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दिन-रात काम की टेंशन में खुश रहना भूल गए हैं तो हो सकता है कि आप जॉब बर्नआउट का शिकार हो गए हैं। सिर्फ आप ही नहीं दुनियाभर में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग इसके शिकार हैं और उन्हें नौकरी करना आफत लगने लगा है।
Job Burnout: क्या आप भी नौकरी करते-करते थक चुके हैं। ऑफिस जाने का मन नहीं करता या दफ्तर का नाम सुनते ही माथे पर पसीना आ जाता है। क्या आप भी हर समय ऑफिस के टारगेट, प्रमोशन और परफॉर्मेंस के बारे में ही सोचते रहते हैं। दिन-रात काम की टेंशन में खुश रहना भूल गए हैं तो हो सकता है कि आप जॉब बर्नआउट का शिकार हो गए हैं। सिर्फ आप ही नहीं दुनियाभर में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग इसके शिकार हैं और उन्हें नौकरी करना आफत लगने लगा है। क्या है जॉब बर्नआउट, इसके कारण और निवारण आइए जानते हैं।
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कई गुणा बढ़ जाता है मौत का खतरा

हाल ही में पुणे की 26 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट अन्ना सेबेस्टियन पेरायिल की मौत के मामले ने सभी को चौका दिया। अन्ना की मां का आरोप है कि कंपनी में काम का इतना दबाव था कि उसी तनाव ने उनकी बेटी की जान ले ली। अन्ना एक अकाउंटिंग फर्म में चार महीने से जॉब कर रही थीं। यह झकझोर देने वाली खबर इस बात की ओर इशारा करती है कि आज के समय में कर्मचारियों पर काम का अत्यधिक दबाव है, जिसके चलते वे थकान यानी बर्नआउट का शिकार हो रहे हैं। ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में 82% कर्मचारी इस बर्नआउट को महसूस करते हैं। हालांकि अधिकांश इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जो खतरनाक हो सकता है। साल 2021 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन की एक स्टडी में खुलासा हुआ कि जो कर्मचारी सप्ताह में 35 से 40 घंटे काम करते हैं, उनकी तुलना में 55 घंटे या उससे ज्यादा काम करने वालों को मौत का खतरा कई गुणा ज्यादा होता है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप समय पर जॉब बर्नआउट के लक्षणों को पहचानें और उसके निदान पर ध्यान दें।
ऐसे पहचानें बर्नआउट के लक्षण
जॉब बर्नआउट के तीन प्रमुख लक्षण हैं, जिन पर आपको समय रहते ध्यान देना चाहिए।
1. शारीरिक : जॉब बर्नआउट का पहला लक्षण शरीर पर नजर आता है। आपको हर समय थकान महसूस होने लगती है। अक्सर सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द रहता है। साथ ही पाचन संबंधी परेशानियां भी होने लगती हैं। ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स रिपोर्ट के अनुसार स्टडी में करीब 40 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि वह हर समय थकान महसूस करते हैं। वहीं 35 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें हर समय वर्क प्रेशर फील होता है।
2. भावनात्मक : काम का दबाव आपको मानसिक और भावनात्मक दोनों तरीके से प्रभावित करता है। आपको काम में रुचि नहीं रहती, आप सिर्फ उसे जिम्मेदारी समझकर पूरा करते हैं। इतना ही नहीं आप इन जिम्मेदारियों को निभाते निभाते थकान महसूस करने लगे हैं। आपको हर समय चिंता रहती है और आप उदास रहने लगे हैं। स्टडी में 43 प्रतिशत कर्मचारियों ने यह भी माना कि उन्हें वित्तीय चिंताएं रहती हैं और यही तनाव का बड़ा कारण भी है।
3. व्यावहारिक: किसी भी चिंता, दबाव या परेशानी का असर आपकी व्यावहारिकता पर भी नजर आता है। बर्नआउट के कारण भी यह परिवर्तन दिखते हैं। आप जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करते हैं। आपकी उत्पादकता घटने लगती है। खुश नहीं रह पाते, अकेलापन महसूस करते हैं। आपको लोगों से मिलना अच्छा नहीं लगता और सबसे दूरी बनाने लगते हैं।
ऐसे बचें जॉब बर्नआउट से
जॉब बर्नआउट से बचने का सबसे अच्छा तरीका है वर्क लाइफ बैलेंस बनाना। आप काम का प्रेशर दफ्तर में ही छोड़कर आएं। अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं। अपनी रुचियों पर फोकस करें और उन्हें समय दें। शॉर्ट ट्रिप्स प्लान करें। मॉर्निंग वॉक, योग और मेडिटेशन से भी आपको असर नजर आएगा। बुक्स को अपना साथी बनाएं। स्क्रीन टाइम कम करें और समय पर सोएं। कम से कम आठ से नौ घंटे की नींद जरूर लें।
