Astro Tips
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Surya Dev Astro Tips: सूर्य देव को जल अर्पित करने की प्रक्रिया में कुछ विशेष ध्यान देने योग्य बातें होती हैं, जो किसी भी प्रकार की अशुभता से बचाने में सहायक होती हैं। जल अर्पित करते समय यह जानना आवश्यक है कि कुछ विशेष अवसरों पर जल अर्पित नहीं करना चाहिए, जैसे कि रविवार को सूर्योदय के समय, ग्रहण के दौरान, या जब सूर्य अस्त हो रहा हो। विशेष रूप से अशुद्धि या अपशब्दों के समय भी जल अर्पित करना वर्जित माना जाता है। इन समयों पर जल अर्पित न करने से व्यक्ति की समस्याएं और बढ़ सकती हैं, इसलिए इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

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सूर्य को जल अर्पित करने का महत्व

कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना एक प्रभावी उपाय है। जब व्यक्ति नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करता है, तो इससे उसकी कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है, जिससे जीवन में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और समृद्धि में वृद्धि होती है। सूर्य की कृपा से व्यक्ति को स्वास्थ्य, सफलता और खुशहाल जीवन की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, सूर्य को जल अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता का संचार होता है, जिससे जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होती है।

सही समय का ध्यान रखना

सूर्य को जल अर्पित करने का सही समय बहुत महत्वपूर्ण है। सामान्यतः, सूर्य उगने के एक घंटे के अंदर जल अर्पित करना सबसे लाभकारी माना जाता है। एक घंटे के बाद सूर्य की तेज रोशनी चुभने लगती है, जिससे जल अर्पित करने का लाभ कम हो जाता है। इस समय जल अर्पित करने से न केवल सूर्य देव की कृपा प्राप्त नहीं होती, बल्कि यह अनर्थ भी कर सकता है। इसलिए, सही समय का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि सूर्य देव की पूजा का सही फल मिल सके और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डाला जा सके।

विशेष सामग्री का उपयोग

सूर्य को जल अर्पित करते समय कुछ विशेष चीजों का उपयोग करने से पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। जल में लाल फूल, कुमकुम और अक्षत मिलाने से सूर्य देव की आराधना में विशेषता आती है। लाल फूल सूर्य की ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक होते हैं, जबकि कुमकुम और अक्षत शुभता और समृद्धि का संकेत देते हैं। इसके साथ ही, तांबे के लोटे का उपयोग करना भी बहुत फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि तांबा ऊर्जा को संचालित करने में सक्षम होता है।

सही दिशा में जल अर्पित करना

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सूर्य को जल अर्पित करते समय दिशा का चयन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्व दिशा में मुख करके जल अर्पित करना शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिशा में सूर्य का उदय होता है। जब आप पूर्व की ओर मुख करके जल अर्पित करते हैं, तो आप सूर्य देवता की ऊर्जा को अपने जीवन में आमंत्रित करते हैं।

मंत्र का जाप

जल अर्पित करते समय ‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है। यह मंत्र सूर्य देवता की आराधना में शक्ति और प्रभाव का संचार करता है। नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से आपकी प्रार्थनाएं जल्दी स्वीकार होती हैं और आपके व्यक्तित्व में आत्मविश्वास और सकारात्मकता बढ़ती है। इन सभी बातों का ध्यान रखने से आप सूर्य देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...