इन 7 तरीकों से दूसरों के साथ सेट करें बाउंड्री: Self Boundary
Self Boundaries

Self Boundary: अगर आपको लगता है कि आप भी अपनी फैमिली या फ्रैंड्स ग्रुप में वो इंसान बनते जा रहे हैं जिसे फॉर ग्रांटेड लिया जा रहा है तो यह वो समय है जहां आपको दूसरों के साथ बाउंड्रीज को सैट करना जरूरी। कहीं ऐसा न हो कि इन बातों से आपकी पर्सनेलिटी इफैक्ट हो। ऐसे में बाउंड्रीज सैट करने से आपकी पर्सनेलिटी में एक पॉजिटिविटी आती है। हो सकता है कि जब आप यह बाउंड्रीज सैट कर रहे हों तो लोगों को बुरा लगे। लेकिन इस बात पर आप ज्यादा चिंतित न हो क्योंकि वो धीरे-धीरे इस बात को समझ जाएंगे। इस आर्टीकल में हम जानते हैं कि दूसरों के साथ बाउंड्रीज सैट करने के 7 तरीकों के बारे में बताएंगे।

Self Boundary:पेपर वर्क

Self Boundary
Self Boundary-Paper Work

आपको बाउंड्रीज सैट करने के लिए सबसे पहले पेपरवर्क करना होगा। एक सर्कल बनाएं इसमें उन बातों को लिखें जो आपको खुशी देती हैं और दूसरी टेबल बनाकर उन बातों को लिखें जो आपको पसंद नहीं हैं। हालांकि यह पैपर वर्क करने में आपको टाइम लगने वाला है लेकिन कहीं न कहीं आप भी क्लियर हो जाएंगी कि आपको क्या पसंद है और क्या नहीं। लेकिन यह सर्कल आपके खुश रहने की चाभी है।

उसूलों पर रहें कायम

अपनी लिस्ट पर अच्छे से काम करने के बाद खुद अपने उसूलों पर कायम रहें। आप अपने आस-पास के लोगों को बता सकती हैं कि आपको क्या पसंद है और क्या नहीं- लेकिन साइकोलॉजिस्ट सफिया अख्तर कहती हैं कि लोग अक्सर अपनी लिस्ट बना लेते हैं लेकिन बहुत बार वो अपनी लिस्ट पर कायम नहीं रहते जैसे कि आपने अपनी लिस्ट में लिखा कि ‘मुझे कोई बार-बार टच करते हुए बात करे पसंद नहीं है’ लेकिन पता चलता है कि आप ही दूसरों को टच करके बात कर रहे हैं या कभी आप बुरा मान रहे हैं या कभी उस चीज के साथ नार्मल हैं तो इससे सामने वाला सिवाए कंफ्यूज होने के कुछ नहीं होता। अपनी बात पर कायम रहें और वो चीज तो बिल्कुल भी दूसरों के साथ न करें जो आपको अपने लिए पसंद नहीं है। कई लोगों को मजाक करने की आदत होती है। वे मजाक-मजाक में दूसरों की पर्सनेलिटी पर कमेंट भी कर देते हैं लेकिन जब खुद की बारी आती है तो वो सेंसेटिव हो जाते हैं।

ओवरकमिट करना बंद करें

आप हर समय हर बात पर हां नहीं कह सकते। आप एक इंसान हैं, इसलिए हां के साथ आपको न कहने की कला को सीखना होगा। कई बार न नहीं कह पाने की वजह से महिलाएं इतना ओवर कमिट कर लेती हैं कि खुद को मेंटली और फिजिकली परेशान कर लेती हैं। आपको खुद की काउंसलिंग करनी है। आप हर चीज नहीं कर सकते। अगर किसी भी काम की वजह से आपको स्ट्रेस हो रहा है तो या तो उसे मैनेज करें या फिर उस काम को न करें। ओवर कमिटमेंट की वजह से आपको मूड स्विंग की प्रॉब्लम हो जाती है। और आपको लगने लगता है कि लोग आपको यूज कर रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है। लेकिन जब आप ओवर कमिट करके वो काम नहीं कर पाते हैं तो मौका आप दूसरे को दे रहे हैं।

प्राथमिकता क्लियर रखें

हर किसी की जिंदगी में कुछ न कुछ प्रायोरिटी सैट होती है। आप जितना ज्यादा इस बात पर क्लियर रहेंगे आप खुद से पहचान पाएंगे कि आप अपना वक्त और एनर्जी किस पर लगाना चाहते हैं। दूसरों की प्रायोरिटी के हिसाब से बिल्कुल भी न चलें। जिंदगी आपको सिर्फ एक बार मिली है इसे दूसरों की वजह से खराब न करें। अपने जीवन पर आपका इतना अधिकार तो है ही कि आप अपनी प्रायोरिटी सैट कर सकते हैं। आपकी जिंदगी में आपके अलावा दूसरा कैसे इम्पोर्टेंट हो सकता है? इसके लिए सबसे जरुरी है कि आप खुद को टाइम दें। अगर आपके पास समय नहीं है तो आप 15 मिनट का टाइम लें। इस टाइम के बाद आपको पता चलेगा कि आप दूसरे के लिए ज्यादा हेल्पफुल हो पाएंगे।

कहना होगा कि बस और नहीं

Boundaries
Just not anymore

बहुत बार हम अपने आस-पास लोगों को देखते हैं कि लोग एक दूसरे की बातों को बेवजह बर्दाशत करते हैं। यदि आपके आस-पास के लोग हमेशा ऐसी ही बातें कर रहे हैं जो आपको पसंद नहीं है या जिसे सुनकर आपको तकलीफ होती है तो उसे बर्दाशत करने की और घुटने की जरुरत नहीं हैं। आप बेशक इस बात को कह सकते हैं कि मुझे यह चीज पसंद नहीं है। ऐसा बहुत होता भी है कि लोगों को कभी पता नहीं चलता कि आपको किस बात का बुरा भी लग रहा है। हां लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बातों का बोझ लेकर न बैठें। बात तभी करें जब बात चल रही हो। जब आप अपने लिए स्टैंड लेंगे तो दूसरों की नजर से ज्यादा आपकी नजर में आपकी इज्जत बनेगी।

सराहना करें, हतोत्साहित नहीं

बेशक दूसरों की तारीफ करनी चाहिए लेकिन इसे करने में इस बात का ध्यान दें कि दूसरे की तारीफ करते-करते अपनी बुराई न करने लग जाएं। जैसे कि आप किसी के खाने की तारीफ कर रही हैं तो आप कहने लगें कि आलू की सब्जी तो आपने बहुत अच्छी बनाई है। मुझसे तो कोई भी सब्जी अच्छी बनती ही नहीं। दूसरे की तारीफ करते समय अपनी बुराई करने की क्या जरुरत? खुद को नीचा न दिखाएं। जब आप ऐसा करते हैं तो आप अपनी ही बनाई गई बाउंड्री में छेड़छाड़ कर रहे होते हैं।

पर्सनेलिटी को वजनदार बनाएं

आपके साथ दूसरा कैसा बिहेव करेगा यह कहीं न कहीं आप पर डिपेंड करता है। अपनी पर्सनेलिटी में वो वजन लेकर आए ताकि लोग उस बॉर्डर को क्रॉस करने की कोशिश न करें। जैसे कि अपनी डिसीजन मेकिंग पावर को स्ट्रॉन्ग करें। अगर किसी बात पर आपकी राय मांगी जा रही है तो पहले तोलें और फिर बोलें। नई चीज या नई तकनीक को सीखते रहें। खुद पर किसी भी तरह का नेगेटिव कमेंट न करें। जो भी आपकी उम्र है अपनी उस उम्र को पूरे आत्मविश्वास के साथ जियें। अगर आप इन सभी तरीकों को अपनाएंगे तो खुद दूसरों की नजर में अपनी छवि को बदलता हुआ देखेंगे।