwali safety for Kids
Diwali safety for Kids

Diwali safety for Kids: दिवाली के त्योहार में बच्चों के प्रति की गई अनदेखी कहीं दिवाली की रौनक न कम कर दे इसलिए इस दौरान बच्चों का खास ध्यान और कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। दिवाली आने से पहले और होने तक घर में कई ऐसे कार्य होते हैं जिन पर यदि ध्यान नहीं दिया जाए तो बच्चों को नुकसान पहुंच सकता है।

बच्चे हों या बड़े सभी त्योहारों के मौसम के हर रंग, हर स्वाद का भरपूर लुत्फ उठाना चाहते हैं। पर त्योहारों की भागादौड़ी में अक्सर माता-पिता बच्चों को नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार तो यह लापरवाही बेहद खतरनाक साबित हो जाती है, जिसका खामियाजा उन्हें पूरी जिंदगी भुगतना पड़ता है। ऐसे में बेहद जरूरी है कि त्योहार के समय बच्चों के प्रति ज्यादा सचेत हो जाएं वो कैसे? आइए जानें-

समस्या नंबर-1 : अक्सर हम त्योहार के समय घर में तरह-तरह के व्यंजन बनाते हैं और बाजार से भी ढेरों मिठाइयां लाई जाती हैं। खासकर बच्चों को तो इस दौरान खूब सारी मिठाई और चॉकलेट खाने का मौका मिल जाता है। त्योहारों के व्यंजन में तेल, कैलोरी, सेचुरेटिड फैट और कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा काफी अधिक होती है इसलिए बच्चों को इन व्यंजन की बस थोड़ी सी ही मात्रा देनी चाहिए क्योंकि आजकल बाजार में मिलने वाली ज्यादातर मिठाईयों में मिलावटी खोया होता है। इस मिलावटी खोये की मिठाई खाने से बच्चों की आंतों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होता, जिससे उन्हें डाइरिया, पेट दर्द, आंत में खिचाव आदि परेशानियां उत्पन्न होने की संभावना बढ़
जाती है।
उपाय : ऐसे समय में कोशिश करें कि उन्हें मिठाई, वसायुक्त भोजन से बच्चों को दूर रखें, फास्ट फूड्ïस के जगह फल-फू्रट्स, जूस और ड्राईफ्रूट बेहतर विकल्प है।

समस्या नंबर-2 : मेला का सभी बच्चों को बहुत क्रेज होता है। अक्सर ऐसे स्थानों पर भीड़-भाड़ काफी अधिक होती है और भीड़ के कारण बच्चे के गुम हो जाने का खतरा बना रहता है।
उपाय : ऐसे में हो सके तो इन स्थानों पर जाने से बचें लेकिन यदि फिर भी जाना हो तो बच्चे की जेब में एक कागज पर घर का पता या मोबाइल नंबर लिख कर रख दें।

समस्या नंबर-3 : दिवाली आने से पहले सभी लोग अपने घरों में रंग-रोगन व पेस्टिसाइड का छिड़काव करवाते हैं। इन पेंट और रंगों में बेहद खतरनाक केमिकल होता है।
उपाय : जब भी आप घर में वाइटवॉश करवाएं तो बच्चे को घर से बाहर ही रखें। यदि ऐसा संभव न हो तो कम से कम आप बच्चे को उस कमरे में न जाने दें, जिसमें रोगन या स्प्रे हो रहा हो। खासकर नवजात शिशु व 2 से 3 साल के बच्चे को इन रंगों के संपर्क में बिल्कुल न आने दें।

त्योहारों पर रखें बच्चों का विशेष ध्यान: Diwali safety for Kids
Diwali safety for Kids

समस्या नंबर-4 : दिवाली में घर की साज सजावट का काम और अन्य वस्तुओं की खरीदारी आदि का काम जोरों से शुरू हो जाता है। लोग विभिन्न तरह से अपने घरों को सजाते हैं।
उपाय : सजावट करते वक्त इस बात का खास ख्याल रखें कि ऐसी कोई भी डेकोरेशन की चीज बच्चों की पहुंच में न रखें जो नुकीली हो क्योंकि नुकीली चीज से बच्चों को चोट आ सकती है। ऐसी कोई वस्तु न लगाएं जिसमेें जरा भी धार हो।

समस्या नंबर-5 : दिवाली पर सभी लोग अपने घरों में लाइट और दीये जलाते हैं, जिसको बच्चे देखते तो हैं पर छूते ज्यादा हैं, जिससे दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि छोटे बच्चों में किसी भी चमकने वाली चीज को हाथ में पकड़ लेने की आदत होती है।
उपाय : लाइट की तार को बच्चे की पहुंच से दूर रखें। हो सके तो बच्चे को उन रोशनी के पास अकेले बिल्कुल न जाने दें। खासकर दिवाली के दीये जलाते वक्त छोटे बच्चों को दूरी पर ही बिठाएं।

समस्या नंबर-6 : बच्चों को दिवाली के पटाखों का बेहद शौक होता है। लाख मना करने के बावजूद भी वो इनसे दूर नहीं होते हैं।
उपाय : पटाखे दिलाते वक्त ध्यान रहे कि उन्हें बॉम्ब रॉकेट और आतिशबाजी बिल्कुल नहीं लेने दें क्योंकि इन पटाखों से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। जब भी वे पटाखों को जलाएं तो उनके आस-पास ही रहें। पटाखे जलाते वक्त बच्चों को ढीले ढाले और नायलॉन व कॉटन के कपड़े न पहनाएं क्योंकि ये कपड़े एक चिंगारी से भी आग पकड़ लेते हैं। एक बाल्टी में पानी भरकर नजदीक ही रख लें। 2 से 4 साल के बच्चे को फुलझड़ी से न खेलने दें, उन्हें फुलझड़ी की चिंगारियों से दूर ही रखें। यदि घर में कोई पालतू जानवर हो तो पटाखे जलाते वक्त उसे बांधकर ही रखें, क्योंकि पटाखों की आवाज व चिंगारी से पालतू कुत्ता या अन्य जानवर भड़क सकता है और बच्चों को नुकसान पहुंचा सकता है। जब भी बच्चे पटाखे जलाएं तो सभी इमरजेंसी नंबरों को सेव करके या कागज पर लिखकर अपने पास ही रखें। पटाखे जलाते वक्त छोटे बच्चों के कान में रुई रख दें, क्योंकि ज्यादा तेज बम धमाकों की आवाज से बच्चों के कान का परदा फटने का डर रहता है। छोटे बच्चों की कान की झिल्ली काफी नाजुक होती है, पटाखों की आवाज से उनकी सुनने की क्षमता पर आघात पहुंच सकता है इसलिए दिवाली की रात बच्चों के कान में रुई जरूर रखें। दिवाली के पटाखों से बच्चों की आंखों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। पटाखे जलाने से सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है और चिंगारी व वायु प्रदूषण के कारण आंखों में इन्फेक्शन हो जाता है। कई बार तो आंख में चिंगारी जाने की वजह से आंखों की रोशनी भी चली जाती है इसलिए पटाखे जलाते वक्त बच्चों को एंटी ग्लेयर चश्मा पहनाएं। इस प्रकार संभावित खतरे से बचा जा सकता है।

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