shani dev
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Shani Dev Puja Rules: हिंदू धर्म में शनि देव को कर्म फलदाता, दंडाधिकारी और न्याय का देवता के रूप में जाना जाता है। कहते हैं कि शनि देव यदि प्रसन्न हो जाएं तो रंक को भी राजा बना देते हैं। वहीं शनि देव क्रोधित हो जाएं तो कठोर दंड देते हैं। इसीलिए इन्हें न्याय का देवता और कर्मफल दाता कहा जाता है। शनि देव की पूजा में अन्य देवी-देवताओं की तुलना में कड़े नियम होते हैं, जिनका पालन करना पड़ता है। क्योंकि पूजा के दौरान हुई गलतियों से शनिदेव नाराज हो जाते हैं। आमतौर पर जब हम पूजा पाठ करते हैं तो देवी-देवताओं के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं और भगवान की आंखों को निहारते हुए विनती करते हैं, पूजा करते हैं और अपनी मनोकामना कहते हैं। लेकिन शनि देव की पूजा करते समय उनकी आंखों में देखना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि देव की दृष्टि को शुभ नहीं माना जाता। इसलिए पूजा पाठ के दौरान शनि देव की आंखों में नहीं देखना चाहिए। मान्यता है कि शनि देव की अशुभ दृष्टि जिस पर पड़ जाती है, उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं। आइए जानते हैं आखिर क्यों शनि देव की दृष्टि अशुभ है और क्यों पूजा करते समय उनकी आंखों में नहीं देखना चाहिए।

शनि की दृष्टि क्यों होती है अशुभ

Shani Dev katha

प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, शनि देव का विवाह चित्ररथ नमक गंधर्व की पुत्री भृगु से हुआ था जोकि तेजस्विनी और बहुत ही उग्र स्वभाव की थी। शनि देव श्रीकृष्ण के भक्त थे। एक बार में वे श्रीकृष्ण की आराधना में लीन थे, तभी उनकी पत्नी भृगु को संतान की प्राप्ति की इच्छा हुई और वह मिलन के लिए शनि देव के पास पहुंच गई। लेकिन शनि देव श्रीकृष्ण की आराधना में इतने व्यस्त थे कि उन्होंने पत्नी की ओर देखा तक नहीं।

इस अपमान से पत्नी आहत हो गई और उसने शनि देव को यह श्राप दे दिया कि जिस तरह से आपने मेरी ओर प्रेम से नहीं देखा उसी तरह आपकी दृष्टि भी अशुभ हो जाएगी और जिस पर आपकी दृष्टि पड़ेगी उसका भी अशुभ होगा। शनि देव ने पत्नी भृगु को श्राप वापस लेने के लिए बहुत मनाया, लेकिन वह नहीं मानी।
इस घटना के बाद शनि देव हमेशा सिर झुकाकर चलते हैं, जिससे कि किसी व्यक्ति पर उनकी दृष्टि न पड़ जाए। इसी श्राप के कारण भक्त भी शनि देव की पूजा करते समय उनकी आंखों में नहीं देखते हैं। क्योंकि शनि देव की अशुभ और तीव्र दृष्टि जिस व्यक्ति पर पड़ती है उसका अनिष्ट भी हो सकता है।

शनि देव की पूजा में इन नियमों का भी करें पालन

Shani Dev puja niyam
Shani Dev puja niyam
  1. शनि देव की पूजा के लिए शास्त्रों में कई नियम बताए गए हैं। शनि देव की पूजा के लिए शनिवार का दिन सबसे शुभ होता है।
  2. शनिवार को सूर्यास्त के बाद शनि मंदिर में शनि देव की पूजा की जाती है। शनि देव की पूजा हमेशा सूर्यास्त से पहले या फिर सूर्यास्त के बाद करनी चाहिए। क्योंकि इस समय उनका तेज अधिक होता है।
  3. इस बात का ध्यान रखें कि शनि देव की पूजा करते समय कभी भी पीतल के पात्र का इस्तेमाल न करें। इसका कारण यह है कि पीतल का संबंध सूर्य से होता है। सूर्य भले ही शनि के पिता हैं। लेकिन पिता पुत्र में शत्रुता का भाव है। शनि देव की पूजा के लिए लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा माना जाता है।
  4. शनि देव की पूजा में लाल रंग के फूल का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। इसके बजाय आप नीले फूलों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  5. शनि देव की प्रतिमा की ओर पीठ भी नहीं दिखना चाहिए, इससे शनि देव नाराज हो सकते हैं।

मैं मधु गोयल हूं, मेरठ से हूं और बीते 30 वर्षों से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है और हिंदी पत्रिकाओं व डिजिटल मीडिया में लंबे समय से स्वतंत्र लेखिका (Freelance Writer) के रूप में कार्य कर रही हूं। मेरा लेखन बच्चों,...