ATM Skimming: कल्पना कीजिए आप शाम को अपने ऑफिस से लौटते हुए नजदीकी एटीएम से 2,000 हजार रुपये निकालते हैं। मशीन सामान्य दिखती है, कोई परेशानी नहीं होती। आप चैन की सांस लेकर घर पहुंचते हैं। लेकिन जब अगली सुबह आप बैंक का मैसेज चेक करते हैं, तो आपको पता चलता है कि रात भर में आपके खाते से 60,000 हजार रुपये निकाले जा चुके हैं। न कोई OTP आया, न कोई कॉल, न कोई कार्ड गुम हुआ। तो फिर यह कैसे हुआ?
इस तरह की घटनाएं अब सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं। ATM स्किमिंग आज एक ऐसा खतरा बन चुका है, जिससे हर जागरूक और सतर्क व्यक्ति को भी दो-चार होना पड़ सकता है।
क्या होता है एटीएम स्किमिंग फ्रॉड?
एटीएम स्किमिंग एक प्रकार की धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी एक डिवाइस का इस्तेमाल करके एटीएम उपयोगकर्ताओं के क्रेडिट या डेबिट कार्ड की जानकारी चुरा लेते हैं। स्किमिंग डिवाइस आमतौर पर एटीएम के कार्ड स्लॉट पर या उसके आसपास लगाए जाते हैं और इन्हें मशीन का असली हिस्सा दिखाने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
जब कोई उपयोगकर्ता अपना कार्ड एटीएम में डालता है, तो यह स्किमिंग डिवाइस कार्ड के मैग्नेटिक स्ट्राइप को पढ़कर उसमें मौजूद जानकारी को रिकॉर्ड कर लेता है। एक बार जब अपराधियों के पास कार्ड की जानकारी और पिन कोड आ जाता है, तो वे एक क्लोन कार्ड बनाकर धोखाधड़ी से खरीदारी या नकद निकासी कर सकते हैं।
कैसे पहचानें कि कोई एटीएम स्किमिंग डिवाइस लगा है?
कार्ड स्लॉट सामान्य से बड़ा या बाहर निकला हुआ दिखे।
कीपैड ऊपर से लगा हुआ, ढीला या थोड़ा अलग रंग का हो सकता है।
स्क्रीन पर रेस्पॉन्स स्लो हो जाए, या मशीन बार-बार कार्ड रिजेक्ट करे।
कोई अजीब सी वायरिंग, कैमरा या छोटा डिवाइस एटीएम के आसपास दिखाई दे।
अगर मशीन आपके कार्ड को जल्दी रिलीज न करे या असामान्य आवाज़ हो।

स्किमिंग से कैसे बचें?
हमेशा सतर्क रहें
जिस एटीएम से पैसे निकाल रहे हैं, पहले उसे ध्यान से देखें। किसी भी असामान्य हिस्से को तुरंत पहचानें और अगर शक हो, तो उस मशीन का इस्तेमाल न करें।
पिन डालते वक्त कीपैड को हाथ से ढकें
छिपे हुए कैमरे अक्सर ऊपर या साइड में लगे होते हैं, ताकि वे आपके हाथों की मूवमेंट रिकॉर्ड कर सकें।
एटीएम लोकेशन का चुनाव सोच-समझकर करें
बैंक के अंदर या गार्ड वाले एटीएम, या CCTV से लैस लोकेशन सबसे सुरक्षित मानी जाती हैं। सुनसान या लो-लाइट इलाकों के एटीएम से बचें।
SMS और Email अलर्ट्स एक्टिवेट रखें
हर ट्रांजैक्शन का तुरंत पता चलता है, जिससे कोई गड़बड़ी होने पर आप तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं।
कार्ड हमेशा अपनी निगरानी में स्वाइप कराएं
रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप या दुकानों में कभी भी कार्ड को किसी और के हाथ में देकर अंदर न भेजें। स्किमिंग वहीं भी हो सकती है।
समय-समय पर पिन बदलते रहें
अगर किसी को पिन मिल भी जाए, तो वह लंबे समय तक उपयोग नहीं कर पाएगा।
अगर स्किमिंग हो जाए तो क्या करें?
तुरंत बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल करें और कार्ड ब्लॉक कराएं।
डेट, समय, स्थान और अमाउंट की जानकारी दें।
डिस्प्यूट फॉर्म भरें या बैंक द्वारा मांगे जाने पर एफिडेविट दें।
नजदीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराएं।
साइबर क्राइम पोर्टल (https://cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें।
आरबीआई और साइबर सेल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में एटीएम स्किमिंग और कार्ड क्लोनिंग के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हुई है। खासकर बड़े शहरों के व्यस्त एटीएम या कम देखभाल वाले मशीनों में ये फ्रॉड ज्यादा होते हैं। एटीएम स्किमिंग का शिकार कोई भी हो सकता है चाहे आप कितने ही जागरूक क्यों न हों। पर अगर आप हर बार एटीएम इस्तेमाल करने से पहले थोड़ी सावधानी बरतें, तो आप इस डिजिटल ठगी से बच सकते हैं।
