पति का गुस्सा। यानि वो मौका, जब उनका साथ भी न छोड़ पाओ और उनका व्यवहार सहन भी न हो। लेकिन यही वो मौका भी होता है, जब आपको अपनी सहनशीलता दिखाते हुए रिश्ते को मजबूती देनी होती है। खुद को कई बातें समझानी होती हैं तो पति को भी आपे से बाहर होने से रोकना होता है। परिवार में शांति बनाए रखने की ज़िम्मेदारी भी सामाजिक तौर पर आपके कंधों पर ही है, उसे भी तो हैंडल करना होता है। इस वक्त खुद के गुस्से को भी कंट्रोल करना होता है। बदले में आपका भी गुस्सा किया जाना स्थिति को और बिगड़ देता है। जबकि बिलकुल शांत बने रहना आत्मविश्वास को ठेस पहुंचाता है। इसलिए ठीक इस वक्त आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होता है। ताकि स्थिति संभाली जा सके और आगे के लिए भी सुधार की उम्मीद की जा सके। मगर ये होगा कैसे गुस्से के समय किसी को भी हैंडल करना मुश्किल होता है फिर पति का गुस्सा तो स्थिति को और भी कठिन बना देता है। इसलिए इस वक्त कुछ टिप्स पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। इन टिप्स को पहचान लीजिए-
डरना नहीं है-
सबसे पहले तो ध्यान रखिए कि गुस्सा किसी का भी हो, उससे डरना नहीं है। गुस्सा बहादुरी नहीं बल्कि कमजोरी होती है, ये उन लोगों की कमजोरी होती है, जो खुद पर कंट्रोल जरा भी नहीं कर पाते हैं। इसको बच्चे के रोने की तरह देखें न कि शेर की दहाड़ की तरह। इसलिए इस वक्त डरने से अच्छा है मन शांत करके सही निर्णय लें। 
आपकी ज़िम्मेदारी-
इस वक्त आपको ये भी देखना है कि ये गुस्सा कहीं आपकी वजह से तो नहीं बढ़ा है। ध्यान दीजिए और अगर गलती है तो माफी मांगने से भी पीछे न हटिए। मगर गलती नहीं है तो आपको दूसरे एंगल से सबकुछ समझने की जरूरत है। फिर आपको पति को ये समझाना होगा कि उन्होंने आपको गलत समझ लिया है। लेकिन ये काम तुरंत करना गलत होगा। आपको इस स्थिति से बाहर आने का इंतजार करना होगा। 
उनका अपना काम-
कई सारे पुरुष ऐसे होते हैं, जिनको गुस्सा करने की आदत होती है। वो किसी भी बात पर गुस्सा होने लगते हैं और बाट बढ़ती चली जाती है। जैसे नमक कम है तो गुस्सा, कहीं पर गंदगी है तो गुस्सा। ऐसे लोगों की एक खासियत और होती है। वो अपने गुस्से के लिए अपने व्यवहार और सोच पर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं और इसकी ज़िम्मेदारी आमतौर पर पत्नी या किसी खास स्थिति को देते हैं। जबकि गुस्सा करने और खराब व्यवहार के लिए वो खुद जिम्मेदार होते हैं। इसलिए उनकी वजह से खराब हुए माहौल की ज़िम्मेदारी खुद लेने की बजाए इसका कारण उनकी मनः स्थिति को मानिए। 
पहले वो नहीं, आप बदलिए-
कभी भी गुस्से वाले मौके पर पति को बदलने की कोशिश बिलकुल मत कीजिए। क्योंकि आप उसको बदल नहीं सकती हैं, ये काम उन्हें खुद ही करना होगा। इस वक्त सिर्फ एक काम किया जा सकता है कि आप अपने व्यवहार पर काम करें और उसे सुधारने की कोशिश करें। कोशिश करें कि जिस गुस्से की आग में वो तप रहे हैं उसमें आप न जलें। 
सुधार होगा ऐसे-
जब भी पति गुस्सा हों तो याद रखिए कि उस दौरान सुधार के लिए और मौके को ज्यादा न बिगड़ने देने के लिए कुछ बातों पर ध्यान दिया जा सकता है। 
आग में आग-
देखिए जब आग लगी हो तो और आग देने से मामला बिगड़ सकता है। मतलब जब पति गुस्सा हो रहे हों तो खुद पर कंट्रोल ना करना आग में तेल का काम करता है। थोड़े धैर्य के साथ रहिए क्योंकि गुस्सा आने का भी एक समय होता है, इसके बाद ये बिलकुल शांत हो जाता है। ध्यान रखिए गुस्सा तो कुछ देर में खत्म हो जाता है लेकिन इसकी वजह से हुई लड़ाई आपका रिश्ता खराब कर देती है। इसलिए इस वक्त खुद को शांत रखना जरूरी हो जाता है। 
इंतजार करें-
पति के गुस्से पर बात करने के लिए गुस्सा जाने का इंतजार आपको करना ही होगा। क्योंकि याद रखिए गुस्से में उनको आपकी कोई बात समझ नहीं आएगी। बल्कि उनका गुस्सा और बढ़ने की संभावना जरूर होगी। इसलिए गुस्सा शांत होने के बाद ही उनसे पूरी स्थिति पर बात करें। बात करें कि क्यों ऐसा हुआ और क्यों नहीं होना चाहिए था। 
बॉर्डर बना दें-
आप कितना सहन करेंगी और कब आप एक्शन लेंगी, ये बात आपको पहले से ही ब्तानी होगी। ये वो बार्डर होगा, जिससे आगे आने की आजादी आपके पति को भी नहीं होगी। जैसे उन्हें पता होना चाहिए कि अपशब्द सुनने के लिए आप बिलकुल तैयार नहीं हैं। अगर ऐसा हुआ तो आप सख्त कदम उठाएंगी। इस चेतावनी पर आपको अड़े भी रहना होगा। 
जीतना-हारना, कुछ नहीं-
आप दोनों के लिए किसी बहस या लड़ाई में जीतना जरूरी नहीं होना चाहिए। ये आपके लिए तो जरूरी होना ही चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि आपको हर किसी बात पर अपनी ऊर्जा को खराब करने से बचिए। आप उन बातों को ही अहमियत दीजिए, जिसमें बात करना असल में जरूरी हो। जैसे बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी कोई बात। सिर्फ अहम को खुश करने के लिए पैदा हुए गुस्से को सुलझाने की आपकी जरूरत नहीं है। इसलिए जब भी पति गुस्सा हों तो उनसे जीतने की होड में मत रहिए। बल्कि उसी वक्त पर सही निर्णय लीजिए कि आपको बोलना है या नहीं। आपको निर्णय लेना है कि अपनी ऊर्जा गलत जघ निवेश करनी है या सही जगह।
सम्मान आपके लिए-
इस दुनिया में हर इंसान सम्मान का हकदार है। ये बातें आमतौर पर महिलाएं नहीं समझती हैं। उन्हें सम्मान में कटौती बहुत गलत नहीं लगती बल्कि वो इसको अपनी किस्मत मन लेती हैं। या पति की अच्छाइयों के सामने इसे छोटी चीज मान लेती हैं। ये सोच बिलकुल गलत है। सबसे पहले अपने सम्मान की रक्षा आपको खुद करनी होगी, येयड रखिए। 
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