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Boundaries for Success
Boundaries are Essential for Success

Boundaries for Success: माना जाता है कि महिलाओं में मल्टीटास्किंग का गुण गॉडगिफ्टेड होता है। चाहे वह घर, परिवार हो या प्रोफेशन या ऑफिस. उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि हर जिम्मेदारी वही संभालें। इसमें कोई शक नहीं है कि कई महिलाएं घर और बाहर की जिम्मेदारियां बाखूब निभाती भी हैं। लेकिन इनमें सामंजस्य बिठाने की एवज में अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ और स्वास्थ्य की अनदेखी भी करती हैं। नतीजतन कामयाबी के मुकाम पर पहुंचने की कशमकश में न चाहते हुए भी तनावग्रस्त रहती र्है और अनेक शारीरिक और मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाती है। मनोचिकित्सक डॉ रोहित शर्मा का मानना है कि महिलाओं को अपने आसपास कुछ बाउंडरीज तय जरूर करनी चाहिए ताकि वे तनावमुक्त होकर काम कर सकें और कामयाब हो सकें.

करें टाइम मैनेजमेंट

महिलाओं के लिए जरूरी है कि टाइम मैनेजमेंट या टाइमफ्रेम बनाकर चले। उन्हे हर काम चाहे वह काम पर्सनल हो या परिवार संबंधी हो। महिलाओं को नियत टाइम और शेड्यूल के हिसाब से काम करने की कोशिश करनी चाहिए। प्रोफेशन और पर्सनल लाइफ में बैंलेंस बनाकर चलना चाहिए। दोनों को बराबर टाइम और महत्व देना चाहिए ताकि वे एक-दूसरे पर हावी न हों।

अपना ड्यूटी-टाइम करें तय

वर्किंग महिलाओं कोे अपना ड्यूटी-टाइम तय करना जरूरी है जैसे- 9-5 या 10-6 तक। कोशिश करनी चाहिए कि प्रोफेशनल काम नियत टाइमफ्रेम में ही पूरा हो, घर न लाना पड़े। इसके लिए काम रोजाना साथ के साथ पूरा करें, बाद में करने या कल के लिए टालना नहीं चाहिए। इससे ऑफिस वर्कलोड बढ़ता जाएगा। जिससे न चाहते हुए भी स्ट्रेस से घिर जाएंगी जिसका असर पर्सनल लाइफ या घर-परिवार पर भी पड़ेगा।

दूसरों के साथ न करें पर्सनल इंटीमेसी कायम..

ऑफिस में दूसरों के साथ पर्सनल इंटीमेसी कायम न करके अपने काम को अहमियत देनी चाहिए, ताकि दूसरे आपका फायदा न उठा पाएं। अगर कोई ऐसा करता भी है, तो महिलाओं को बेहिचक और दृढ़ता से उसका विरोध करना आना चाहिए।

ट्रांसपेरेंटरहें

घर-परिवार में उन्हें शुरू से ही ट्रांसपेरेंट होना चाहिए। महिलाओं को अपनी कार्यक्षमता के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। यह मानना जरूरी है कि वे सुपर वूमन नहीं हैं जो घर और बाहर सारे काम कर सकें। दूसरों के एक लिमिट से ज्यादा काम कराने पर उन्हें न कहना आना चाहिए। अगर महिलाएं शुरू से ही ट्रांसपेरेंट रखें तो आगे दिक्कत नहीं होगी।

सबको जिम्मेदारी बांटें-

घर के छोटे-मोटे काम होते हैं जिन्हें कई बार महिलाएं कर नहीं पातीं। ऐसे काम उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों को सौंपने चाहिए। इससे एक तो उनका काम हल्का होगा, फैमिली बाउंडिंग भी बढेगी। चाहे तो इसके लिए अपने पति की मदद लेनी चाहिए क्योंकि वो उसके और ससुुराल के बीच की कड़ी हैं। लेकिन जब महिला सारे काम करने लगती हैं तो परिवार के सदस्य भी यही मानने लगते हैं कि घर के काम वही करेगी। एक समय के बाद वो बर्नआउट हो जाती हैं और अपने परिवार का ध्यान ठीक तरह से नहीं रख पाती। मानसिक तनाव भी रहता है। जिसका असर उनकी प्रोफेशनल लाइफ पर भी पड़ता है।

Boundaries for Success
Share the responsibility to everyone

अपनाएं स्वस्थ जीवनशैली-

तनावमुक्त रहकर काम करने के लिए जरूरी है कि महिलाएं स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं। अपनी दिनचर्या निर्धारित करें। रात को जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने का रूटीन बनाएं। बाकी काम उसी के हिसाब से रेगुलेट करें। रोजाना कम से कम 6 घंटे की नींद जरूर लें। इसका सीधा असर उनकी सेहत और कार्यक्षमता पर पड़ता है। शरीर को अगर पूरा आराम नहीं मिल पाता है तो दिमाग अशांत रहने लगता है। साथ ही महिलाएं तनावग्रस्त हो जाती हैं और दवाब में आकर काम करती हैं। लेकिन एक समय के बाद उनका शरीर सिगनल देने लगता है यानी उन्हें सिर दर्द , बदन दर्द रहता है या स्वभाव में चिड़चिड़ाहाटपन आ जाता है।

Boundaries for Success
Adopt healthy lifestyle

मी टाइम है जरूरी-

महिलाओं को पर्सनल कामों के लिए कुछ टाइम जरूर निकालना चाहिए। अपने लिए दिए गए टाइम में वे अपनी पसंद के कोई भी काम कर सकती हैं चाहे वो रिक्रिएशनल एक्टिविटीज हो या हॉबीज हों। रीडिंग-राईटिंग, डांस करना, म्यूज़िक सुनना, कुकिंग, गार्डनिंग ,सिलना-बुनना। इस टाइम में खुद को फिट रखने के लिए मनपसंद फिजीकल एक्टिविटीज की भी प्लानिंग करनी चाहिए जैसे-मार्निंग वॉक, जॉगिंग, योगा, एरोबिक एक्ससाइज, मेडिटेशन करें।

Boundaries for Success
Me time is important for everyone

इनसे उन्हें स्ट्रेस कम करने में काफी मदद मिलेगी। घरेलू महिलाएं चाहें तो कोई नया कोर्स कर सकती हैं और अपनी हॉबीज को व्यवसाय में तबदील कर सकती हैं।

आर्थिक रूप से रहें मजबूत-

महिला का आर्थिक रूप् से मजबूत होना बहुत जरूरी है। वर्किंग महिलाओं को पति की रजामंदी से अपनी सेलरी या पैमेंट अलग रखनी या भविष्य के लिए लांगटर्म फाइनेंशियल प्लानिंग करना बेहतर है जैसे- बैंक एफडीए, म्यूच्यल फंड पीपीएफ। घरेलू महिलाएं भी अपने पति के साथ जाइंट फाइनेंस कर सकती हैं। पोस्ट रिटायरन्मेंट या 60 साल से ज्यादा उम्र के बाद फाइनेंशियली स्ट्रांग रहने के लिए शुरू से ही से प्लान करें। इससे उनमें कांफिडेंस आएगा और वे जरूरत पड़ने पर किसी की मोहताज नहीं रहेंगी।

सोशल दायरा करें कायम-

फ्रेड सर्कल बनाने ओैर उसे कायम रखने में महिलाओं को अपनी वरीयता तय करनी चाहिए। अपने टाइम मेैनेजमेंट को ध्यान में रखकर यह देखना चाहिए कि दोस्तो के साथ बिताया जाने वाला समय उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में किसी तरह की बाधा न डाले।

नकारात्मक विचारों वाले रिश्तेदारों से दूर रहें-

महिलाओं को फैमिली प्रेशर और सोशल प्रेशर की वजह से नकारात्मक स्वभाव वाले कई रिश्तेदारों को झेलना पड़ता है। उनका नकारात्मक रवैया महिला को परेशान कर सकता है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। अच्छा होगा कि ऐसे रिश्तेदारों को नकारात्मक विचारों के बारे में महिला को अपने पति या परिवार के अन्य सदस्यों के साथ शेयर करना चाहिए। इससे उन्हें इमोशनल सपोर्ट जरूर मिलेगा जिससे रिश्तेदारों से दूरी बनाना आसान होगा।

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