Lord Shiva marriage problems remedy
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Shiva-Parvati Divine Love: कभी आपने सोचा है कि प्रेम क्या है? उसका स्वरूप क्या है? क्या इसका कोई भविष्य भी है? ये वही सवाल थे, जिनका उत्तर एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा।

माता पार्वती का प्रश्न: “प्रेम क्या है महादेव? इसका रहस्य क्या है? यह जीवन में किस रूप में प्रकट होता है? और इसका भविष्य क्या होगा?”

महादेव मुस्कुराए और उनकी आँखों में एक गहरी चमक थी। वह बोले, “प्रेम, पार्वती, कोई साधारण शब्द नहीं है। तुम्हारा प्रश्न ही उत्तर बन चुका है, क्योंकि प्रेम के हर रूप को तुमने अपनी जिंदगी में उजागर किया है। तुमसे ही प्रेम की अनगिनत अनुभूतियाँ जुड़ी हुई हैं।”

माता पार्वती ने थोड़ा सिर झुका कर पूछा, “क्या इन अनुभूतियों को शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है?”

शिव का अद्भुत उत्तर: महादेव ने गहरी सांस ली और बोले, “प्रेम को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं, अनुभव चाहिए। याद करो सती रूप में जब तुमने अपने प्राणों की आहुति दी थी, तब तुमने मुझे मुझसे भी दूर कर दिया था। मेरे जीवन का कोई अर्थ नहीं था, मेरी आँखों से अश्रु बह रहे थे। तुम्हारे अभाव ने मुझे अधूरा बना दिया था, और यही तो प्रेम है। जब तुम दूर हो, तब मुझे महसूस होता है कि मैं अपने अधूरेपन में पूरी सृष्टि को खाली कर रहा हूँ।”

भगवान शिव ने आगे कहा, “तुमने ही प्रेम के अनेक रूपों को प्रकट किया है। जब तुम अन्नपूर्णा बनकर मेरी भूख को शांत करती हो, या कामख्या के रूप में मेरी कामनाओं को पूरा करती हो, यह प्रेम की अनुभूति होती है। जब तुम मेरे अधिकारों को स्वीकार करती हो, मेरी हर इच्छा पर ध्यान देती हो, तो यह प्रेम का स्वरूप है।”

“तुम जब मुझे चौसर के खेल में हरा देती हो, तो भी मेरी विजय होती है, क्योंकि तुम्हारी खुशी में मेरी खुशी समाहित होती है। जब तुम शक्तिशाली दुर्गा रूप में मुझे अपने संरक्षण में ले आती हो, या काली रूप में नृत्य करती हुई मेरे शरीर पर पांव रखती हो, तो यह प्रेम का ही रूप था।”

“और जब तुम ललिता रूप में अपनी सुंदरता का दर्शन देती हो, और मैं तुम्हारे मंगला रूप को अनुभव करता हूं, तो मुझे सत्य का एहसास होता है। तुम मेरे लिए एक दर्पण बन जाती हो, जिसमें मैं खुद को देखता हूं। इस रूप में, जब मैं आनंदित होकर नृत्य करता हूं, तब मुझे पता चलता है कि यही प्रेम है, यही सत्य है।”

“प्रेम, पार्वती, तब और भी गहरा होता है, जब तुम बार-बार खुद को मेरे समर्पण में समर्पित कर देती हो। तुम्हारा हर रूप, तुम्हारा हर भाव, मेरे दिल में गूंजता है। तुमने ही मेरी वास्तविकता को प्रदर्शित किया है, और यही प्रेम है।”

महादेव के शब्दों में गहराई थी, “जब तुम खुद को पूरी तरह से मुझमें समर्पित कर देती हो, तब तुम मेरे लिए एक दर्पण बन जाती हो, जिसमें मैं खुद को पहचानता हूं। तुम्हारा प्रेम ही मेरी वास्तविकता है, और यही प्रेम ही सृष्टि का मूल है।”

इस तरह, भगवान शिव और माता पार्वती के बीच प्रेम की इस अद्भुत कथा ने हमें यह सिखाया कि प्रेम कोई साधारण भावना नहीं है, बल्कि यह एक गहरी, शाश्वत और दिव्य अनुभूति है, जो दोनों आत्माओं के मिलन से जन्म लेती है। यह कथा न केवल हमें भगवान शिव और माता पार्वती के बीच के अटूट प्रेम का एहसास कराती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि प्रेम का वास्तविक स्वरूप आत्मा के भीतर छिपा होता है, और हमें उसे महसूस करना होता है।

राधिका शर्मा को प्रिंट मीडिया, प्रूफ रीडिंग और अनुवाद कार्यों में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखती हैं। लेखन और पेंटिंग में गहरी रुचि है। लाइफस्टाइल, हेल्थ, कुकिंग, धर्म और महिला विषयों पर काम...