Editorial Review
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Editorial Review: आज दिवाली को मनाने का ढंग काफी बदल चुका है। अब घर-घर खील-बताशे और दीये नहीं, बल्कि महंगे उपहार, ड्राई फ्रूट्स और सजावटी तोहफे देने का चलन अधिक दिखाई देता है। लेकिन गृहलक्ष्मी ने हमेशा यही कोशिश की है कि भारतीय परंपरा पर पाठकों का विशेष ध्यान आकॢषत किया जाए और उन्हें अपनी जड़ों व परम्पराओं से जोड़े रखा जाए। इसी सोच के साथ यह दिवाली विशेषांक आपके लिए तैयार किया गया है। त्यौहार की असली खूबसूरती सिर्फ घर की जगमगाहट या पकवानों के स्वाद तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभवों से भी गहराई से जुड़ी होती है। इस विशेषांक में आपको मिलेगी गंगा आरती और देव दीपावली की झलक,जो आपको इस पर्व के आध्यात्मिक रंगों से भी सराबोर कर देगी। साथ ही इसमें ऐसे सुझाव भी हैं, जिनसे आप रिश्तेदारों और अपनों के साथ अपने संबंध और भी मधुर बना सकें। आखिरकार, त्यौहार का असली संदेश सिर्फ खुशियों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि अपनापन और मेलजोल बढ़ाना भी है। दिवाली की रौनक के बाद जो चुनौतियां सामने आती हैं, उन्हें अनदेखा नहीं किया जा
सकता। पटाखों से होने वाला प्रदूषण और पर्यावरण पर बढ़ता बोझ आज चिंता का विषय है। इसी सोच के साथ इस अंक में हमने ऐसे लेख शामिल किए हैं, जो आपको इस दिशा में सजग भी करेंगे और प्रेरित भी कि हम सब मिलकर अपने वातावरण को सुरक्षित और स्वच्छ रखें। वहीं, करवाचौथ
पर खुद को संवारने के लिए आसान और ट्रेंडी मेकअप टिप्स भी इस अंक का अहम हिस्सा हैं, जो हर आधुनिक महिला को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। अंत में गृहलक्ष्मी परिवार की ओर से आप
सभी पाठकों को दिवाली की ढेर सारी शुभकामनाएं।


आपकी….
वंदना वर्मा