Facts About Christmas: क्रिसमस का त्यौहार वैसे तो यह क्रिश्चन समुदाय का है, लेकिन ग्लोबलाइजेशन और सोशल मीडिया के प्रचलन से इसे पूरी दुनिया में हर धर्म और जाति के लोग मनाते हैं। हमारे देश में भी क्रिसमस का त्यौहार होली, दिवाली और ईद की तरह बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। दिसंबर आते-आते क्रिसमस की रौनक हर जगह देखने को मिल जाती है। लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रूस, जार्जिया, मिस्र, आर्मेनिया, यूक्रेन, सर्विया जैसे देशों में क्रिसमस का त्यौहार 25 दिसंबर के बजाय 7 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी वजह है-इन देशों में प्रचलित कैलेंडर। यानी जूलियन कैलेंडर को मानने वाले देश क्रिसमस का त्यौहार 25 दिसंबर को मनाते हैं, वहीं रोमन और ग्रेगोरियन कैलेंडर पर अमल करने वाले देशों में यह 7 जनवरी को मनाया जाता है।
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कौन हैं सांता क्लॉस

क्रिसमस का नाम लेते ही हम सभी के मन में सफेद दाढ़ी वाले व्यक्ति की छवि उभर आती है जो लाल कोट, लाल पैंट, लाल टोपी पहन कर आते है। कंधे पर उपहारों से भरी लाल रंग की बड़ी झोली लटकाए होते हैं और बच्चों को उपहार देते हैं। ईसाई धर्म के अनुयायी सांता क्लॉस को एक देवदूत मानते रहे हैं। टॉफियां, चॉकलेट, फल, खिलौने और दूसरे उपहार बांटने वाले सांता को बच्चे क्रिसमस फादर भी कहते हैं। हालांकि सांता क्लॉस और ईसा मसीह के बीच कोई संबंध नहीं है, फिर भी सांता के बिना क्रिसमस अधूरा-सा है।
सांता क्लॉस असल में कोई देवदूत नहीं, ईसाई संत निकोलस हैं। जो अपने दयालु, उदार और हमेशा दूसरों की मदद करने वाले स्वभाव के कारण देवदूत माने जाते हैं। उनका जन्म ईसा मसीह की मौत के 280 साल बाद, तीसरी सदी में तुर्किस्तान के मायरा नामक शहर में हुआ था। उनका जन्म अमीर घर में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने माता-पिता को बचपन में खो दिया था। वे मॉनिस्ट्री में पले-बढे़ थे। 17 साल की उम्र में उन्हें पादरी की उपाधि मिली थी। ईसा मसीह के प्रति उनकी अटूट आस्था थी। उन्हें यह देखकर बहुत दुख होता था कि कोई गरीब पैसे की कमी की वजह से क्रिसमस न मनाए। इसलिए वह लाल कपड़े पहन, चेहरे को दाढ़ी से ढककर गरीबों को खाने की चीजें और उपहार बांटा करते थे। वे नहीं चाहते थे कि लोग उन्हें देखें, इसलिए रात में चुपचाप उनके घरों में उपहार रख देते थे। उनकी मृत्यु के बाद भी लोगों ने इस परंपरा को खत्म नहीं होने दिया।
सांता का वर्तमान रूप कब से है प्रचलित
सांता क्लॉस का रूपाकार सन् 1930 में प्रचलित हुआ। उस समय हैडन संडब्लोम नामक आर्टिस्ट ने कोका-कोला के एक विज्ञापन में सांता क्लॉस का किरदार बनाया था, वही आज का सांता है। इस किरदार को पेपर पर उतारने के लिए संडब्लोम ने एक हजार डॉलर लिए थे। उन्होंने सांता की रेड एंड वाइट ड्रेस कोका-कोला के आधिकारिक कलर रेड एंड वाइट से ली थी। यह सांता क्लॉस वाला कोका-कोला का विज्ञापन करीब 35 साल तक चला। लेकिन उसकी छवि आज भी प्रचलन में है।
कई कहानियां भी हैं प्रचलित
कुछ लोग मानते हैं कि फादर क्रिसमस और संत निकोलस के नाम से जाना जाने वाला सांता एक जादूगर है। ऐसा माना जाता है कि सांता का घर उत्तरी ध्रुव में है और वे क्रिसमस की एक रात पहले 24 दिसंबर को उड़ने वाले 8 रेंडियर के स्लेज पर सवार होकर क्रिसमस समारोह में पहुंच कर बच्चों को उपहार बांटते हैं। सांता क्लॉस के उड़ने वाले 8 रेंडियर के नाम हैं- डाशर, डांसर, प्रांसर, विकसन, कोमेट, क्यूपिड, दुंदर और ब्लिक्सेम।
कैथोलिक परंपरा के मुताबिक क्रिसमस की रात ईसाई बच्चे ईसा मसीह के नाम पत्र लिखकर सोने से पहले अपनी खिड़की पर टांग देते थे जिसमें उनकी इच्छा लिखी होती थी। संत निकोलस तुर्किस्तान के मीरा नामक शहर के बिपश थे, जो गरीबों और बेसहारा बच्चों को उपहार देते थे।
कैसे आया मोजे में उपहार रखने का चलन

क्रिसमस पर अक्सर बच्चे 24 दिसंबर की रात को अपने मोजे घर के बाहर टांग देेते हैं। इसके पीछे संत निकोलस के साथ जुड़ी एक कहानी है कि एक बार उन्होंने तीन गरीब बच्चों की मदद की थी। उन बच्चों के मोजे घर के बाहर लटक रहे थे जिसमें संत निकोलस ने सोने के सिक्के भर दिए थे। तब से क्रिसमस पर उपहार लेने के लिए बच्चों द्वारा घर के बाहर मोजे लटकाने की परंपरा चली आ रही है। जो लोग क्रिसमस नहीं मनाते, वो भी अपने बच्चों के लिए इस मौके पर उपहार देते हेैं।
इनके बिना अधूरा है क्रिसमस सेलिबेशन
क्रिसमस का दूसरा नाम है सेलिब्रेशन यानी कैरोल्स, क्रिसमस ट्री, स्टार्स, सांता क्लॉस, केक, कैंडल्स, कार्ड्स, गिफ्ट और मस्ती। इस पर्व पर कई पारंपरिक चीजों से की जाने वाली साज-सज्जा त्यौहार को खास बनाती हैं।
क्रिसमस ट्री
क्रिसमस के मौके पर क्रिसमस ट्री का विशेष महत्व है। माना जाता है कि एक लड़का सर्दी के दिनों में जंगल में अकेला भटक रहा था। ठंड से बचने के लिए उसने एक झोपड़ी का दरवाजा खटखटाया। झोपड़ी एक लकड़हारे की थी। वह उसे झोपड़ी में अंदर ले गया और उसे भोजन और गर्म कपड़े भी दिए। असल में वह लड़का एक फरिश्ता था जो लकड़हारे की अतिथि-सत्कार से बहुत प्रसन्न हुआ। उसने लकड़हारे को घर के पास खड़े फर के पेड़ से एक तिनका निकाला और लकड़हारे को जमीन में बोने के लिए कहा। लकड़हारे और उसकी पत्नी ने वैसा ही किया और उगे पेड़ की देखभाल करने लगे। एक साल बाद क्रिसमस के दिन उस पेड़ पर सोने-चांदी के बहुत सारे फल लगे। उस पेड़ की याद में आज भी क्रिसमस ट्री सजाया जाता है। आपने गौर किया होगा कि क्रिसमस ट्री के ऊपर गोल्डन स्टार लगा होता है। मान्यता है कि जब जीसस पैदा हुए थे, तब एक तारा टूट कर गिरा था। इसी के प्रतीक के रूप् में क्रिसमस ट्री पर सबसे ऊपर गोल्डन स्टार सजाया जाता है।
आधुनिक युग में क्रिसमस ट्री सजाने का चलन जर्मनी से शुरू हुआ। यूरोप में मान्यता है कि जिस रात जीसस का जन्म हुआ, जंगल के सारे पेड़ जगमगाने लगे थे और फलों से लद गए थे। इसीलिए लोग क्रिसमस ट्री को रंग-बिरंगी मोमबत्तियों, लाइट्स और घंटियों से सजाते हैं। माना जाता है कि पेड़ से लोगों के जीवन में निरंतरता आती है, घंटियां लगाने से बुरी आत्माएं दूर रहती हैं, घर में खुशियां आती हैं।
क्रिसमस स्टार्स

माना जाता है कि बेथलहम में जब ईसा मसीह के जन्म हुआ था। उस समय आसमान में एक तारा चमका था। उनके जन्म की सूचना स्वर्गदूतों के दल ने वहां के गड़ेरियों की दी कि तुम्हारे बीच एक ऐसे बालक ने जन्म लिया है जो भविष्य में तुम्हारा राजा बनेगा। ऐसा हुआ भी था। उन्हीं की याद में क्रिसमस से सप्ताह भर पहले लोग घरों में रंग-बिरंगे स्टार और स्टार आकार की पेपर लालटेन लगाते हैं।
गाए जाते हैं कैरोल्स
कैरोल्स यानी क्रिसमस के स्तुति गीत। कैरोल्स फ्रेंच भाषा के ‘केरोलर‘ से बना जिसका मतलब है- घूमते हुए नाचना। कैरोल्स को ‘नोएल‘ भी कहा जाता है। माना जाता है कि ईसा के जन्म पर स्वर्गदूतों ने पहला कैरोल गीत गाया था। आज भी क्रिसमस के मौके पर 24-25 दिसंबर के बीच मध्य रात को चर्च में ईसा मसीह की प्रशंसा में कैरोल गाए जाते हैं। लोग एक-दूसरे के घर जाकर प्यार और भाईचारे का संदेश देते हैं। क्या आप जानते हो कि लोकप्रिय क्रिसमस गीत ‘जिंगल बेल्स, जिंगल बेल्स, जिंगल ऑल द वे…………‘ को 1857 में जेम्स पियरपोंट ने कंपोज किया था, जो पहले ‘ वन-हार्स ओपन स्लेज‘ के नाम से जाना जाता था।
क्रिसमस फ्लावर
प्वाइसेतिया को क्रिसमस फ्लावर के नाम से जाना जाता है। इससे क्रिसमस में सजावट की जाती है। मैक्सिको में उगने वाला लाल और हरे पत्ते वाला यह फूल बहुत आकर्षक है। इस फूल को मैक्सिको के यूनाइटेड स्टेट मिनिस्टर ने पहली बार 1825 में अमेरिका को दिया था।
क्रिसमस बेल

क्रिसमस पर ऐंगलिकन और कैथोलिक चर्च में मध्य रात्रि में मास प्रेयर होती है। जिसमें पहला प्रेयर सर्विस शाम को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। चूंकि ईसा मसीह का जन्म मध्य रात्रि में हुआ था, इसलिए चर्च में इस समय घंटी बजाई जाती हैं।
उपहारों की रहती है भरमार
क्रिसमस का त्यौहार उपहारों के बिना अधूरा है। एक-दूसरे को उपहार देने की परंपरा है। इसका चलन ईसा मसीह के जन्म से शुरू हुआ था। कहा जाता है कि ईसा मसीह के जन्म की सूचना पाकर न्यूबिया और अरब के शासक मेलक्यांर, टारसस के राजा गॉस्पर और इथोपिया के सम्राट येरूशलम आए थे। वे अपने साथ ईसा मसीह के लिए तरह-तरह के उपहार लाए थे। तभी से क्रिसमस के मौके पर एक-दूसरे को उपहार देने की परंपरा की शुरूआत हुई।
