Lord Krishna: अभिभूत होने के लिए आपको किसी दूसरे की मौजूदगी की जरूरत पड़ती है। होना तो यह चाहिए कि आपकी मौजूदगी से दुनिया अभिभूत हो जाए। कृष्ण का महत्त्व इस बात में नहीं है कि वह वाकई इस धरती पर पैदा हुए या नहीं, वह खुद अच्छे थे या बुरे। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि उनका विचार मात्र ही इंसान को माधुर्य और प्रेम से भर देता है।
Also Read: श्रीमद भगवद गीता में भगवान कृष्ण द्वारा दी गई जीवन जीने की सीख: Bhagavad Geeta Lessons
एक सज्जन मेरे पास आए और बोले, ‘मैं कृष्ण को नहीं मानता। मेरा इन सब बातों में कोई विश्वास नहीं। ठीक है। आपको कृष्ण को मानने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह मामला कृष्ण का नहीं, आपका है। कृष्ण को तो हम बस एक साधन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। आप कृष्ण में विश्वास नहीं करते, आपका मुझमें भी कोई भरोसा नहीं, इससे क्या फर्क पड़ता है? 3500 साल पहले कोई शख्स मौजूद था या नहीं था, इससे क्या फर्क पड़ता है? खुद को मधुरता से सराबोर करने के लिए भक्तों ने कुछ तरीके खोज निकाले। कोई इंसान जितने भी महान गुणों के बारे में सोच सकता है, उन सभी के साथ उन्होंने कृष्ण का गुणगान किया और एक मनोहर देवता के रूप में उनका वर्णन किया। उन्होंने बताया, ‘कृष्ण के होंठ बहुत आकर्षक हैं, उनकी आवाज बड़ी सुरीली है, उनकी आंखें बहुत प्यारी हैं, उनके कान भी सुंदर हैं, उनकी उंगलियां अच्छी हैं, उनकी चाल बड़ी आकर्षक है, उनके नैन-नक्श बड़े तीखे और खूबसूरत हैं।
इस तरह उन लोगों ने कृष्ण की हर चीज के बारे में बेहद खूबसूरती से वर्णन किया। इसके पीछे मकसद उनका महिमा स्थापित करना नहीं था। कभी आपने महसूस किया है कि किसी अद्ïभुत शख्स की मौजूदगी में आप अभिभूत हो जाते हैं? लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि अभिभूत होने के लिए आपको किसी दूसरे की मौजूदगी की जरूरत पड़ती है। होना तो यह चाहिए कि आपकी मौजूदगी से दुनिया अभिभूत हो जाए। आप ऐसा कर सकते हैं। बस बात इतनी है कि इस दिशा में जरूरी कोशिश नहीं की गई है। आपने अपने जीवन को किसी और चीज में लगा दिया है।
तो कृष्ण को माधुर्य के देवता के रूप में देखना… जिस तरीके से वह चलते हैं, जिस तरीके से वह गुस्सा करते हैं, उनसे जुड़ी हर चीज आकर्षक है। वह माधुर्य के देवता हैं। इसका संबंध उनसे नहीं है, इसका संबंध आपसे है। यह देखना है कि आप कितने मधुर और खूबसूरत बनते हैं। ईश्वर खूबसूरत है, इसलिए नहीं कि वह कोई खूबसूरत इंसान है। अगर आप इस संसार को और यहां हो रही घटनाओं को देखेंगे तो आपको लगेगा कि ईश्वर कितना भयावह है, लेकिन भक्तों ने उसका वर्णन इस तरह से किया है कि वह मधुर हो गया है। जीवन का अनुभव इसमें नहीं है कि आप कौन हैं और आपके इर्द-गिर्द क्या है। जीवन का अनुभव इसमें है कि आप कैसे हैं। अगर आप अपने साथ के लोगों को मधुरता और प्रेम के साथ देखेंगे, तो देखिए वे आपको कितने खूबसूरत नजर आएंगे। यहां तक कि बदसूरत सा दिखने वाला ‘मैं’ भी खूबसूरत हो जाता है। यह सब बस इस बात पर निर्भर है कि आप चीजों को कैसे देखते हैं।
कृष्ण ने अपने जीवन में कई भयानक काम भी किए हैं। ऐसे कई प्रसंग हैं, जब जरूरत पड़ने पर उन्होंने बड़ी निर्दयता से काम लिया, लेकिन मुद्दा यह नहीं है। असलियत यह है कि जब लोग उनके आस-पास रहते थे, तो जाने-अनजाने वे बेहद प्रिय और भले बन जाते थे। उन्होंने लोगों को प्रिय और भला होने के लिए प्रेरित किया। वह खुद प्यारे थे या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आम मिठास से भरपूर है। क्या आपको लगता है कि आम का बीज जो उसके भीतर है, वह इस मिठास को महसूस कर रहा है? तो इस बात की फिक्र छोड़ दीजिए कि कृष्ण असल में थे या नहीं। बस यह याद रखिए कि उन्होंने लाखों लोगों के अंदर एक खास तरह का प्रेम और मिठास भर दी थी। खुद को प्रेम और मिठास से भरपूर बनाने के लिए आप भी उनका उपयोग कर सकते हैं
