Rules of Daan: हिंदू धर्म शास्त्र में दान के महत्व के बारे में बताया गया है। दान देने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। दान देने का सामान्य अर्थ होता है किसी को अपने हिस्से के कुछ अंश का स्वामी बना देना। दान देना बहुत बड़ा परोपकार माना जाता है, जिसका पुण्य फल न केवल इस जन्म बल्कि मरणोपरांत भी प्राप्त होता है। इसलिए कहा जाता है कि मृत्यु के बाद आपके साथ अन्न, धन, संपत्ति, परिवार कुछ नहीं जाएंगे। बल्कि आपके पुण्य कर्म ही आपके साथ जाएंगे और इन्हीं कर्मों से स्वर्ग में स्थान मिलेगा। लेकिन दान का पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब इसे निस्वार्थ भाव और सही तरीके से किया गया हो। जाने-अनजाने में ऐसा कोई दान ना करें जो पुण्य फल के बजाय आपकी परेशानियों का कारण बन जाए। इसलिए शास्त्रों में दान देने के महत्व के साथ ही दान से जुड़े नियमों के बारे में भी बताया गया है।
शास्त्रों में दान के बारे में कहा गया है-
‘यस्य वित्तं न दानाय नोपभोगाय देहिनाम्।
नापि कीर्त्यै न धर्माय तस्य वित्तं निर्थकम्’।।
इस श्लोक का अर्थ है कि जिसका धन ना तो दान में प्रयुक्त होता है, ना लोगों के काम आता है, ना यश के लिए होता, ना धर्माजन के लिए खर्च होता है, उसका धन निरर्थक यानी किसी काम का नहीं है।

दान कई प्रकार के होते हैं जैसे- अन्नदान, विद्यादान, अभयदान आदि। इनमें अन्न दान को महादान बताया गया है। मान्यता है कि अन्न का दान करने से ग्रह दोष दूर होते हैं और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए अन्न के रूप में लोग गेहूं, दाल और चावल जैसी चीजों का दान करते हैं। लेकिन चावल का दान करते समय इससे जुड़े नियमों के बारे में जरूर जान लें। क्योंकि गलत दिनों में किए गए चावल का दान मुसीबत का कारण भी बन सकता है। इसलिए यह जान लीजिए किन दिनों में चावल का दान करने से बचना चाहिए।
इन दिनों में भूल कर भी ना करें चावल का दान

- शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि पर भूलकर भी चावल का दान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से श्रीहरि नाराज हो जाते हैं और इससे अशुभ फल मिलने लगते हैं। साथ ही एकादशी के दिन चावल खाना और पकाना भी वर्जित माना जाता है। इसलिए इस दिन गरीब या जरूरतमंदों में चावल का दान ना करें।
- शास्त्रों में शनिवार के दिन भी चावल का दान करना वर्जित बताया गया है। यदि आप इस दिन चावल का दान करते हैं तो उसमें काले तिल या हल्दी मिलाकर दान करें।
- सूर्यास्त के बाद भी चावल का दान नहीं करना चाहिए। चावल के साथ ही अन्य किसी भी चीजों का दान सूर्यास्त के बाद करने से बचें। ऐसा करने से अशुभ परिणाम मिलते हैं।
- शुक्रवार का दिन धन-वैभव की देवी मां लक्ष्मी से जुड़ा होता है। इसलिए इस दिन भी चावल का दान करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि शुक्रवार को चावल का दान करने से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है।
- जिनकी कुंडली में चंद्रमा उच्च राशि या स्वराशि में होते हैं उन्हें भी चावल का दान करने से बचना चाहिए। कुंडली में ग्रह-नक्षत्र की ऐसी स्थिति होने पर यदि चावल का दान किया जाए तो इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।
- चावल का दान करते समय इस बात का ध्यान रखें की उसे तांबे के बर्तन में रखकर दान नहीं करें। ऐसा करना अशुभ माना जाता है और इससे आर्थिक तंगी बढ़ने लगती है।
