भारत,यूरोप,अफ़्रीका,एशिया,और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देने वाला उपच्छाया चंद्र ग्रहण वर्ष २०२० साल का यह दूसरा उपच्छाया चंद्रग्रहण है.

 ग्रहण ५ july की रात ११ बजकर १६ मिनट से शुरू होगा और इसकी समाप्ति रात २ बजकर ३२ मिनट के क़रीब होगा..१२ बजकर ५४ मिनट पर इस ग्रहण का प्रभाव सर्वाधिक होगा.उपच्छाया चंद्रग्रहण होने के कारण इस ग्रहण का प्रभाव कम होगा.ज्योतिष में तो उपच्छाया चंद्रग्रहण को  ग्रहण,माना ही नहीं जाता.

एक खगोलीय घटना है चंद्रग्रहण.ये वैज्ञानिक और धार्मिक व ज्योतीषिय दृष्टि दोनो से महत्वपूर्ण माना जाता है.पूर्णिमा पर ,चंद्रमा का प्रभाव अधिक देखा जा सकता है,जबकि,अमावस्या के दौरान  सबसे कम होता है. लोगों का मानना है कि आसपास के लोगों के बर्ताव का पूर्णिमा और अमावस्या के अंतर को देखा जा सकता है.

क्या है अंतर उपच्छाया चंद्रग्रहण और चंद्रग्रहण में-जब प्रथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है और धरती की पूर्ण या आंशिक छाया चाँद पर पड़ती है तब इसे चंद्रग्रहण माना जाता हैइससे चाँद का बिब काला पड़ जाता है.

        उपच्छाया चंद्रग्रहण में ,ग्रहण लगने से पहले चंद्रमा प्रथ्वी की उपच्छाया में प्रवेश करता है (जिसे अंगेज़ी मेंpenumbra कहते हैं )यानी चन्द्र मालिन्य. इसके बाद चंद्रमा प्रथ्वी की वास्तविक भूभा में प्रवेश करता है तभी वास्तविक चन्द्रग्रहण होता है. लेकिन कई बार चंद्रमा धरती की उपच्छाया में प्रवेश किए बिना ही बाहर निकल आता है इसलिए उपच्छाया के समय चंद्रमा का बिंब काला न होकर धुँधला नज़र आता है.इस धुँधलेपन को आप (naked eye)बिना दूरबीन लगाए देख नहीं सकते.

  इस दौरान बुज़ुर्गों ,गर्भवती महिलाओं और बच्चों का अधिक ध्यान रखना चाहिए.सूतक के दौरान भगवान की मूर्तियों को छुआ नहीं जाता. यहाँ तक कि मंदिर के कपाटों को भी बंद कर दिया जाता है.

पूजन विधि और क्या करें ग्रहण के बाद-  ग्रहण के दौरान कई तरह की नकारात्मक ऊर्जाओं का उत्सर्जन होने के कारण ,ग्रहण के अशुभ प्रभावों को नष्ट करने के लिए,अशुभ प्रभावों को नष्ट करने के लिए,भगवान शिव की उपासना करें शिव चालीसा का पाठ करें.ओम् नमःशिवाय के मंत्रो का जाप करें.इस से अशुभ प्रभाव कम होंगे.प्रातः नित्य कर्म से निवृत्त होकर,स्नान करने के बाद,एक लाल कपड़े में पीले चावल के २१ अखण्डित दाने रखे और माता लक्ष्मी की चौकी बनाएँ और उस पर ये लाल कपड़े में बँधे चावल रखें. इसके बाद विधिपूर्वक पूजन करें. पूजन के बाद यह लाल कपड़े में बँधे चावल अपने पर्स में छिपाकर रख लें.इस उपाय से माना जाता है माता लक्ष्मी प्रसन्न होती  हैं.

 सफ़ेद  तिल का दान करें.बुज़ुर्गों का आशीर्वाद लेकर दीन दुखियों को दान करें.

 हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को एक धार्मिक घटना माना गया है,जिसका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है,क्योंकि उपच्छाया चंद्रग्रहण को नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता इसलिए, इस ग्रहण का कोई धार्मिक महत्व नहीं होता,और न ही इनका पंचांग में समावेश नहीं होता है

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