pampered child synonyms
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बच्चों में चिड़चिड़ापन इन समस्याओं की ओर करता है इशारा, फौरन कराएं जांच

Irritable child : कुछ बच्चे छोटी-छोटी बातों पर काफी ज्यादा चिड़ने लग जाते हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे के कारण क्या हैं?

Irritable Child Causes: बच्चों का चिड़चिड़ापन केवल उनके स्वभाव का हिस्सा नहीं हो सकता, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति से जुड़ी किसी समस्या का संकेत भी हो सकता है। यदि बच्चा लगातार चिड़चिड़ा रहता है, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है या रोता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों के व्यवहार में इस तरह के बदलाव उनके शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़ी किसी गहरी समस्या का संकेत हो सकते हैं।

Irritable Child Causes
Irritable Child Reason
  • शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
  • पेट में कीड़े बच्चों में चिड़चिड़ापन और बेचैनी का मुख्य कारण हो सकते हैं। इससे भूख कम लगती है या पेट दर्द होता है।
  • आयरन, कैल्शियम, विटामिन डी, और अन्य पोषक तत्वों की कमी बच्चों के मूड को प्रभावित कर सकती है।
  • नींद पूरी न होना बच्चों को चिड़चिड़ा और सुस्त बना सकता है।
  • बार-बार बुखार, सर्दी-खांसी, या किसी अन्य संक्रमण के कारण भी बच्चे का व्यवहार प्रभावित हो सकता है।

बच्चों को भी स्कूल, पढ़ाई, और परिवार की समस्याओं से तनाव हो सकता है। यह उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर चिड़चिड़ेपन का कारण बन सकता है। इसके अलावा बच्चों में डिप्रेशन का एक लक्षण चिड़चिड़ापन भी है।

अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) – यह मानसिक विकार बच्चों के ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित करता है और उन्हें अधिक चिड़चिड़ा बना सकता है।

Emotional problems
Emotional problems
  • घर में माता-पिता के झगड़े या अन्य पारिवारिक तनाव बच्चों पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।
  • पढ़ाई, दोस्तों के साथ संबंध, और शिक्षक की अपेक्षाओं का दबाव बच्चों को परेशान कर सकता है।
  • यदि बच्चा स्कूल या किसी अन्य स्थान पर बुलिंग का शिकार हो रहा है, तो वह अपने भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ हो सकता है और चिड़चिड़ा हो सकता है।
  • बच्चे के व्यवहार में बदलाव पर ध्यान दें। यह समझने की कोशिश करें कि वह किन परिस्थितियों में चिड़चिड़ा हो रहा है। यदि चिड़चिड़ापन लंबे समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी है। डॉक्टर बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का आकलन करेंगे।
  • एनीमिया या पोषण की कमी का पता लगाएं और पेट में कीड़ों या अन्य पाचन समस्याओं का पता लगाने की कोशिश करें, ताकि उनकी परेशानी को कम कर सकें।
  • अगर बच्चा सही से नहीं सो रहा है या फिर किसी तरह के तनाव, चिंता या अवसाद में है, तो समय पर इसकी पहचान कर लें।
  • बच्चे की डाइट में पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होनी चाहिए। उसे आयरन, विटामिन डी और प्रोटीन से भरपूर आहार दें।
  • बच्चे को यह महसूस कराएं कि आप उसकी हर बात समझने और मदद करने के लिए उपलब्ध हैं। उसे खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अवसर दें।

बच्चों में चिड़चिड़ापन केवल एक सामान्य व्यवहारिक बदलाव नहीं हो सकता, बल्कि यह उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं की ओर संकेत कर सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे की स्थिति को गंभीरता से लें और उसकी हर छोटी-बड़ी समस्या पर ध्यान दें। सही समय पर डॉक्टर की सलाह और जांच से समस्या को पहचानकर उसका समाधान किया जा सकता है, जिससे बच्चे का विकास और स्वास्थ्य दोनों सही दिशा में रहेंगे।

निक्की मिश्रा पिछले 8 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लिख रही हैं। उन्होंने ग्वालियर के जीवाजी यूनिवर्सिटी से इकनॉमिक्स में एमए और भारतीय विद्या भवन से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की है। लिखना उनके लिए सिर्फ एक प्रोफेशन...