Child Behavior Problems: हर पेरेंट्स बच्चे की परवरिश बेहतर ढंग से करना चाहते हैं जिसके लिए वह काफी मेहनत और त्याग करते हैं। बावजूद इसके कई बच्चे उम्र के साथ पेरेंट्स की बातों और उनके व्यवहार को नकारात्मक ढंग से अपनाने लगते हैं। ऐसे बच्चे धीरे-धीरे रूड और बदतमीज हो जाते हैं। कई बार बच्चों का ऐसा स्वभाव उन्हें आगे बढ़ने और सामाजिक बनने से रोकता है। खासकर टीनेज में बच्चे अधिक रूड हो जाते हैं। बच्चों के ऐसे व्यवहार को कंट्रोल करने लिए पेरेंट्स अक्सर स्ट्रिक्ट एक्शन अपनाते हैं जो कि बच्चे के भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यदि आपका बच्चा भी इस प्रकार का व्यवहार कर रहा है तो सबसे पहले इसका कारण जानने का प्रयास करें। बच्चे के रूड व्यवहार को मैनेज करने और उन्हें सही-गलत का ज्ञान देने के लिए पेरेंट्स इन टिप्स को अपना सकते हैं।
बच्चे के रूड व्यवहार का कारण

मानसिक परेशानी
बच्चा ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है पेरेंट्स ये जानने का प्रयास करें। जब बच्चा किसी बात से परेशान है या एंग्जाइटी का शिकार है तो बच्चे के व्यवहार में बदलाव देखा जा सकता है। या कई बार बच्चे पेरेंट्स का ध्यान आकर्षित करने के लिए भी अपने व्यवहार में परिवर्तन कर सकता है। इसलिए बच्चे की मानसिक स्थिति को समझें फिर एक्शन लें।
संगती का असर
बच्चों के व्यवहार में बदलाव का कारण उनकी संगती भी हो सकती है। यदि बच्चे के दोस्त बिगड़े हुए हैं या गाली देकर बात करते हैं तो बच्चे के व्यवहार में भी ऐसी आदतें शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा पेरेंट्स का अपमानजनक व्यवहार भी बच्चे को रूड होने पर मजबूर कर सकता है।
बच्चे को समय न देना
कई बार बच्चे को पर्याप्त समय न देने की वजह से भी बच्चे पेरेंट्स के प्रति रूड हो जाते हैं और गलत जवाब देने लगते हैं। ऐसे में बच्चे को समझने का प्रयास करें। साथ ही बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें।
ऐसे करें बच्चों के व्यवहार में बदलाव

बच्चों से करें बात
बच्चे के व्यवहार में अचानक आए बदलाव के पीछे कोई न कोई कारण जिम्मेदार होता है। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स बच्चों से बात करें और उनके मन में क्या है ये जानने का प्रयास करें। यदि पेरेंट्स बच्चों से बात नहीं करते तो बच्चे उनसे चीजें छुपाने लगते हैं। साथ ही बच्चे पेरेंट्स को नजरअंदाज करने लगते हैं। इसलिए पेरेंट्स को बच्चों से समय-समय पर बात करनी चाहिए।
न करें नजरअंदाज
पेरेंट्स की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों की बातों और व्यवहार को नजरअंदाज न करें। यदि बच्चा आपसे कोई बात या घटना शेयर करता है तो उसे गंभीरता से लें। बच्चों की बातों को नजरअंदाज करने से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
बच्चों को सिखाएं लिमिट
बच्चा यदि रूड व्यवहार करता है तो पेरेंट्स उसकी इस गलती को बढ़ावा न दें। बल्कि बच्चे को उसकी लिमिट के बारे में बताएं। बच्चे को पेरेंट्स के साथ किस तरह बात करनी चाहिए या कैसा व्यवहार करना चाहिए ये उसे पता होना चाहिए।
बच्चे को दें समय
बच्चे के रूड व्यवहार का कारण बच्चे का अकेलापन भी हो सकता है। कई बार पेरेंट्स बिजी होने के कारण बच्चे को पर्याप्त समय नहीं देते। जिससे बच्चा मनमानी करने लगता है और पेरेंट्स को जवाब देना सीख जाता है। इसलिए बच्चे के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए पेरेंट्स उन्हें पर्याप्त समय दें। बच्चों को घुमाने ले जाएं, उनके साथ पार्टी करें या उसकी पसंद की डिश बनाएं।
