नवरात्रि में आखिरी दिन कैसे करें कलश विसर्जन, इन बातों का जरूर रखें ध्यान: Kalash Visarjan 2023
Kalash Visarjan 2023

Kalash Visarjan 2023: हर वर्ष नवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि का पर्व नौ दिन तक चलता है। नवरात्रि के पर्व की शुरुआत कलश स्थापना के साथ होती है। नवरात्रि में कलश स्थापना का बड़ा महत्व होता है। बिना कलश स्थापना के दुगा पूजा का पर्व अधूरा माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिन तक मां दुर्गा के साथ कलश की पूजा करने का विधान है। नौ दिन के बाद कलश विसर्जन का भी बड़ा महत्व है।

पंडित दिनेश जोशी के अनुसार, जिस प्रकार से कलश स्थापना पूरे विधि विधान से की जाती है, उसी तरह कलश विसर्जन भी विधिवत अनुष्ठान के साथ किया जाना चाहिए। नवरात्रि में कलश विसर्जन के समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। अक्सर लोगों के मन में रहता है कि कलश में भरे जल और रखे नारियल, चुनरी व चावल का क्या करना चाहिए और कौनसी बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो चलिए आज पंडित दिनेश जोशी से जानते हैं नवरात्रि में कलश विसर्जन से जुड़ी प्रमुख व महत्वपूर्ण बातें।

कब करना चाहिए कलश विसर्जन?

Kalash Visarjan 2023

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के अलावा कलश स्थापना से लेकर कलश विसर्जन तक का बड़ा महत्व है। जिस तरह से कलश स्थापना पूरी निष्ठावान और शास्त्रों में दर्ज विधिपूर्वक की जाती है, उसी तरह कलश का सही तरह से विसर्जन करना भी जरूरी है। पंडित जी के अनुसार, नवरात्रि में कलश का विसर्जन नवमी या दश्मी तिथि को करना चाहिए। दशमी तिथि भी कलश विसर्जन के लिए उत्तम है। कुछ स्थानों पर नवमी पर कन्या पूजन के बाद कलश विसर्जन किया जाता है। वहीं, कुछ स्थानों पर दशहरा के दिन कलश उठाने का विधान है।

कलश विसर्जन के समय किन बातों का रखें ध्यान?

Navratri 2023

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, दशहरा के दिन कलश के विसर्जन से पहले उसकी पूजा करने का विधान है। इसके पश्चात कलश विसर्जन किया जाता है। कलश उठाने के बाद उसके नीचे रखे अक्षत को लेकर पूरे घर में उनका छिड़काव कर दें। ऐसा करना बेहद ही शुभ माना जाता है। वहीं, कलश के नीचे रखे सिक्के को माथे पर लगाकर घर की तिजोरी में रखना चाहिए। इससे घर में सुख—संपदा बनी रहेगी। साथ में कलश में लगे चुनरी को घर की स्त्री को देना चाहिए। कलश की चुनरी को धारण करने से मां दुर्गा की कृपा सदैव परिवारजनों पर बनी रहती है।

वहीं, कलश पर रखे नारियल को पधारकर उसे प्रसाद स्वरूप वितरित करना चाहिए। वहीं, कलश में भरे जल को आम के पत्तों की सहायता से पूरे घर में छिड़कना चाहिए। कलश विसर्जन के दौरान जयंती का भी बड़ा महत्व है। सबसे पहले जयंती को मां दुर्गा के चरणों में अर्पित करें। इसके बाद उसे कलश उठाने के बाद धारण करें। इससे सभी नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सुख—समृद्धि बनी रहती है।

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